बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के आदेश पर लगाई अंतरिम रोक, अपील लंबित रहने तक वकालत जारी रखने की मिली अनुमति

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन, गौतमबुद्धनगर के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से बड़ी राहत मिली है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से उनके लाइसेंस निलंबन के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद मनोज भाटी को वकालत जारी रखने की अनुमति मिल गई है। साथ ही, वह दोबारा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे।

इस घटनाक्रम को मनोज भाटी के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अभी आना बाकी है और अपील पर आगे की सुनवाई के दौरान ही विवाद का अंतिम निस्तारण होगा।

अनुशासन समिति ने कार्यवाही पर उठाए सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि फिलहाल यह मामला अधिवक्ता के पेशेगत या अन्य कदाचार का बनता हुआ दिखाई नहीं देता। समिति की इस टिप्पणी के साथ ही उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से की गई कार्यवाही पर भी प्रथम दृष्टया सवाल उठे हैं। समिति के आदेश का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि लाइसेंस निलंबन के कारण अधिवक्ता की वकालत जारी रखने पर असर पड़ सकता था। अंतरिम रोक के बाद मनोज भाटी को अपील लंबित रहने के दौरान अपना पेशेवर कार्य जारी रखने का अवसर मिल गया है।

अपील लंबित रहने तक जारी रख सकेंगे वकालत

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अपील के लंबित रहने के दौरान मनोज भाटी वकालत की प्रैक्टिस जारी रख सकते हैं। इससे उन्हें तत्काल राहत मिली है। यह अंतरिम आदेश अंतिम निर्णय का विकल्प नहीं है, बल्कि मामले के अंतिम निस्तारण तक लागू राहत है।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर वापसी

लाइसेंस निलंबन के आदेश पर अंतरिम रोक लगने के बाद मनोज भाटी बोड़ाकी ने एक बार फिर जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन, गौतमबुद्धनगर के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है। उनकी वापसी से बार एसोसिएशन के स्तर पर भी यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में अब आगे की सुनवाई और अंतिम आदेश पर निगाहें रहेंगी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति की अंतरिम राहत ने फिलहाल मनोज भाटी को वकालत जारी रखने का रास्ता दिया है, जबकि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की कार्यवाही से जुड़े सवालों का अंतिम समाधान आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

रफ़्तार टूडे की रिपोर्ट: मनोज भाटी बोड़ाकी को मिली यह राहत अंतरिम है।