नोएडा एयरपोर्ट के नोडल अफसर शैलेंद्र भाटिया के मुताबिक, एयरपोर्ट के आसपास करीब 2000 हेक्टेयर जमीन का मास्टर प्लान सिविल एविएशन हब के लिए तय किया गया है। इस क्षेत्र में सिविल एविएशन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को विकसित किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित करने की योजना है, जिससे एयरपोर्ट के साथ एविएशन से जुड़े उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सके।

जेवर, रफ़्तार टूडे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास अब सिर्फ विमानों का संचालन ही नहीं, बल्कि सिविल एविएशन इंडस्ट्री का बड़ा इकोसिस्टम विकसित करने की तैयारी है। यमुना सिटी में करीब 2000 हेक्टेयर जमीन को सिविल एविएशन हब के लिए निर्धारित किया गया है। इस जमीन का लैंडयूज भी सिविल एविएशन से जुड़ी गतिविधियों के अनुरूप कर दिया गया है। योजना के तहत देश-विदेश की बड़ी एविएशन कंपनियों को यहां निवेश के लिए आकर्षित करने की तैयारी है।

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में नोएडा एयरपोर्ट परियोजना के लिए करीब 5000 हेक्टेयर जमीन तीन चरणों में अधिग्रहित की जा रही है। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर और दूसरे चरण में 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जबकि तीसरे चरण में करीब 2053 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण चल रहा है और इसके भी जल्द पूरा होने की उम्मीद है।

एक रनवे के साथ शुरू हुआ संचालन

पहले चरण में अधिग्रहित जमीन पर 15 जून से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो चुका है। फिलहाल एयरपोर्ट एक रनवे के साथ संचालित हो रहा है। यात्रियों की संख्या और हवाई यातायात बढ़ने के साथ इसी चरण में एक और रनवे विकसित किए जाने की योजना है। वहीं दूसरे और तीसरे चरण में अधिग्रहित जमीन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार के साथ MRO यानी Maintenance, Repair and Overhaul Hub विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे एयरपोर्ट पर आने वाले विमानों की मरम्मत और रखरखाव की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।

2000 हेक्टेयर में विकसित होगा सिविल एविएशन हब

नोएडा एयरपोर्ट के नोडल अफसर शैलेंद्र भाटिया के मुताबिक, एयरपोर्ट के आसपास करीब 2000 हेक्टेयर जमीन का मास्टर प्लान सिविल एविएशन हब के लिए तय किया गया है। इस क्षेत्र में सिविल एविएशन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को विकसित किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित करने की योजना है, जिससे एयरपोर्ट के साथ एविएशन से जुड़े उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सके।

विमानों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियां भी आएंगी

एविएशन हब में केवल विमानों की मरम्मत और रखरखाव तक सीमित गतिविधियां नहीं होंगी। MRO सुविधाओं के विकसित होने के बाद विमानों के स्पेयर पार्ट्स और कलपुर्जों की मांग भी बढ़ेगी। इसे देखते हुए विमान के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों को भी एयरपोर्ट के आसपास निवेश के लिए आकर्षित करने की योजना है। इससे एक ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार होने की उम्मीद है, जहां विमान संचालन से लेकर उसके रखरखाव, मरम्मत और जरूरी कलपुर्जों की उपलब्धता तक कई गतिविधियां एक ही क्षेत्र में संचालित हो सकेंगी।

2041 के मास्टर प्लान में भी प्रावधान

यमुना प्राधिकरण ने सिविल एविएशन हब के लिए प्रस्तावित करीब 2000 हेक्टेयर क्षेत्र को 2041 के मास्टर प्लान में भी शामिल किया है। इसके जरिए एयरपोर्ट के आसपास एविएशन आधारित औद्योगिक गतिविधियों के लिए दीर्घकालिक जमीन उपयोग की योजना तैयार की गई है। योजना के धरातल पर उतरने के बाद जेवर एयरपोर्ट केवल यात्रियों के आवागमन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि इसके आसपास एविएशन मैन्युफैक्चरिंग, MRO, स्पेयर पार्ट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक उद्योगों का बड़ा नेटवर्क विकसित होने की संभावना है। इससे यमुना सिटी में निवेश, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।