10 प्रतिशत विकसित आबादी के प्लॉट, आबादी मामलों और भूमिहीनों को दुकानों के आवंटन समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा; 6 अक्टूबर से आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों की लंबित मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच करीब तीन घंटे तक मैराथन बैठक हुई। बैठक में किसानों की 10 प्रतिशत विकसित आबादी के प्लॉट, आबादी से जुड़े मामलों, नए कानून और भूमिहीन किसानों को दुकानों के आवंटन समेत विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO), जिलाधिकारी और जॉइंट पुलिस कमिश्नर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। किसान प्रतिनिधियों ने लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिए जाने की मांग रखी और शासन स्तर पर स्पष्ट समयसीमा के साथ आगे की कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

5 अक्टूबर तक लखनऊ में वार्ता का आश्वासन

बैठक के दौरान किसान प्रतिनिधियों को 5 अक्टूबर तक लखनऊ में मुख्य सचिव और औद्योगिक विकास आयुक्त स्तर पर वार्ता कराने का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट से संबंधित प्रस्तावों को लेकर शासन स्तर से कुछ बिंदुओं पर जानकारी और स्पष्टीकरण मांगे गए हैं। इसके जवाब और आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।

किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक लखनऊ में होने वाली वार्ता में यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक प्रगति होती है, तो इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। किसान नेताओं ने कहा कि वे शासन स्तर पर होने वाली बैठक में सभी लंबित मुद्दों को तथ्य और दस्तावेजों के साथ रखने की तैयारी कर रहे हैं।

10 प्रतिशत विकसित प्लॉट समेत कई मांगें

किसान प्रतिनिधियों के अनुसार 10 प्रतिशत विकसित आबादी के प्लॉट समेत अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। बैठक में किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्राधिकरण और किसान प्रतिनिधियों के बीच आवश्यक ‘होमवर्क’ पूरा किया जाएगा, ताकि शासन के समक्ष होने वाली वार्ता में प्रत्येक मुद्दे को स्पष्ट रूप से रखा जा सके।

बैठक में आबादी से जुड़े मामलों, नए कानून के प्रावधानों और भूमिहीन किसानों को दुकानों के आवंटन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि इन मुद्दों पर ठोस समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।

समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

किसान नेताओं ने कहा कि सरकार और प्रशासन की ओर से तय समयसीमा के भीतर यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो 6 अक्टूबर से आंदोलन को दोबारा तेज किया जा सकता है। उनका कहना है कि शासन स्तर पर प्रस्तावित वार्ता को लेकर किसान पक्ष अपनी मांगों और संबंधित दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से तैयार करेगा।

बैठक के बाद अब किसानों की नजर 5 अक्टूबर तक प्रस्तावित लखनऊ वार्ता पर है। इस बैठक में होने वाली चर्चा और शासन स्तर से लिए जाने वाले निर्णयों के आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय किए जाने की बात किसान प्रतिनिधियों ने कही है।