ग्रेटर नोएडा, 28 जुलाई 2025 | रफ्तार टुडे डिजिटल डेस्क
शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च और जनरल मेडिसिन विभाग की ओर से विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर एक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने हेपेटाइटिस के विभिन्न प्रकार, लक्षण, उपचार, और रोकथाम को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस साल की थीम रही — "चलो इसे तोड़ दें (Let's Break the Silence)"।
लिवर की बीमारी पर फोकस, युवाओं में बढ़ता खतरा
सेमिनार में लिवर से जुड़ी बीमारियों विशेषकर हेपेटाइटिस A, B, C, D और E की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है जो विषैले तत्वों (toxins) को शरीर से बाहर निकालने, पाचन में सहायक एंजाइम बनाने, और ऊर्जा को स्टोर करने का कार्य करता है। लेकिन अनियमित जीवनशैली, जंक फूड, और अल्कोहल सेवन जैसे कारणों से लिवर की कार्यक्षमता घटती जा रही है, जिससे हेपेटाइटिस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राममूर्ति शर्मा का वक्तव्य
शारदा अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राममूर्ति शर्मा ने कहा:
“वर्तमान समय में युवा वर्ग में हेपेटाइटिस तेजी से फैल रही है। इसका मुख्य कारण अस्वस्थ खानपान और तनावपूर्ण जीवनशैली है। लिवर शरीर का सबसे संवेदनशील और बहुउद्देश्यीय अंग है, और इसकी अनदेखी जानलेवा हो सकती है। समय रहते लक्षणों को पहचानना और जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है।”

खानपान में बदलाव है जरूरी: डॉ. भूमेश त्यागी
शारदा अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. भूमेश त्यागी ने कहा कि हेपेटाइटिस लिवर को सीधा प्रभावित करती है। उन्होंने बताया:
“जब लिवर कमजोर होता है तो पाचन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इसलिए हेपेटाइटिस मरीजों को हल्का, सुपाच्य और पोषक आहार लेना चाहिए। इलाज के दौरान प्रोटीन की मात्रा नियंत्रित रखनी चाहिए और जंक फूड से परहेज करना जरूरी है। यदि हेपेटाइटिस का छह महीने तक इलाज न हो, तो यह गंभीर और जानलेवा रूप ले सकता है।”
विशेषज्ञों की मौजूदगी और सहभागिता
इस सेमिनार में कई वरिष्ठ डॉक्टर और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रहे:
- डॉ. ए.के. अग्रवाल
- डॉ. दीपक शर्मा
- डॉ. निखिल गुप्ता
साथ ही दिल्ली-एनसीआर और आसपास के अन्य अस्पतालों के डॉक्टर्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने भी भाग लिया और रोकथाम, वैक्सीनेशन और बचाव के उपायों पर चर्चा की।
जागरूकता ही बचाव है
सेमिनार का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि हेपेटाइटिस एक गंभीर लेकिन रोके जाने योग्य बीमारी है। यदि समय रहते इसके लक्षणों को पहचाना जाए — जैसे थकान, पीलिया, उल्टी, भूख न लगना, पेट दर्द, आदि — तो इसका सफल इलाज संभव है। विशेषज्ञों ने टीकाकरण (vaccination) की भी सिफारिश की, विशेषकर हेपेटाइटिस A और B के लिए।
क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे?
हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है — वैश्विक स्तर पर लोगों को हेपेटाइटिस की गंभीरता और समय रहते जांच और इलाज के महत्व को समझाना। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में लगभग 35 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की हेपेटाइटिस से प्रभावित हैं।
समापन और भविष्य की योजनाएं
कार्यक्रम के समापन पर शारदा विश्वविद्यालय के मेडिकल डीन ने कहा कि विश्वविद्यालय आगे भी ऐसे सेमिनार, स्वास्थ्य शिविर और जनजागरूकता अभियान का आयोजन करता रहेगा, ताकि क्षेत्र में स्वास्थ्य-साक्षरता को और बेहतर बनाया जा सके।
✅ ? Raftar Today व्हाट्सएप चैनल से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को टच करें।
Follow the Raftar Today channel on WhatsApp
Twitter (X): Raftar Today (@raftartoday)
? प्रमुख हैशटैग्स:
#WorldHepatitisDay2025
#ShardaUniversity
#LiverHealthAwareness
#HepatitisAwareness
#SayNoToJunkFood
#HealthyLiverHealthyLife
#MedicalSeminar
#ShardaMedicalCollege
#RaftarTodayHealth
#PublicHealthIndia
#HepatitisFreeFuture
#BreakTheSilence
#StopHepatitis
#LiverCare
#DoctorSpeaks
#YouthHealth
#HealthcareIndia
#PreventHepatitis
#VaccinateNow
#RaftarToday
#ShardaHospital
रफ़्तार टुडे डिजिटल ब्यूरो, ग्रेटर नोएडा

Comments (0)
Leave a Comment