ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे। हाल ही में आए तेज तूफान और आंधी ने गौतम बुद्ध नगर जिले के किसानों की आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। खासकर दनकौर, बिलासपुर, जेवर, रबूपुरा और दादरी जैसे क्षेत्रों में आम के पेड़ों की बड़े पैमाने पर तबाही हुई है — कई पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं और तैयार फल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।

इस प्राकृतिक आपदा से त्रस्त किसानों की पीड़ा को आवाज देने के लिए 'करप्शन फ्री इंडिया' संगठन ने मोर्चा संभाला है। संगठन के जिला अध्यक्ष प्रेम प्रधान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपा।


मांग: किसानों को तत्काल मुआवजा और फसल नुकसान का सर्वे

संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय और आलोक नागर ने बताया कि

गौतम बुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आम की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। तूफान ने कई बागों को जड़ से खत्म कर दिया है। इससे किसानों पर भारी आर्थिक संकट आ गया है। आम की खेती में महीनों की मेहनत और लागत एक झटके में खत्म हो गई।”

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि:

  • हर प्रभावित क्षेत्र में तत्काल सर्वे टीम भेजी जाए
  • किसानों के नुकसान का सटीक मूल्यांकन कर उचित मुआवजा दिया जाए
  • फसल बीमा योजना के तहत भी सहायता सुनिश्चित की जाए

डीएम ने दिया कार्रवाई का भरोसा

जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि

“प्रशासन जल्द ही प्रभावित बागों का सर्वे कराएगा और सरकार से मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”

डीएम ने यह भी कहा कि कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करें ताकि नुकसान की सटीक जानकारी शासन तक पहुंच सके।


ज्ञापन सौंपने वालों में ये प्रमुख लोग रहे शामिल

इस प्रतिनिधिमंडल में कई सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता व संगठन के पदाधिकारी मौजूद थे:

  • प्रेम प्रधान – जिला अध्यक्ष, करप्शन फ्री इंडिया
  • चौधरी प्रवीण भारतीय – संस्थापक
  • आलोक नागर – संगठन प्रतिनिधि
  • बलराज हूंण, धीरज खटाना (अधिवक्ता)
  • दुलीचंद नागर, कपिल कसाना (अधिवक्ता)
  • सतबीर भाटी, दीनदयाल और अन्य कार्यकर्ता
करप्शन फ्री इंडिया' संगठन सक्रियडीएम को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

रफ्तार टुडे की विशेष टिप्पणी

गौतम बुद्ध नगर के किसानों के सामने इस समय गहरी आर्थिक आपदा खड़ी है। आम की फसल न केवल यहां के किसानों की मुख्य आय का स्रोत है, बल्कि हजारों मजदूरों की आजीविका भी इसी पर निर्भर है।

प्राकृतिक आपदा से हुए इस नुकसान को सरकारी मुआवजे और संवेदनशील प्रशासनिक कार्रवाई के ज़रिए ही कम किया जा सकता है। ऐसे समय में करप्शन फ्री इंडिया जैसे संगठनों का आगे आना एक सकारात्मक संकेत है, जिससे किसानों की आवाज सरकार तक पहुंच सके।


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