नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा में वर्षों से अधूरी पड़ी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं और उनमें फंसे हजारों फ्लैट खरीदारों की परेशानियों के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने नोएडा प्राधिकरण से पुरानी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं से संबंधित भूखंड आवंटन, नक्शा स्वीकृति, निर्माण और परियोजना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह लगातार चार दिनों तक नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों को दिल्ली स्थित सीबीआई कार्यालय बुलाकर पूछताछ की गई।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद नोएडा प्राधिकरण के ग्रुप हाउसिंग और प्लानिंग विभाग में हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों से परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया, बिल्डरों को भूखंड आवंटित किए जाने, नक्शे स्वीकृत करने और निर्माण की प्रगति से संबंधित कई बिंदुओं पर जानकारी ली जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ शहर की अन्य पुरानी और विवादित ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है।
जेपी की क्यूब परियोजना से शुरू हुई जांच
बताया जा रहा है कि सीबीआई की जांच की शुरुआत सेक्टर-128 स्थित जेपी की क्यूब परियोजना से हुई। परियोजना से जुड़े रिकॉर्ड और विभिन्न प्रक्रियाओं की पड़ताल के दौरान जांच की कड़ियां अन्य ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं तक पहुंचीं। इन परियोजनाओं में बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदार वर्षों से अपने घर पर कब्जे का इंतजार कर रहे हैं। सीबीआई अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि इन परियोजनाओं को किस समय और किन परिस्थितियों में मंजूरी दी गई, भूखंड आवंटन की प्रक्रिया क्या थी तथा परियोजनाओं के नक्शे स्वीकृत करते समय संबंधित विभागों और अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
सोमवार को फिर हो सकती है पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई द्वारा नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने की संभावना है। अलग-अलग अधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र और उस समय लिए गए फैसलों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसी की पूछताछ केवल मौजूदा अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने रिकॉर्ड और उस समय प्रक्रिया में शामिल रहे अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका को भी समझने का प्रयास किया जा रहा है।
भूखंड आवंटन से नक्शा पास करने तक जांच
सीबीआई की जांच में ग्रुप हाउसिंग भूखंडों के आवंटन से लेकर भवन मानचित्र स्वीकृति तक की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित परियोजनाओं के लिए नियमों के अनुरूप प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। प्लानिंग विभाग से परियोजनाओं के नक्शे, उनकी स्वीकृति की तारीख, संशोधित नक्शों और संबंधित अनुमतियों से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए हैं। अधिकारियों से यह भी जानकारी ली जा रही है कि नक्शा स्वीकृत किए जाने के समय परियोजना से संबंधित क्या-क्या शर्तें लागू थीं।
निर्माण वर्षों तक रुका तो जिम्मेदारी किसकी?
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू उन परियोजनाओं से जुड़ा है, जिनका नक्शा स्वीकृत होने के बाद वर्षों तक निर्माण अधूरा रहा। सीबीआई यह भी जानना चाहती है कि यदि किसी परियोजना का निर्माण लंबे समय तक बंद रहा और बाद में दोबारा शुरू हुआ तो उसकी संरचनात्मक मजबूती, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच की जिम्मेदारी किस विभाग या संस्था की थी। इस पहलू को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई पुरानी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में निर्माण वर्षों तक रुका रहा। ऐसे में परियोजना के पुराने और नए निर्माण के बीच गुणवत्ता तथा तकनीकी मानकों की निगरानी कैसे हुई, इसकी जानकारी भी जांच एजेंसी जुटा रही है।
क्या नक्शा पास होने से पहले फ्लैट बेचने की अनुमति थी?
पूछताछ में एक अहम सवाल यह भी सामने आया है कि नक्शा स्वीकृत होने से पहले बिल्डर को फ्लैट बेचने की अनुमति किस स्थिति में थी और उस समय लागू नियम क्या थे। सेक्टर-128 स्थित क्यूब परियोजना के वर्ष 2013 में स्वीकृत नक्शे से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच एजेंसी ने मांगे हैं। इसके अलावा संबंधित जेपी भूखंड को प्राधिकरण के रिकॉर्ड में कब चिह्नित किया गया, परियोजना से जुड़ी विभिन्न अनुमतियां कब जारी हुईं और उनके आधार क्या थे, इस संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
कई पुरानी परियोजनाएं जांच के दायरे में
जांच के दौरान सेक्टर-79 की द बेल्विडियर, सेक्टर-131 की द आर्चर्ड और सेक्टर-143 की ब्लॉसम जेस्ट समेत कई अन्य ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें कई परियोजनाएं लंबे समय से अधूरी हैं और खरीदारों को वर्षों से अपने आशियाने का इंतजार करना पड़ रहा है। इन परियोजनाओं के संबंध में आवंटन, नक्शा, निर्माण की स्थिति और अन्य अनुमतियों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है।
बैंक अधिकारियों से भी जुटाई जा रही जानकारी
सीबीआई की जांच का दायरा केवल नोएडा प्राधिकरण तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी ने संबंधित बैंक अधिकारियों से भी जानकारी ली है। बैंकों से परियोजनाओं को दिए गए ऋण, ऋण स्वीकृति के समय परियोजना की स्थिति तथा बाद में परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित जानकारी जुटाई गई है। इससे जांच में परियोजनाओं के वित्तीय पक्ष को भी समझने में मदद मिल सकती है।
हजारों फ्लैट खरीदारों की नजर जांच पर
नोएडा की पुरानी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में लंबे समय से फंसे फ्लैट खरीदारों की नजर अब सीबीआई की जांच पर है। कई खरीदार वर्षों से बिल्डरों, प्राधिकरण और विभिन्न संस्थाओं के बीच अपनी समस्याओं का समाधान तलाश रहे हैं। परियोजनाओं के अधूरे रहने के कारण उन्हें आर्थिक बोझ, किराये और ईएमआई की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। ऐसे में सीबीआई की जांच से खरीदारों को उम्मीद है कि पुरानी परियोजनाओं से जुड़े आवंटन, अनुमोदन, निर्माण और वित्तीय फैसलों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
फिलहाल जांच एजेंसी की ओर से जांच के अंतिम निष्कर्ष या किसी अधिकारी की जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक रूप से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। हालांकि, लगातार दस्तावेज जुटाने और अधिकारियों से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट है कि नोएडा की पुरानी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं से जुड़े मामलों की जांच अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में और अधिकारियों से पूछताछ तथा अन्य परियोजनाओं के रिकॉर्ड तलब किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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