ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे – ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में हर साल होने वाले जलभराव की समस्या अब उद्योगपतियों के लिए असहनीय होती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) के प्रतिनिधियों ने 11 अगस्त को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) श्रीमती लक्ष्मी वी. एस. से मुलाकात की और गंभीर चिंता जताई।


20 साल पुरानी समस्या, हर साल दोहराता है संकट

IEA ने बताया कि इकोटेक-3 में जलभराव की समस्या पिछले दो दशकों से लगातार बनी हुई है। मानसून आते ही क्षेत्र में पानी भर जाता है और कई बार यह पानी सीधे औद्योगिक परिसरों में घुस जाता है।

  • मशीनरी और कच्चा माल खराब होने से उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
  • कुछ मामलों में उत्पादन पूरी तरह ठप हो जाता है, जिससे डिलीवरी में देरी और व्यापारिक नुकसान होता है।
  • बार-बार यह समस्या आने से निवेशकों का भरोसा भी डगमगाने लगा है।

बैठक में रखी गई प्रमुख मांगें

बैठक में IEA ने ACEO के सामने कई अहम बिंदु रखे—

  1. स्थायी समाधान – जलभराव की समस्या के लिए दीर्घकालिक और पुख्ता व्यवस्था की जाए।
  2. अस्थायी राहत – जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक न्यूनतम 5 पंप लगातार चालू रखे जाएं।
  3. आर्थिक नुकसान का सर्वे और मुआवजा – प्रभावित उद्योगों के नुकसान का सर्वे कराया जाए और मुआवजा दिया जाए।
  4. सड़क सुरक्षा सुधार – औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख चौराहों पर नए स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं और पुराने स्पीड ब्रेकर्स को पेंट किया जाए ताकि रात के समय भी स्पष्ट रूप से नजर आएं।

GNIDA का जवाब – समाधान की दिशा में कदम

ACEO लक्ष्मी वी. एस. ने बैठक में जानकारी दी कि—

  • दादरी-नोएडा रोड के दोनों ओर के ड्रेन तैयार हो चुके हैं।
  • अब इन ड्रेनों को जोड़ने के लिए सड़क के नीचे से एक नया ड्रेन बनाया जाएगा।
  • इसके लिए पुलिस प्रशासन से अनुमति मांगी गई है।
  • अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा, और इससे जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान संभव होगा।

IEA का रुख – अब इंतजार नहीं

IEA के प्रतिनिधियों का कहना है कि—

  • 20 साल से समस्या जस की तस बनी हुई है।
  • हर बार बारिश के मौसम में यही आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखता।
  • अब यह मुद्दा केवल बुनियादी सुविधा का नहीं, बल्कि उद्योगों के अस्तित्व और विकास का है।

बैठक में शामिल प्रमुख लोग

इस मुलाकात में IEA की ओर से—

  • अध्यक्ष – श्री संजीव शर्मा
  • पूर्व अध्यक्ष – श्री पी. के. तिवारी
  • उपाध्यक्ष – श्री एच. एन. शुक्ला
  • उपाध्यक्ष – श्री महेन्द्र शुक्ला
  • सेक्टर सचिव – श्री गगन धीमान
    उपस्थित रहे और अपनी बात मजबूती से रखी।

औद्योगिक क्षेत्र की अहमियत

इकोटेक-3 ग्रेटर नोएडा का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है, जहां—

  • सैकड़ों छोटी-बड़ी इकाइयां काम कर रही हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो पार्ट्स, पैकेजिंग और अन्य सेक्टर के उद्योग यहां सक्रिय हैं।
  • यह क्षेत्र स्थानीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

जलभराव का आर्थिक असर

  • पानी भरने से मशीनें जंग खा जाती हैं और उनका रिपेयर खर्च लाखों में पहुंच जाता है।
  • उत्पादन रुकने से ऑर्डर कैंसिल होते हैं, जिससे कंपनियों को मुआवजा भरना पड़ता है।
  • कर्मचारियों को भी काम से छुट्टी लेनी पड़ती है, जिससे श्रमिक आय प्रभावित होती है।

सड़क और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी चर्चा में

IEA ने यह भी बताया कि जलभराव के अलावा सड़कों की हालत और सड़क सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

  • कई जगह स्पीड ब्रेकर्स की ऊंचाई-चौड़ाई असमान है।
  • रात में स्पीड ब्रेकर्स साफ नहीं दिखते, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं।
  • इन पर पेंटिंग और संकेतक बोर्ड लगाए जाने की आवश्यकता है।

अगले कदम

बैठक के अंत में ACEO ने आश्वासन दिया कि—

  • ड्रेन कनेक्टिविटी के लिए अनुमति मिलते ही कार्य प्राथमिकता से शुरू किया जाएगा।
  • अस्थायी तौर पर पंपों की व्यवस्था पर भी विचार होगा।
  • सड़कों और स्पीड ब्रेकर्स से संबंधित मुद्दों को भी विभागीय स्तर पर देखा जाएगा।

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