दनकौर, रफ़्तार टुडे।
यमुना प्राधिकरण द्वारा दनकौर क्षेत्र में कराए गए बाईपास सड़क निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की बू अब आमजन की नाराजगी में तब्दील हो गई है। लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन का तरीका इतना अनोखा और प्रतीकात्मक था कि हर किसी की नजरें ठहर गईं। ‘करप्शन फ्री इंडिया संगठन’ ने टूटी हुई सड़क पर बने जलभराव में धान की रोपाई और दर्जनों पेड़ों का रोपण कर भ्रष्टाचार के खिलाफ 'हरित प्रतिरोध' का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सड़क नहीं, तालाब है ये!
प्रदेश महासचिव मास्टर दिनेश नागर और जिलाध्यक्ष प्रेम प्रधान ने मीडिया को बताया कि कुछ माह पूर्व यमुना प्राधिकरण द्वारा जिस बाईपास सड़क का निर्माण कराया गया था, वह भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कुछ ही महीनों में टूटकर एक विशाल जलकुंड का रूप ले चुकी है।
उन्होंने बताया कि यह सड़क दनकौर देहात और बिलासपुर क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को नोएडा, दिल्ली और यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने का मुख्य मार्ग थी। लेकिन आज यह गड्ढों, कीचड़ और पानी से भरी पड़ी है।
विरोध का अनोखा तरीका – धान और पेड़ रोप कर जताई पीड़ा
गुरुवार को जब भारी संख्या में करप्शन फ्री इंडिया संगठन के कार्यकर्ता इस टूट चुकी सड़क पर पहुंचे, तो उन्होंने सड़क पर भरे गंदे पानी में धान की रोपाई की। इसके बाद दर्जनों पौधे भी उसी पानी में रोप दिए। यह दृश्य न सिर्फ देखने वालों को सोचने पर मजबूर कर गया, बल्कि यह भ्रष्टाचार पर करारा व्यंग्य भी था।
"जब सड़क की जगह तालाब बन गया है, तो उसमें खेती ही सही!"
– यह नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने यमुना प्राधिकरण की विफलताओं पर कटाक्ष किया।
चेतावनी के साथ किया गया प्रदर्शन
मास्टर दिनेश नागर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि यमुना प्राधिकरण जल्द से जल्द इस तबाह हो चुकी सड़क का पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं करता, और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो संगठन प्राधिकरण मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन करेगा।
उनका कहना था कि यह कोई सामान्य सड़क नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसके न होने से दुर्घटनाएं, बीमारियां और आर्थिक नुकसान हो रहे हैं।
हादसों से बढ़ती जा रही है चिंताएं
स्थानीय निवासियों के अनुसार, टूटी सड़क पर बारिश के दिनों में लगातार हादसे हो रहे हैं। बाइक फिसलने, कार गड्ढों में फंसने, और पैदल चलने वालों को चोट लगने जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं।
गंदा पानी जमा होने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है।

कौन हैं जिम्मेदार?
इस पूरे मामले में सवाल खड़े हो रहे हैं कि सड़क निर्माण में किस स्तर पर निरीक्षण हुआ, किसे ठेका मिला, और क्यों कुछ ही महीनों में यह सड़क पूरी तरह टूट गई।
प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग अब आमजन भी करने लगे हैं।
प्रदर्शन में शामिल रहे ये प्रमुख चेहरे
इस विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वालों में शामिल रहे:
? प्रेम प्रधान (जिलाध्यक्ष)
? राकेश नागर
? सूबेदार दुलीचंद नागर
? ब्रह्म प्रधान
? कमल नागर
? तनिश नागर, आर्यन, कुलबीर भाटी
? गौरव भाटी, प्रभु, कार्तिक, शिवम कसाना
इन सभी ने सड़क की हालत और प्राधिकरण की चुप्पी को लेकर कड़ा विरोध जताया।
दनकौर के लोग बोले – "बस अब नाव मिल जाए"
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क का कोई अस्तित्व ही नहीं बचा, ना नाली है, ना जलनिकासी का रास्ता, तो अब प्रशासन को हमारे लिए नाव मुहैया करवा देनी चाहिए।
यह बात हंसी में कही गई, लेकिन इसके पीछे छिपा दर्द और प्रशासनिक लापरवाही की गूंज सब समझ गए।
"हर पौधा एक सवाल"
प्रदर्शन में लगाए गए हर पेड़ और धान के पौधे अपने आप में एक प्रशासन से सवाल हैं:
? "क्यों टूटी सड़क?"
? "किसने पास किया बिल?"
? "क्या हुई जांच?"
? "कब होगी कार्रवाई?"
इन पेड़ों ने भ्रष्टाचार की ज़मीन पर ईमानदारी की खेती का एक प्रतीकात्मक संदेश दिया है।
निष्कर्ष – अब प्रतीकात्मक विरोध से क्रांतिकारी कदम तक की तैयारी
दनकौर में करप्शन फ्री इंडिया संगठन का यह अनोखा विरोध केवल धरना नहीं, बल्कि जनचेतना की शुरुआत है। यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सचिवालय तक आंदोलन की चिंगारी उठ सकती है।
रफ़्तार टुडे विशेष रिपोर्ट
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