ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।।
ग्रेटर नोएडा के किसानों के लिए अब वह दिन दूर नहीं जब वे कह सकेंगे – "हमारी ज़मीन गई थी, अब उसका इंसाफ मिल रहा है।" वर्षों से लंबित 6 प्रतिशत आबादी भूखंड योजना के तहत अब किसानों को उनका अधिकार मिलने जा रहा है। यह सिर्फ एक भूखंड योजना नहीं, बल्कि गांवों से शहर की ओर हुए बदलाव में किसानों को उनकी पहचान, उनका सम्मान लौटाने की प्रक्रिया है।


लंबे इंतज़ार के बाद आई किसानों के लिए सबसे बड़ी सौगात

ग्रेटर नोएडा शहर के निर्माण और विस्तार के लिए प्राधिकरण ने कई गांवों की भूमि अधिग्रहित की थी। इसके बदले किसानों को मुआवज़ा तो मिला, लेकिन जो वादा किया गया था कि उन्हें 6% के अनुपात में आबादी के भूखंड दिए जाएंगे – वह सपना अधूरा रह गया। लेकिन अब इस सपने को हक़ीक़त में बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है।


सिरसा और डाढ़ा गांव के 158 किसानों की सूची तैयार, जल्द खुलेगी लॉटरी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सिरसा गांव के 68 और डाढ़ा गांव के 90 किसानों के लिए लॉटरी सिस्टम के माध्यम से आबादी भूखंड देने की घोषणा की है। लॉटरी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रक्रिया डिजिटल और निष्पक्ष रखी जाएगी। जिन किसानों की सूची तैयार हो चुकी है, उन्हें अगले एक महीने के भीतर भूखंड मिल जाएंगे।


CEO रवि कुमार एन.जी. का ऐलान – अब नहीं होगा कोई इंतज़ार

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एन.जी. ने खुद सामने आकर जानकारी दी कि:

"अब तक जो वादा अधूरा था, उसे पूरा करने का समय आ गया है। सिरसा और डाढ़ा के किसानों को भूखंड मिलेंगे, और बाकी गांवों की प्रक्रिया भी चरणबद्ध रूप से पूरी की जाएगी।"

उन्होंने बताया कि सभी जरूरी बुनियादी सुविधाओं – जैसे सड़क, बिजली, पानी, सीवर, नाली – को भी साथ में विकसित किया जाएगा।


825 किसानों की सूची, 8 गांवों में होगा विस्तार

प्राधिकरण ने अब सिर्फ दो गांव नहीं, बल्कि पूरे 8 गांवों के 825 किसानों के लिए योजना बना ली है। जिन गांवों में आने वाले समय में योजना लागू होगी, उनमें शामिल हैं:

  • पतवाड़ी
  • थापखेड़ा
  • डाढ़ा
  • सिरसा
  • अच्छेजा
  • जलालपुर
  • हैबतपुर
  • खैरपुर गुर्जर

इन गांवों के लिए जमीन की पहचान की जा रही है, और जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, वहां भी लॉटरी का आयोजन किया जाएगा।


कुछ किसानों को मिलेगा 4% अतिरिक्त भूखंड, कोर्ट का आदेश बना सहारा

कुछ किसानों ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, जहां से आदेश मिला कि उन्हें 4 प्रतिशत अतिरिक्त भूखंड भी दिया जाए। ऐसे किसानों की मांग पर प्राधिकरण ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि कोर्ट के आदेश के अनुसार भूखंड का आवंटन किया जाएगा।


“यह सिर्फ भूखंड नहीं, न्याय की जीत है” – गांवों में जश्न का माहौल

किसानों में इस खबर के बाद जबरदस्त खुशी का माहौल है। लोगों ने इसे “विकास के साथ न्याय” की संज्ञा दी है। कई बुजुर्ग किसान तो इसे "दशकों बाद अपने अधिकार की वापसी" मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें भी शहर में सम्मान के साथ बसने का मौका मिलेगा।


प्राधिकरण की छवि में बड़ा बदलाव, जमीन से जुड़ा भरोसा लौटता नजर आया

लंबे समय से प्राधिकरण पर किसानों के साथ वादाखिलाफी के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन इस योजना के लागू होने से न केवल किसानों को न्याय मिलेगा, बल्कि प्राधिकरण की छवि भी सुधरेगी। इससे "शहरी विकास बनाम ग्रामीण अधिकार" की बहस को भी नया आयाम मिलेगा।


आने वाले समय में क्या होगा? जानें प्लानिंग टाइमलाइन

चरणविवरणसंभावित समय
1️⃣सूची में नामित किसानों को सूचनाअगले 7 दिनों में
2️⃣लॉटरी की प्रक्रिया15-30 दिन में
3️⃣भूखंड आवंटन के पत्रलॉटरी के तुरंत बाद
4️⃣मूलभूत सुविधाओं का विकासभूखंड मिलने के बाद 3 माह के भीतर

? स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

कई स्थानीय नेताओं ने इस घोषणा का स्वागत किया है। किसान नेता राजेश नागर ने कहा:

“अब लग रहा है कि हमारी आवाज़ सुनी गई है। यह सिर्फ प्लॉट नहीं, हमारी मेहनत की मान्यता है।”


? ग्रामीण विकास से शहरी विस्तार तक – एक संतुलन की शुरुआत

यह योजना एक बड़ा संकेत है कि अब ग्रेटर नोएडा में विकास केवल ऊंची इमारतों का नहीं, बल्कि किसानों के जीवन स्तर को उठाने का भी है। यह ग्रामीण और शहरी संतुलन की ओर बढ़ते कदम का प्रमाण है।


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