ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।।
12 जून 2025 को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक कड़ा और संवेदनशील संदेश देते हुए विस्तृत जागरुकता एवं जांच अभियान चलाया। इस मुहिम का उद्देश्य न केवल बाल श्रम पर कानूनी जानकारी देना था, बल्कि उन संस्थानों, कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों को सचेत करना भी था जो लापरवाहीवश या जानबूझकर बच्चों से काम करवा सकते हैं।

इस अभियान की अगुवाई प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस के दिशा-निर्देशों में की गई, जिसमें प्राधिकरण की टीम, सेनेटरी पर्यवेक्षक और मैनेजमेंट अधिकारी सक्रिय रूप से शामिल रहे।


"बाल श्रम नहीं, शिक्षा है बच्चों का अधिकार" – श्रीलक्ष्मी वीएस

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

"हर बच्चे को एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य देने के लिए यह ज़रूरी है कि उन्हें बाल श्रम के जाल से दूर रखा जाए। यह सिर्फ कानूनी दायित्व नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी है।"

उन्होंने बताया कि यह अभियान सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है जो श्रमिक अधिकारों की रक्षा और बच्चों की शिक्षा एवं बचपन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।


औद्योगिक क्षेत्रों में चला औचक निरीक्षण, बाल मजदूरी पर सख्त नजर

एसीईओ के निर्देश पर मैनेजर संध्या सिंह के नेतृत्व में प्राधिकरण की टीम ने ईकोटेक-3 स्थित राइज इलेवन कंपनी में औचक निरीक्षण किया। इस दौरान:

  • कर्मचारियों के आधार कार्ड और पहचान पत्रों की जांच की गई।
  • सभी श्रमिकों की उम्र का सत्यापन किया गया।
  • बाल श्रम से संबंधित कानूनों और दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी गई।

हालांकि मौके पर कोई बाल श्रमिक नहीं पाया गया, लेकिन प्राधिकरण ने कंपनी प्रबंधन को सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में यदि बाल श्रम पाया गया तो कानूनी कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी।


सेनेटरी पर्यवेक्षकों की टीम भी सक्रिय

प्राधिकरण की टीम के साथ सेनेटरी पर्यवेक्षक नीरज कुमार, दिनेश, राकेश पाल और सतीश अधाना ने भी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में जाकर कंपनियों में:

  • बाल श्रम निषेध अधिनियम, 1986 के तहत जानकारी साझा की।
  • श्रमिकों को उनके अधिकारों और बच्चों की शिक्षा की महत्ता पर भी अवगत कराया।
  • यह सुनिश्चित किया कि कोई नाबालिग श्रमिक काम पर न हो।

इन टीमों का उद्देश्य केवल जांच और चेतावनी नहीं, बल्कि मानवता के पहलू को समझाते हुए एक संवेदनशील परिवर्तन लाना भी था।


"श्रम नहीं, स्कूल चाहिए!" – बाल श्रम के खिलाफ जन-जागरूकता का उद्देश्य

बाल श्रम निषेध दिवस की मूल भावना यही है कि हर बच्चे को उसका अधिकार मिले – खेल, पढ़ाई और सुरक्षित बचपन। प्राधिकरण का यह अभियान उस दिशा में एक मजबूत सामाजिक संदेश है।

श्रीलक्ष्मी वीएस ने कहा कि इस प्रकार के औचक निरीक्षण और शिक्षा अभियान नियमित रूप से आगे भी जारी रहेंगे ताकि ग्रेटर नोएडा बाल श्रम मुक्त क्षेत्र बन सके।


? बाल श्रम के कानून की मुख्य बातें

? बिंदु? विवरण
कानूनबाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986
संशोधन2016 में संशोधित, 14 वर्ष से कम बच्चों से काम करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित
सजादोषी पाए जाने पर ₹20,000 से ₹50,000 तक जुर्माना या 6 माह से 2 साल तक की जेल
अपवाद14 वर्ष से ऊपर किशोर कुछ सीमित पारिवारिक कार्यों में शामिल हो सकते हैं, शिक्षा के साथ

प्राधिकरण का प्रयास – केवल कानून का पालन नहीं, संवेदना का विस्तार

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का यह कदम इस बात का संकेत है कि कानून के साथ-साथ सामाजिक चेतना का विकास भी ज़रूरी है। सिर्फ दंड नहीं, लोगों को समझाकर उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना इस मुहिम का मूल उद्देश्य है।


अभियान की झलकियां

  • ? राइज इलेवन कंपनी में दस्तावेज़ों की जांच
  • ? सेनेटरी पर्यवेक्षकों की टीम का फील्ड विज़िट
  • ? कर्मचारियों को जानकारी देते हुए महिला अधिकारी संध्या सिंह
  • ? बच्चों की शिक्षा को लेकर जागरूकता पोस्टर्स का वितरण

? जनता से अपील

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने स्थानीय निवासियों, कंपनियों, ठेकेदारों और प्राइवेट संस्थानों से अपील की है कि यदि वे कहीं भी बाल श्रम की सूचना पाते हैं, तो तुरंत इसकी जानकारी प्राधिकरण या पुलिस को दें। बाल श्रम रोकने में जन सहयोग अहम है।


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