ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
"जहां हो एकता, वहीं हो सफलता" – इस भाव को साकार करते हुए ग्रेटर नोएडा के अल्फा-2 स्थित कम्युनिटी सेंटर में ‘बिहार स्नेह मिलन समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल बिहार और पूर्वांचल से जुड़े लोगों के लिए सौहार्द और अपनापन का पर्व बना, बल्कि "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" अभियान के अंतर्गत सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सहभागिता का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।


भव्य मंच, गरिमामयी उपस्थिति और उत्साह से लबरेज दर्शक

समारोह में भारतीय जनता पार्टी बिहार प्रदेश के उपाध्यक्ष आदरणीय श्री शैलेन्द्र मिश्रा जी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। उनके स्वागत में आयोजन स्थल पर पारंपरिक मिथिला चित्रकला से सजी रंगोली और शंखध्वनि के साथ माहौल पूरी तरह बिहारमय हो गया।

उन्होंने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा, "आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, और इस ऊर्जा को यदि सही दिशा में लगाया जाए, तो भारत को दोबारा 'विश्व गुरु' बनने से कोई नहीं रोक सकता।" उन्होंने आने वाले बिहार चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की विकासपरक नीतियों और "सबका साथ, सबका विकास" के मंत्र को दोहराया।


पूर्वांचल का सामाजिक संगम: राजनैतिक नहीं, सांस्कृतिक आत्मीयता का समारोह

इस कार्यक्रम में सिर्फ राजनीति नहीं, पूर्वांचल और बिहार की सांस्कृतिक आत्मीयता की झलक भी देखने को मिली। मंच से जब "जय मिथिला", "जय भोजपुर", "जय मगध", "जय भारत" के नारे लगे, तो पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा।

कार्यक्रम के संयोजक राघवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि, “हमारा प्रयास था कि ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले सभी बिहार और पूर्वांचलवासी एक साथ मिलें, जुड़ें और अपनी जड़ों को याद करते हुए एकजुटता का संकल्प लें।”


राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों की मज़बूत मौजूदगी

समारोह में भाजपा ग्रेटर नोएडा मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी, बिसरख मंडल अध्यक्ष मुकेश चौहान, पूर्व मंडल अध्यक्ष सतीश गुलिया, भाजपा महिला मोर्चा की गायत्री तिवारी व उनकी टीम के सदस्य, आरडब्ल्यूए अल्फा-2 के अधिकारीगण, पूर्वांचल छठ पूजा समिति और मिथिलांचल समिति के गणमान्य पदाधिकारी जैसे राकेश पांडे, राम कुमार मिश्रा, गजेंद्र मिश्रा, कुलदीप तिवारी, भास्कर तिवारी, वेद प्रकाश द्विवेदी, विश्वजीत पाठक आदि भारी संख्या में उपस्थित रहे।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और बिहार की लोकसंस्कृति की जीवंत झलक

समारोह की सबसे आकर्षक बात रही बिहार की परंपराओं और संस्कृति को मंच पर जीवंत करना। बच्चों और युवाओं ने मैथिली, भोजपुरी और मगधी लोकगीतों पर नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। मंच से "पिया संग होली खेले आइब" जैसे लोकगीतों पर तालियां देर तक गूंजती रहीं।

पारंपरिक धोती-कुर्ता और मिथिला साड़ियों में सजे-संवरे अतिथि, महिलाओं द्वारा की गई आरती और स्वागत गीत इस बात का प्रतीक था कि लोग भले ही दूर बसे हों, लेकिन अपनी सांस्कृतिक विरासत से आज भी गहरे जुड़े हैं।


आपसी सौहार्द और सहयोग का संदेश लेकर लौटा हर श्रोता

कार्यक्रम के अंत में भाजपा के वरिष्ठ नेता भगवत प्रसाद शर्मा ने कहा, “यह समारोह न केवल एक सामाजिक संगम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी है। जब एक ही शहर में बसने वाले अपनेपन से मिलते हैं, तो वह दृश्य किसी पर्व से कम नहीं होता।”

उन्होंने इस आयोजन को वार्षिक परंपरा बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि इसे आने वाले वर्षों में और भी बड़े स्तर पर मनाया जाएगा।


शब्दों में नहीं, भावनाओं में दिखा अपनापन

समारोह के दौरान न कोई औपचारिक भाषणबाज़ी हुई और न ही मंच पर दिखावे का बोलबाला। जो भी कहा गया, वह दिल से था। मंच पर हर आमंत्रित व्यक्ति को बोलने का अवसर दिया गया। मंच से जब एक बुज़ुर्ग महिला ने यह कहा कि "हम तो यहां अकेले पड़ गए थे, लेकिन आज ऐसा लगा जैसे अपना गांव फिर से बसा लिया हो", तो वहां मौजूद हर श्रोता की आंखें नम हो गईं।

एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की झलक, ग्रेटर नोएडा में गूंजा 'बिहार स्नेह मिलन समारोह'

खास रहा जलपान और बिहारी पकवानों का ज़ायका

आयोजन स्थल पर खास बिहारी पारंपरिक व्यंजनों का इंतज़ाम भी किया गया था – लिट्टी-चोखा, सत्तू की कचौड़ी, ठेकुआ, रसगुल्ला और खीर ने मेहमानों का दिल जीत लिया। इससे साबित हो गया कि “रसोई” और “संस्कृति” दोनों के ज़रिए ही दिलों को जोड़ा जा सकता है।


"बिहार से दूर, लेकिन संस्कारों से जुड़े": यही था समारोह का संदेश

ग्रेटर नोएडा जैसे मल्टीकल्चरल शहर में ऐसे कार्यक्रमों की बहुत आवश्यकता है। यह सिर्फ बिहार के लोगों को जोड़ने का नहीं, बल्कि भारत की विविधताओं में एकता का प्रतीक है। यह आयोजन केवल एक सामाजिक मिलन नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन का बीज था, जो आने वाले समय में और फलेगा-फूलेगा।


#RaftarToday के पाठकों के लिए विशेष आमंत्रण

यदि आप ग्रेटर नोएडा, नोएडा, दिल्ली-एनसीआर या आसपास कहीं भी रहते हैं और बिहार या पूर्वांचल से जुड़े हैं, तो आने वाले ऐसे आयोजनों का हिस्सा ज़रूर बनें। “एकता में ही शक्ति है” – और यही शक्ति इस कार्यक्रम से हर व्यक्ति अपने साथ लेकर लौटा।


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