दादरी, ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे । विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन गौतम बुद्ध नगर की सबसे चर्चित विधानसभा सीट दादरी (62) में भारतीय जनता पार्टी के टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। संगठन के वरिष्ठ नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रभावशाली चेहरों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी बीच पूर्व बार अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा के सक्रिय सदस्य सुशील भाटी एडवोकेट ने भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दादरी विधानसभा इस बार केवल चुनावी मुकाबले का केंद्र नहीं होगी, बल्कि यहां टिकट की प्रतिस्पर्धा भी बेहद दिलचस्प रहने वाली है। ऐसे समय में सुशील भाटी का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल होने से भाजपा के अंदर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।

कानूनी अनुभव के साथ सामाजिक स्वीकार्यता भी बड़ी ताकत

सुशील भाटी पिछले करीब 26 वर्षों से जनपद न्यायालय सूरजपुर में अधिवक्ता के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने लंबे कानूनी करियर में हजारों मामलों की पैरवी करने के साथ-साथ अधिवक्ताओं के हितों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका संगठनात्मक सफर भी उल्लेखनीय रहा है। वर्ष 1999-2000 में बार एसोसिएशन के सह-सचिव, 2002-03 में महामंत्री और 2022-23 में जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन, गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने नेतृत्व किया। बार अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल अधिवक्ताओं के अधिकारों, न्यायिक व्यवस्था में सुधार और संगठन को मजबूत बनाने के लिए याद किया जाता है।

राजनीतिक सफर में लंबा अनुभव

सुशील भाटी का राजनीतिक जीवन दो दशक से भी अधिक पुराना है। उन्होंने वर्ष 1999 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। शुरुआती दौर में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी में संगठनात्मक दायित्व निभाए और बाद में भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्तमान में वे भाजपा के सक्रिय सदस्य के रूप में संगठनात्मक कार्यक्रमों में लगातार भागीदारी कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि उनकी राजनीतिक समझ, संगठन से जुड़ाव और जनसंपर्क क्षमता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से वैचारिक जुड़ाव

सुशील भाटी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने संघ शिक्षा वर्ग विशेष-2024 का प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा वर्तमान में शाखा पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, बीटा-1, ग्रेटर नोएडा में गठनायक का दायित्व निभा रहे हैं। उनका कहना है कि बचपन से ही संघ की विचारधारा और राष्ट्रसेवा के संस्कार उनके जीवन का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, दादरी से प्राप्त की, जहां से उन्हें सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों की प्रेरणा मिली।

1857 के अमर शहीद राव उमराव सिंह की विरासत भी बना रही अलग पहचान

सुशील भाटी की दावेदारी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष उनकी ऐतिहासिक पारिवारिक पृष्ठभूमि है। वह स्वयं को 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद एवं दादरी रियासत के राजा राव उमराव सिंह का वंशज बताते हैं। राव उमराव सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल हैं जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। दादरी क्षेत्र में आज भी उनकी शहादत सम्मान और गर्व के साथ याद की जाती है। उनके समर्थकों का कहना है कि यही ऐतिहासिक विरासत सुशील भाटी को समाज और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देती है।

2004 का आंदोलन बना संघर्ष की पहचान

गौतम बुद्ध नगर जनपद को समाप्त किए जाने के खिलाफ वर्ष 2004 में चले ऐतिहासिक आंदोलन में भी सुशील भाटी अग्रिम पंक्ति में रहे। आंदोलन के दौरान आत्मदाह के प्रयास में वे गंभीर रूप से झुलस गए थे और कई सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहे। उनके समर्थक इस घटना को उनके संघर्षशील व्यक्तित्व का बड़ा उदाहरण बताते हैं और कहते हैं कि उन्होंने हमेशा जनहित के मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाई है।

एडवोकेट सुशील भाटी

शिक्षा और समाजसेवा में भी सक्रिय भूमिका

वकालत और राजनीति के साथ-साथ सुशील भाटी शिक्षा के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने मिहिर भोज इंटर कॉलेज, मिहिर भोज बालिका विद्यालय, नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज, गांधी इंटर कॉलेज दुजाना, स्वामी अन्तानन्द इंटर कॉलेज भराना सहित कई शिक्षण संस्थानों की प्रबंध समितियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने जरूरतमंद परिवारों तक भोजन, मास्क और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य भी किया। सामाजिक कार्यक्रमों, शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार बनी रही है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि भी बनी मजबूत आधार

सुशील भाटी का परिवार लंबे समय से राष्ट्रवादी विचारधारा और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। उनके पिता सुरेशचंद भाटी भारतीय सेना में सेवाएं देने के बाद भारतीय रेलवे में कार्यरत रहे। उनकी पत्नी रितु सिंह भी भाजपा की सक्रिय सदस्य हैं और परिवार के अन्य सदस्य भी सामाजिक व संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

दादरी सीट पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

दादरी विधानसभा वर्तमान समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास, भूमि अधिग्रहण, किसानों के मुद्दे, शहरी विस्तार, रोजगार, आधारभूत संरचना और कानून व्यवस्था जैसे विषय यहां के चुनावी समीकरण तय करेंगे।
ऐसे में भाजपा ऐसे उम्मीदवार की तलाश करेगी जो संगठन, जनाधार, सामाजिक संतुलन और चुनावी क्षमता के सभी मानकों पर खरा उतर सके। सुशील भाटी की सक्रिय दावेदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार दादरी विधानसभा में भाजपा टिकट की दौड़ बेहद दिलचस्प होने वाली है। आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी तथा अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक रिपोर्ट, जनभावना, सामाजिक समीकरण और चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर करेगा।