ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में वर्षों से खाली पड़े मॉल, सूने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बंद दुकानों की तस्वीर अब जल्द बदल सकती है। शहर में लगातार बढ़ती व्यावसायिक जमीन की निष्क्रियता और निवेशकों की बदलती जरूरतों को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण एक बड़ा और अहम फैसला लेने की तैयारी में है। अब कमर्शियल श्रेणी की जमीनों पर केवल मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स ही नहीं, बल्कि उद्योग, अस्पताल, स्कूल और अन्य संस्थागत परियोजनाएं भी विकसित की जा सकेंगी।
प्राधिकरण इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो ग्रेटर नोएडा के विकास मॉडल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे जहां एक ओर वर्षों से खाली पड़ी जमीनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा, वहीं दूसरी ओर शहर में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी नई रफ्तार मिलेगी।
सूने पड़े मॉल बने चिंता की वजह, अब बदलेगा इस्तेमाल
दरअसल, ग्रेटर नोएडा में पिछले कई वर्षों में बड़ी संख्या में कमर्शियल भूखंड आवंटित किए गए थे। इन पर मॉल, मार्केट और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स विकसित किए गए, लेकिन बदलते बाजार और ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते प्रभाव के चलते इनमें से कई परियोजनाएं उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सकीं। स्थिति यह है कि शहर के कई बड़े मॉल पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं, लेकिन वहां गिनी-चुनी दुकानें ही संचालित हो रही हैं। कई कॉम्प्लेक्स में तो मेंटेनेंस का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में प्राधिकरण अब इस मॉडल को बदलने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
200 एकड़ से ज्यादा कमर्शियल जमीन अब भी खाली
प्राधिकरण के पास अभी भी लगभग 200 एकड़ कमर्शियल श्रेणी की जमीन खाली पड़ी हुई है। वहीं दूसरी ओर उद्योग, अस्पताल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों के लिए लगातार मांग बढ़ती जा रही है। प्राधिकरण अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में कमर्शियल जमीन को संस्थागत और औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराना ज्यादा व्यावहारिक और फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे निवेशकों को भी राहत मिलेगी और शहर का समग्र विकास भी तेज होगा।
सीईओ एनजी रवि कुमार के स्तर पर मंथन
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने इस दिशा में अधिकारियों के साथ कई स्तर पर चर्चा की है। सूत्रों के मुताबिक प्राधिकरण इस बात पर विचार कर रहा है कि कमर्शियल श्रेणी की भूमि को उद्योग, अस्पताल, स्कूल और कॉलेजों के लिए आवंटित करने के नियमों में बदलाव किया जाए। इसके लिए भूमि उपयोग (Land Use) और आवंटन दरों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। यदि शासन स्तर से हरी झंडी मिलती है, तो आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा में कई नई औद्योगिक और संस्थागत परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं।
उद्योगों के लिए जमीन की मांग बढ़ी
ग्रेटर नोएडा में तेजी से औद्योगिक निवेश बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, डेटा सेंटर, वेयरहाउसिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियां लगातार यहां निवेश की इच्छुक हैं। लेकिन उद्योगों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराना प्राधिकरण के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
ऐसे में कमर्शियल श्रेणी की खाली जमीन को उद्योगों के लिए उपयोग करने का विकल्प प्राधिकरण के लिए राहत साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य और शिक्षा को भी मिलेगा फायदा
यदि प्रस्ताव लागू होता है तो शहर में अस्पताल और स्कूलों की संख्या भी बढ़ सकती है। तेजी से बढ़ती आबादी के कारण ग्रेटर नोएडा में स्वास्थ्य और शिक्षा संस्थानों की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल जमीन का बेहतर उपयोग कर आधुनिक अस्पताल, मेडिकल सेंटर, विश्वविद्यालय और स्किल डेवलपमेंट संस्थान स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे शहर की बुनियादी सुविधाएं और मजबूत होंगी।
कमर्शियल और इंडस्ट्रियल दरों में बड़ा अंतर
जानकारों के अनुसार प्राधिकरण में कमर्शियल भूखंडों की दरें सबसे अधिक हैं, जबकि औद्योगिक जमीन की कीमतें तुलनात्मक रूप से काफी कम हैं। यही वजह है कि इस बदलाव के लिए दरों और नीतियों में संशोधन जरूरी माना जा रहा है। प्राधिकरण अब ऐसा संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे निवेशकों को आकर्षित किया जा सके और खाली पड़ी जमीनों का आर्थिक उपयोग भी बढ़े।
ग्रेटर नोएडा के विकास मॉडल में बड़ा बदलाव संभव
शहर के जानकारों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो ग्रेटर नोएडा का विकास मॉडल पूरी तरह बदल सकता है। अब तक जहां शहर को केवल रियल एस्टेट और शॉपिंग हब के रूप में देखा जाता था, वहीं आने वाले समय में यह शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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