ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) में छात्रों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, हॉस्टल व्यवस्था और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की है। ABVP की गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष देवांश उपाध्याय ने छात्रों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने और प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना जारी करने की मांग की है। देवांश उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विशेष रूप से तुलसीदास छात्रावास की छत गिरने की घटना का उल्लेख करते हुए इसे विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

तुलसीदास हॉस्टल की घटना पर जांच की मांग

ABVP अध्यक्ष ने कहा कि छात्रावास की छत गिरने की घटना को महज एक दुर्घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, यह घटना परिसर में जर्जर आधारभूत संरचना और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। ABVP की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में विश्वविद्यालय के सभी जर्जर भवनों और छात्रावासों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की गई है। साथ ही जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और आवश्यकतानुसार मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के लिए ठोस योजना तैयार करने की मांग भी रखी गई है।

हॉस्टल में सफाई, पानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

छात्र संगठन ने छात्रावासों की मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। ABVP ने हॉस्टल में स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, बिजली और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। इसके साथ ही नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने तथा पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है। छात्र संगठन ने परिसर में लगे CCTV कैमरों की निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

हॉस्टल छोड़ चुके छात्रों से फीस मांगने का मुद्दा

देवांश उपाध्याय ने हॉस्टल रिकॉर्ड और फीस से जुड़ी समस्या को भी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि कई ऐसे छात्र छात्रावास छोड़ चुके हैं, जिन्होंने इसके लिए लिखित आवेदन और विश्वविद्यालय को सूचना भी दे दी है। इसके बावजूद उनके नाम अभी भी हॉस्टल रिकॉर्ड या डैशबोर्ड पर दिखाई दे रहे हैं और उनसे हॉस्टल फीस की मांग की जा रही है। ABVP ने मांग की है कि ऐसे छात्रों के रिकॉर्ड को तत्काल अपडेट किया जाए और जिन छात्रों पर हॉस्टल फीस देय नहीं है, उनके खाते में दिखाई जा रही अनावश्यक फीस को समाप्त किया जाए।

ऑनलाइन कक्षाओं से प्रभावित हो रही पढ़ाई

ABVP ने छात्रों की शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। देवांश उपाध्याय ने कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं और इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि द्वितीय वर्ष यानी तृतीय सेमेस्टर की नियमित ऑफलाइन कक्षाएं जल्द शुरू की जाएं। साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं में आ रही तकनीकी और अन्य समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई और अकादमिक सत्र प्रभावित न हो।

प्रशासन से लिखित जवाब और समयबद्ध कार्ययोजना की मांग

ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि छात्रों की ओर से उठाए गए प्रत्येक विषय पर प्रशासन को लिखित जवाब देना चाहिए और समाधान की समयसीमा भी स्पष्ट करनी चाहिए। देवांश उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों के भविष्य, सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा संस्थान है। इसलिए छात्रों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ABVP छात्रों की समस्याओं को लगातार प्रशासन के समक्ष उठाती रहेगी और प्रत्येक मुद्दे पर जवाबदेही की मांग करेगी।

ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ज्ञापन में उठाए गए सभी मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई, लिखित जवाब और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने की मांग की है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन मांगों पर किस स्तर और कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।