ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ZETA में स्थित DFCC/L&T का अंडरपास, आज लोगों के लिए सुविधा नहीं बल्कि एक भयंकर अभिशाप बन चुका है। भारी बारिश के बाद अंडरपास में जलभराव की समस्या ने पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट, शिवालिक होम्स, E होम्स, तिलपता चौक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और गुलिस्तानपुर गांव जैसे हजारों परिवारों को सड़क से काट दिया है। स्कूल जाने वाले बच्चे हों या अस्पताल पहुंचने वाले मरीज़, सब इस भारी जाम और पानी से लबालब भरे अंडरपास के चलते फंसे हुए हैं।


500 मीटर की दूरी तय करने में लग रहे घंटों – अंडरपास बना कैदखाना

स्थानीय निवासी बताते हैं कि अंडरपास की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि 500 मीटर की दूरी तय करने में घंटों लग रहे हैं। ऑफिस जाने वाले लोग, एंबुलेंस, स्कूल बसें – सब जाम में फंसे रहने को मजबूर हैं। किसी आपात स्थिति में अगर अस्पताल जाना पड़े, तो इंसान सड़क पर ही दम तोड़ सकता है।


2019 से अधूरा प्रोजेक्ट – जवाबदेही का नामो-निशान नहीं

DFCC (Dedicated Freight Corridor Corporation of India) और L&T द्वारा निर्मित यह अंडरपास साल 2019 से अधूरा पड़ा हुआ है। यह ना सिर्फ जल निकासी में फेल हो रहा है, बल्कि हर बारिश में यहां कृत्रिम झील जैसी स्थिति बन जाती है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या इस प्रोजेक्ट की कोई समयसीमा या जवाबदेही है भी या नहीं?

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम सुबह से मौके पर तैनात रही।

पैरामाउंट सोसायटी के पास स्थित डीएफसीसी अंडरपास से बारिश के पानी की निकासी करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम सुबह से मौके पर तैनात रही। प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर वरिष्ठ प्रबंधक नरोत्तम सिंह अपनी टीम के साथ सुबह 7 बजे से अंडरपास से जल निकासी में जुटे गए। मोटर पंप लगाकर अंडरपास से पानी की निकासी की गई। ट्रैफिक कंट्रोल करने तथा लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ समय तक ट्रैफिक डायवर्जन भी करना पड़ा। इस दौरान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने दो बार अंडरपास का जायजा लिया और जल निकासी की व्यवस्था को देखा।

प्राधिकरण की तरफ से डीएफसीसी और कान्ट्रैक्टर कंपनी को कड़ी चेतावनी दी गई है कि मौके पर चल रहे कार्यों को शीघ्र निपटाएं, ताकि आम नागरिकों को परेशानी से जल्द निजात मिल सके।

DFCCIL और L&T अंडरपास में भरे पानी से टूटा ग्रेटर नोएडा और वेस्ट

"नेता वोट लेकर गायब हो जाते हैं, जनता कीड़े-मकोड़ों जैसी जिंदगी जी रही है"

पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट निवासी विनोद पहलावत ने रोष प्रकट करते हुए कहा,

“नेता तो वोट लेकर गायब हो जाते हैं। आम आदमी जो टैक्स देता है, वही रोज इस जलभराव और जाम का शिकार होता है। कोई सुनवाई नहीं है, कोई प्लानिंग नहीं है।”


Shahberi की नई सड़क भी जलभराव की शिकार

हाल ही में 5 करोड़ की लागत से बनी शाहबेरी की सड़क, कुछ ही दिनों में पानी में डूब गई। यह प्रशासनिक लापरवाही और बिना ड्रेनेज प्लानिंग के विकास का साफ सबूत है। तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें सड़कें झील जैसी दिख रही हैं।


@dfccil_india – कहां है प्लानिंग?

130 मीटर रोड के पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसाइटी के पास ड्रेनेज सिस्टम बना रहा है, लेकिन सवाल उठता है कि DFCC या UPSIDA की साइट सी के अंडरपास, जो शिवालिक होम्स और आसपास की सोसाइटियों के पास है, उसके लिए कोई ड्रेनेज योजना है या नहीं?


सोशल मीडिया से उठी मांग: “अंडरपास बंद करो, फ्लाईओवर बनाओ”

ट्विटर पर हिमांशु शेखर झा जैसे कई एक्टिविस्ट्स ने वीडियो पोस्ट करते हुए अंडरपास की दुर्दशा को उजागर किया है। उनका साफ कहना है कि यह जलभराव साल दर साल हो रहा है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। जनता की मांग है कि इस अंडरपास को बंद कर, यहां पर फ्लाईओवर बनाया जाए, ताकि लोगों की दैनिक यातायात की समस्याएं दूर हो सकें।

DFCCIL और L&T अंडरपास में भरे पानी से टूटा ग्रेटर नोएडा और वेस्ट

50000 परिवारों की जिंदगी बेहाल, प्रशासन मौन

पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट निवासी गौरव सिंह ने कहा कि साइट सी ग्रुप हाउसिंग एक्सटेंशन-2, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, और आसपास के करीब 5000 परिवार इस मुसीबत में फंसे हैं। पानी, कीचड़, ट्रैफिक, और बीमारी – लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। मगर ना कोई अधिकारी मौके पर आता है, ना कोई सुनवाई होती है।


जनता की मांगें:

  1. DFCC अंडरपास को बंद किया जाए और फ्लाईओवर बनाया जाए
  2. तत्काल ड्रेनेज सिस्टम की स्थापना की जाए
  3. बारिश से पहले हर साल अंडरपास की सफाई और निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए
  4. जवाबदेही तय हो कि कौन विभाग जिम्मेदार है – DFCC, UPSIDA या GNIDA?

अंडरपास की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि 500 मीटर की दूरी तय करने में घंटों लग रहे हैं। ऑफिस जाने वाले लोग, एंबुलेंस, स्कूल बसें – सब जाम में फंसे रहने को मजबूर हैं। किसी आपात स्थिति में अगर अस्पताल जाना पड़े, तो इंसान सड़क पर ही दम तोड़ सकता है।

DFCC (Dedicated Freight Corridor Corporation of India) और L&T द्वारा निर्मित यह अंडरपास साल 2019 से अधूरा पड़ा हुआ है। यह ना सिर्फ जल निकासी में फेल हो रहा है, बल्कि हर बारिश में यहां कृत्रिम झील जैसी स्थिति बन जाती है


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