नोएडा/दादरी, रफ्तार टुडे । उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े भूमि इसके में अफसरों की भूमिका पर पर्दा नहीं डाला जा सकता तत्कालीन एडीएम हापुड़ और तत्कालीन एसडीएम दादरी और तहसीलदार दादरी की भूमिका भी संदिग्ध है। कोई मूवीस गेम जब भी बड़ा हो सकता है जब उसमें अधिकारी शामिल रहे हो। रफ्तार टुडे ने अपनी पड़ताल में जिसने भी नाम लिए हैं सब की भूमिका संदिग्ध है।
प्रदेश के सबसे बड़े भूमि घोटाले का मास्टर माइंड रहा कुख्यात भू-माफिया भूमि हड़प कर करोड़ों कमाने के खेल में अकेला नहीं है। अंतर्राज्यीय माफिया के साथ प्रशासनिक अफसरों की पूरी टीम इस धंधे में शामिल थी। जानकार सूत्रों का दावा है कि आधा दर्जन से अधिक सरकारी अधिकारी, तत्कालीन गवर्नमेंट वकील बी इसके पार्ट रहे।
भू-माफिया के गिरोह का हिस्सा रहे हैं। इन अधिकारियों में तहसीलदार से लेकर कमिश्नर स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा भूमि घोटाला (एक ही गांव की जमीन का) दादरी तहसील (Noida Land Scam) के चिटहैरा गांव में हुआ है।
‘चिटहैरा दादरी कस्बे से लगा हुआ है। इस गांव की जमीन का रकबा 7 हजार बीघे से भी अधिक है। गांव समाज की जमीन (एल.एम.सी.) भी डेढ़ हजार बीघे के आसपास है। वर्ष-1997 में गांव के तत्कालीन गांव प्रधान ने एलएमसी के पट्टे करने शुरू किए थे। आरोप है कि पट्टों के बदले मोटी रकम वसूल कर 90 प्रतिशत पट्टे अपात्र लोगों को दे दिए गए। गांव के जागरूक लोगों को जब तक इस घोटाले का पता चलता तब तक बड़ा खेल हो चुका था। फिर भी शिकायतें की गई।
इन शिकायतों पर जांच का तथाकथित खेल चला किन्तु नतीजा कुछ नहीं निकला। गांव की लगभग 1200 बीघे जमीन के अवैध रूप से 282 पट्टे करके खूब दलाली की गयी।
रफ्तार टुडे की अगली खबर में हम नाम सहित रिपोर्ट सौंपेंगे कि कौन-कौन अधिकारी इसमें शामिल रहे हैं व उन्हें क्या-क्या योगदान रहा

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