नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में कारोबार कर रहे उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्ण करुणेश की अध्यक्षता में सेक्टर-16 स्थित बोर्ड रूम में नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NEA) के पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्राधिकरण के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। NEA अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन ने उद्योगों से जुड़े कई प्रमुख मुद्दे CEO के सामने रखे और उनके समाधान की मांग की।
बैठक में उद्योगों के संचालन, निर्माण कार्य में देरी, प्राधिकरण की नीतियों, भूखंड आवंटन, लीज रेंट और कंपनी संरचना में बदलाव से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। CEO कृष्ण करुणेश ने उद्यमियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कई मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ाने और उचित समाधान का भरोसा दिया।
धारा-10बी नोटिस के मामलों का OSD स्तर पर होगा निस्तारण
बैठक में धारा-10बी नोटिस से जुड़े मामलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। उद्यमियों की समस्याएं सुनने के बाद CEO ने बताया कि प्राधिकरण द्वारा धारा-10बी नोटिस से संबंधित प्रकरणों का निस्तारण OSD स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा। इससे ऐसे मामलों में उद्यमियों को राहत मिलने और लंबित प्रकरणों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
यूनिफाइड रेगुलेशन-2025 को लेकर बनेगी कमेटी
उद्योग प्रतिनिधियों ने यूनिफाइड रेगुलेशन-2025 से संबंधित उन प्रावधानों और नीतियों पर भी चिंता जताई, जिनके कारण औद्योगिक इकाइयों को व्यवहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। CEO ने इस संबंध में बताया कि नोएडा विकास प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी उन प्रावधानों का अध्ययन करेगी जिनसे उद्योगों को परेशानी हो रही है। बैठक में जब संबंधित विषयों पर चर्चा होगी, तब NEA अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन को भी आमंत्रित कर उनके सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद आवश्यक बिंदुओं को आगामी प्राधिकरण बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
NGT की रोक से प्रभावित इकाइयों को मिल सकता है अतिरिक्त समय
औद्योगिक इकाइयों को कार्यशील करने के लिए अतिरिक्त समय देने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। उद्यमियों का कहना था कि विभिन्न कारणों से निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है और कई मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर इकाइयों को कार्यशील करना मुश्किल रहा है। CEO ने कहा कि पिछले तीन वर्षों का पूरा ब्यौरा एकत्र किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि NGT की रोक के कारण कितने समय तक निर्माण कार्य प्रभावित या बंद रहा। इस अवधि का आकलन करने के बाद इकाइयों को अतिरिक्त समय दिए जाने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उद्यमियों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि निर्माण कार्य में आई देरी के वास्तविक कारणों का रिकॉर्ड सामने आने के बाद प्रभावित औद्योगिक इकाइयों को राहत देने की संभावना बन सकती है।
सशुल्क समयवृद्धि और लीज रेंट का मुद्दा बोर्ड के सामने जाएगा
बैठक में सशुल्क समयवृद्धि शुल्क बढ़ाए जाने तथा ई-नीलामी के माध्यम से आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर लीज रेंट प्रतिशत के बजाय प्रति वर्गमीटर की दर से निर्धारित किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। CEO ने इन दोनों विषयों को आगामी प्राधिकरण बोर्ड बैठक में रखने का आश्वासन दिया। उद्यमियों का मानना है कि लीज रेंट की व्यवस्था में स्पष्टता और व्यावहारिकता आने से उद्योगों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।
LLP में परिवर्तन पर CIC शुल्क को लेकर भी चर्चा
प्राइवेट कंपनियों में LLP में परिवर्तन से जुड़े मामलों में CIC शुल्क की अनिवार्यता का मुद्दा भी NEA ने उठाया। उद्यमियों ने CIC शुल्क को अनिवार्य रूप से वापस लेने और CIC की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग रखी। इस पर CEO कृष्ण करुणेश ने कहा कि मामले में आवश्यक राय ली जाएगी और संबंधित प्रावधानों पर विचार करने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।
उद्योगों की समस्याओं के समाधान के लिए संवाद जारी रखने पर जोर
बैठक में NEA पदाधिकारियों ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए प्राधिकरण और उद्यमियों के बीच लगातार संवाद जरूरी है। उद्योगों से संबंधित नीतियों और प्रक्रियाओं में व्यवहारिक कठिनाइयों को समय-समय पर सामने लाने से उनका समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है। बैठक में NEA अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन, महासचिव वी.के. खोसला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश कोहली, कोषाध्यक्ष शरद चंद्र जैन, उपाध्यक्ष मोहम्मद इरशाद, सुधीर श्रीवास्तव, मयंक गुप्ता, राजन खुराना और सचिव राहुल नैयर मौजूद रहे।
बैठक के बाद उद्योग प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण स्तर पर दिए गए आश्वासनों के आधार पर संबंधित मामलों में जल्द कार्रवाई होगी और आगामी बोर्ड बैठक में रखे जाने वाले प्रस्तावों से औद्योगिक इकाइयों को व्यावहारिक राहत मिल सकेगी।

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