ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट अब अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के निस्तारण और आम जनता को बेहतर पुलिसिंग का अनुभव देने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में लगातार पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बुधवार को पुलिस मुख्यालय सूरजपुर में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें एडीसीपी सेंट्रल नोएडा स्वतंत्र कुमार सिंह ने सभी एसीपी, थाना प्रभारियों, चौकी प्रभारियों और बीट पुलिस अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।
बैठक के दौरान एडीसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लंबित विवेचनाओं को अब वर्षों तक फाइलों में दबाकर नहीं रखा जाएगा। प्रत्येक विवेचना को गुणवत्ता के साथ 60 से 90 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

गुमशुदगी के मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश
बैठक में सबसे अधिक जोर गुमशुदा व्यक्तियों की बरामदगी पर दिया गया। एडीसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि हर थाना क्षेत्र में गुमशुदगी के मामलों के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाए। इन टीमों की जिम्मेदारी होगी कि वे गुमशुदा व्यक्तियों की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि कई बार परिवार के लिए गुमशुदगी का मामला किसी बड़े संकट से कम नहीं होता। इसलिए ऐसे मामलों को केवल औपचारिकता मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। सोशल मीडिया, पोस्टर, स्थानीय नेटवर्क और तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए गुमशुदा लोगों की तलाश में तेजी लाई जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सके।

बीट पुलिसिंग को मजबूत करने पर विशेष जोर
बैठक के दौरान एडीसीपी ने बीट पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बीट कांस्टेबल और स्थानीय पुलिसकर्मी नियमित रूप से अपने क्षेत्र का भ्रमण करें और लोगों के साथ संवाद बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होना बेहद आवश्यक है। यदि बीट पुलिस लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहेगी तो अपराधियों पर भी नजर रखना आसान होगा और छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सकेगा।

जनसुनवाई और आईजीआरएस शिकायतों के त्वरित निस्तारण के आदेश
बैठक में जनसुनवाई व्यवस्था की समीक्षा भी की गई। एडीसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि सभी थानों में नियमित जनसुनवाई आयोजित की जाए और लोगों की शिकायतों का समयबद्ध तथा गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी समस्या प्रशासन के समक्ष रखी है तो उसका समाधान निर्धारित समय सीमा के भीतर होना चाहिए। शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही या खानापूर्ति बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हर अधिकारी को देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
एडीसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि उन्हें जारी किए गए आदेशों के अनुपालन की नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इससे कार्यों की निगरानी की जा सकेगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी और संवेदनशील बनाने के लिए हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है। जो अधिकारी अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
बैठक के दौरान एडीसीपी ने साफ संदेश दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या आदेशों की अवहेलना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की कार्यशैली में ढिलाई पाई गई तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग की छवि जनता के बीच बेहतर बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक पुलिसकर्मी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य करना होगा।

जनोन्मुखी पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
पुलिस मुख्यालय सूरजपुर में आयोजित यह गोष्ठी पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट अपराध नियंत्रण, विवेचना की गुणवत्ता और आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इन निर्देशों का कितना प्रभाव दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन इतना तय है कि पुलिस विभाग अब लंबित मामलों, गुमशुदगी और जनशिकायतों को लेकर पहले से कहीं अधिक गंभीर नजर आ रहा है।