ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित प्रतिष्ठित शारदा अस्पताल में सोमवार को 'विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस' (World Emergency Medicine Day) बड़े उत्साह और गंभीरता के साथ मनाया गया। इस आयोजन का उद्देश्य था—आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की महत्ता को उजागर करना, समाज में उसकी बेहतर समझ बनाना और आम जनता को बुनियादी जीवन रक्षक तकनीकों जैसे सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) के प्रति जागरूक बनाना।

अस्पताल परिसर बना जीवन रक्षा का कक्षा, डॉक्टरों और छात्रों ने दी जीवंत प्रस्तुति

कार्यक्रम की शुरुआत शारदा अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा विभाग और स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के समन्वय से हुई। इस दौरान डॉक्टरों, फैकल्टी मेंबर्स और मेडिकल छात्रों ने अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों, मरीजों और स्टाफ को आपातकालीन परिस्थितियों में सही प्रतिक्रिया देना सिखाया। खासतौर पर सीपीआर (हृदय गति रुकने पर दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा तकनीक) का लाइव डेमो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।

डॉ. राममूर्ति शर्मा ने बताया आपातकालीन चिकित्सा का सामाजिक महत्व

शारदा अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राममूर्ति शर्मा ने कहा—

“आपातकालीन चिकित्सा केवल एक विभाग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। यह वह पहला मोर्चा है, जहां ज़िंदगी और मौत के बीच की लड़ाई लड़ी जाती है।”

उन्होंने कहा कि विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस का उद्देश्य न केवल लोगों को चिकित्सा प्रणाली के इस महत्वपूर्ण अंग से परिचित कराना है, बल्कि उन स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण को भी सलाम करना है, जो हर पल तैयार रहते हैं—किसी भी आपातस्थिति से निपटने के लिए।

सीपीआर और प्राथमिक उपचार की दी गई प्रशिक्षण जानकारी

कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को सिखाया कि यदि कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, सांस न ले रहा हो या हृदय गति रुक जाए, तो किस तरह से तत्काल CPR देकर उसकी जान बचाई जा सकती है। साथ ही, ब्लीडिंग रोकना, एंबुलेंस बुलाना, और प्राथमिक प्रतिक्रिया कैसे दें, इस पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

मेडिकल छात्रों ने स्टॉल और पोस्टरों के ज़रिए 'Emergency Response Chain' के हर स्टेप को समझाया और बताया कि आम नागरिक भी जीवन रक्षक बन सकते हैं—अगर वे समय पर सही कदम उठाना जानें।

चुनौतियों और समाधान पर चर्चा, समर्पण और नवाचार को दी मान्यता

डॉ. शर्मा ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा एक अत्यधिक दबाव वाला क्षेत्र है, जहां हर निर्णय सेकंडों में लिया जाता है। उन्होंने कहा—

“हमारी कोशिश है कि इस क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जाए—बेहतर संसाधन, निरंतर प्रशिक्षण, उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण, और समयबद्ध समन्वय के माध्यम से।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस दिवस के माध्यम से हम समाज में आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञों के महत्व को उजागर कर रहे हैं और भविष्य में इसके क्षेत्र में नवाचार, रिसर्च और तकनीक को बढ़ावा देने का संकल्प लेते हैं।

सामुदायिक भागीदारी और समन्वय का संदेश

यह कार्यक्रम इस बात का भी प्रतीक था कि केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि आम नागरिक, प्रशासन, स्वास्थ्य संस्थान और स्वयंसेवी संगठन मिलकर एक आपातकालीन तैयार समाज की रचना कर सकते हैं।
इस अवसर पर लोगों को यह भी बताया गया कि अगर सड़क दुर्घटना, आग, दिल का दौरा, बेहोशी या अन्य आपात स्थितियों में वे मौजूद हों, तो पहला कदम क्या उठाना चाहिए, जिससे समय पर जीवन बचाया जा सके।


विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस क्यों है ज़रूरी?

विश्व भर में हर साल लाखों लोग ऐसे हालातों का शिकार होते हैं, जहां प्राथमिक चिकित्सा और त्वरित प्रतिक्रिया ही उनके जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क बनती है। इस दिवस का उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को प्राथमिकता देना, उसे सामाजिक एजेंडे में शामिल करना और स्वास्थ्य नीतियों में इसे उच्च दर्जा देना है।


निष्कर्ष: जागरूकता से ही बच सकती हैं अनमोल जानें

शारदा अस्पताल ने एक बार फिर साबित किया है कि वह केवल उपचार नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, मानवीय सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस कार्यक्रम ने न केवल लोगों को जीवन रक्षक तकनीकों से अवगत कराया, बल्कि उन्हें “पहला प्रतिक्रिया कर्ता” बनने के लिए भी प्रेरित किया।


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