ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।

1999 में अधिग्रहित की गई जमीन, और तब से अब तक सिर्फ वादे, वादे, और वादे—यह कहानी है वैदपुरा गांव की, जहां के किसानों ने अपने खेत-खलिहान एनपीसीएल (NPCL) को सौंपे थे इस उम्मीद में कि गांव में आएगा चौमुखी विकास, मुफ्त बिजली, और रोजगार की बहार।

लेकिन 26 वर्षों बाद, अब वही ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
एनपीसीएल द्वारा किए गए किसी भी वादे पर आज तक अमल नहीं हुआ, उल्टा गांव के लोगों पर बिजली चोरी जैसे मुकदमे दर्ज कराए गए। इससे आहत ग्रामीण अब आंदोलन की राह पर हैं और एनपीसीएल के निर्माण कार्य को बंद कराने की चेतावनी दे दी है।


क्या थे वे वादे जिन पर अब उठे सवाल?

ग्रामीणों के अनुसार, जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने गांव की जमीन अधिग्रहित कर एनपीसीएल को आवंटित की, तब कंपनी ने ग्रामीणों के सामने कई वादे किए थे, जिनमें शामिल हैं:

  • गांव को मुफ्त बिजली देना
  • किसानों के बच्चों को रोजगार देना
  • चौमुखी विकास के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना
  • स्थानीय युवाओं को ट्रेनिंग व स्किल डेवलपमेंट के अवसर देना

लेकिन इन वादों में से एक भी वादा पूरा नहीं हुआ, जिससे ग्रामीणों में गहरा रोष है।


10 दिन की डेडलाइन, नहीं तो बड़ा आंदोलन

हैप्पी पंडित, जो ग्रामीण प्रतिनिधियों में शामिल हैं, ने कहा:

"एनपीसीएल ने जमीन लेने से पहले गांव को रोशन करने के जो सपने दिखाए थे, वे सिर्फ जुमले साबित हुए। उल्टा हमारे गांव के लोगों को बिजली चोरी के झूठे मामलों में फंसा दिया गया।"

इस नाराजगी को लेकर ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एनपीसीएल प्रबंधक सुबोध त्यागी से मुलाकात की और एक गंभीर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर 10 दिनों में मांगें नहीं मानी गईं, तो वे:

  • एनपीसीएल का निर्माण कार्य बंद करा देंगे
  • धरना-प्रदर्शन और विरोध-आंदोलन करेंगे
  • सार्वजनिक रूप से प्रशासन को जिम्मेदार ठहराएंगे

बैठक में मौजूद थे ये प्रमुख ग्रामीण नेता

इस बैठक और ज्ञापन सौंपने के दौरान गांव के दर्जनों लोग मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  • सतीश नागर
  • सुंदर नागर
  • अरविंद नागर
  • राज सिंह नागर
  • जगबीर नंबरदार
  • हैप्पी पंडित
  • संदीप नागर
  • गौरव नागर
  • प्रकाश चौधरी
  • सुरेश नागर
  • करतार नागर

इन सभी ने एक सुर में चेतावनी दी कि अगर इस बार भी वादाखिलाफी हुई, तो गांव चुप नहीं बैठेगा


एनपीसीएल और प्राधिकरण की भूमिका पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जमीन देने के समय जो लीगल डॉक्यूमेंट्स और शर्तें तय की गई थीं, उनमें गांव के हितों को प्राथमिकता देने की बात थी। लेकिन:

  • एनपीसीएल ने सिर्फ जमीन ली और मुनाफा कमाया, गांव को कुछ नहीं दिया
  • प्राधिकरण भी मूकदर्शक बना रहा
  • शिकायतों और RTI के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

अब सिर्फ आश्वासन नहीं, अमल चाहिए: ग्रामीण

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वर्षों से वे सिर्फ आश्वासन और बैठकों के भरोसे जीते आ रहे हैं। कई बार प्रतिनिधिमंडल बनाकर बात की, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।

अब की बार उन्होंने साफ कर दिया है:

"अब वादे नहीं, विकास के ठोस प्रमाण चाहिए।"


रफ्तार टुडे का निष्कर्ष:

वैदपुरा गांव का मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे उस सिस्टम की पोल खोलता है, जिसमें वादे तो आसानी से किए जाते हैं, लेकिन उन्हें निभाने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। अगर प्राधिकरण और एनपीसीएल समय रहते गंभीरता नहीं दिखाते, तो यह आंदोलन न सिर्फ ग्रेटर नोएडा बल्कि प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।


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