वाल्मीकि रामायण के बालकांड से हुआ भगवान श्रीराम के गुणों का वाचन, संस्कृत प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विद्यार्थियों में जगाई गई जिज्ञासा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर महर्षि पाणिनी वेद वेदांग गुरुकुल, ग्रेटर नोएडा में संस्कृत भारती, ग्रेटर नोएडा की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और वाल्मीकि रामायण की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। वैदिक मंत्रोच्चार, श्रीराम भजनों और संस्कृत से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से गुरुकुल के विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के महत्व से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वाल्मीकि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भगवान श्रीराम का पूजन करके किया गया। इसके बाद आचार्य अलंकार शर्मा ने महर्षि वाल्मीकि के ध्यान श्लोकों के माध्यम से गुरुकुल के बटुकों को उनके व्यक्तित्व और योगदान से परिचित कराया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वाल्मीकि रामायण के बालकांड से भगवान श्रीराम के गुणों का वाचन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री स्वामीनाथन जी ने विद्यार्थियों से राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कराया। इसके बाद मां शांकरी ने अपनी मधुर वाणी में भगवान श्रीराम का भजन प्रस्तुत किया। भक्ति और संस्कृत के संगम से वातावरण भक्तिमय हो गया।

संस्कृत भारती, ग्रेटर नोएडा की कार्यकर्त्री श्रीमती अर्चना आर्या ने वाल्मीकि रामायण पर आधारित संस्कृत प्रश्नोत्तरी आयोजित की। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा और रामायण के प्रसंगों के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने का प्रयास किया गया। उन्होंने बटुकों को संस्कृत भाषा के महत्व और संस्कृत भारती के कार्यों के बारे में भी जानकारी दी।

इसके बाद संस्कृत भारती, ग्रेटर नोएडा की कार्यकर्त्री श्रीमती कुसुम कौशिक ने भगवान श्रीराम पर आधारित सुंदर भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में भक्ति, ज्ञान और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम का समापन भगवान श्रीराम की आरती के साथ हुआ। गुरुकुल के संस्थापक आचार्य रविकांत जी ने आयोजन में उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने गुरुकुल में इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त किया।

इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधानाचार्य आचार्य प्रेमकांत जी सहित अन्य उपस्थितजनों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। आयोजन का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के विचारों और वाल्मीकि रामायण की शिक्षाओं को विद्यार्थियों तक पहुंचाना तथा संस्कृत भाषा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति रुचि विकसित करना रहा।