ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। केसीसी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल एंड हायर एजुकेशन, ग्रेटर नोएडा में 5वें दीक्षांत समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। समारोह में विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान की गईं। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नवनीत सिकेरा, आईपीएस, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG), उत्तर प्रदेश रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा, अनुशासन, मेहनत, सम्मान और बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप खुद को तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
AI के दौर में बदल रहा रोजगार का स्वरूप
डॉ. नवनीत सिकेरा ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि भारत में काम और अवसरों की बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कई पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि विद्यार्थियों को अपने कौशल को लगातार अपडेट करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि तकनीक से डरने के बजाय उसे समझने और अपने काम में उपयोग करने की जरूरत है। आने वाले समय में वही युवा आगे बढ़ेंगे जो बदलते परिवेश के अनुसार खुद को ढाल सकेंगे और अपने ज्ञान एवं कौशल को लगातार विकसित करते रहेंगे।
मां को बताया अपना सबसे बड़ा गुरु
अपने संबोधन के दौरान डॉ. नवनीत सिकेरा ने अपनी मां को अपना सबसे बड़ा गुरु बताते हुए जीवन से जुड़े कई प्रेरक प्रसंग विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उन्हें जीवन की कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का नजरिया सिखाया। उन्होंने गंगा नदी का उदाहरण देते हुए बताया कि गंगा अपने रास्ते में आने वाली चट्टानों और पत्थरों को रोककर नहीं बैठती, बल्कि उन्हें पार करते हुए लगातार आगे बढ़ती रहती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि जीवन में भी कई तरह की बाधाएं और आलोचनाएं सामने आएंगी, लेकिन उन्हें हर बाधा पर रुकने के बजाय अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में आने वाली नकारात्मक परिस्थितियों और अनावश्यक बातों को नजरअंदाज कर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सफलता के लिए निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है।
इज्जत देंगे तो इज्जत मिलेगी
डॉ. नवनीत सिकेरा ने अपने बचपन का एक और अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को सम्मान का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि बचपन में वह लोगों को नमस्ते या राम-राम नहीं करते थे, लेकिन खुद चाहते थे कि लोग उन्हें सम्मान दें। उन्होंने बताया कि एक दिन किसी बुजुर्ग ने उन्हें ‘छोटे चौधरी’ कहकर राम-राम किया तो उन्हें बहुत अच्छा लगा। लेकिन अगले दिन किसी व्यक्ति ने उन्हें उसी तरह सम्मान नहीं दिया तो उन्हें गुस्सा आया। जब उन्होंने यह बात अपनी मां को बताई तो मां ने उन्हें समझाया कि अगर आप दूसरों को सम्मान देंगे, तभी दूसरे भी आपको सम्मान देंगे।
इसके बाद उन्होंने लोगों को नमस्ते और राम-राम करना शुरू किया। कुछ ही दिनों में लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आया और लोग उन्हें सम्मान के साथ संबोधित करने लगे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन का यह सरल सिद्धांत हमेशा याद रखें—सम्मान पाने के लिए पहले दूसरों को सम्मान देना सीखना होगा।
शिक्षा का उद्देश्य जिम्मेदार नागरिक बनाना
डॉ. सिकेरा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा व्यक्ति के चरित्र, सोच और व्यवहार को बेहतर बनाने का माध्यम है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से नेतृत्व क्षमता विकसित करने, नई चीजें सीखने और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
उत्कृष्ट विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
दीक्षांत समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों ने दीक्षांत की शपथ ग्रहण करते हुए अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा का उपयोग समाज, राष्ट्र और मानवता के हित में करने का संकल्प लिया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री विवेक नारायण शर्मा, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, भारत के सर्वोच्च न्यायालय उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलते वैश्विक परिवेश में नेतृत्व, नवाचार, उद्यमिता और विधिक जागरूकता के महत्व के बारे में जानकारी दी।
चेयरमैन ने किया अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के चेयरमैन श्री दीपक गुप्ता ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करने की प्रक्रिया संपन्न हुई।
निदेशक ने कहा- दीक्षांत जीवन की नई शुरुआत
संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) भावना अग्रवाल ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। अब विद्यार्थियों के सामने शिक्षा को वास्तविक जीवन में लागू करने और अपने ज्ञान से समाज में सकारात्मक योगदान देने की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने, तकनीकी बदलावों के साथ खुद को अपडेट रखने और अपने पेशेवर जीवन में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की अपील की।
समारोह के अंत में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में उत्साह देखने को मिला। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह दिन उनकी वर्षों की मेहनत और शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। KCC इंस्टीट्यूट का 5वां दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, नैतिकता और बदलती तकनीक के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए संपन्न हुआ।

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