नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के विकास मॉडल पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। भंगेल–सलारपुर–बरोला क्षेत्र से गुजरने वाला भंगेल एलिवेटेड कॉरिडोर भले ही नवंबर में धूमधाम से जनता के लिए खोल दिया गया हो, लेकिन इसके नीचे की 5.5 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क, सर्विस लेन और ड्रेनेज सिस्टम आज भी अधूरी और जर्जर हालत में पड़ी हैं।

इस अधूरे काम की वजह वही पुराना विवाद है जो महीनों से प्राधिकरण और यूपी स्टेट ब्रिज कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPSBCL) के बीच चल रहा है—150 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बकाया भुगतान।

UPSBCL का साफ ऐलान — “150 करोड़ दो, तभी करेंगे नीचे का काम!”

NOIDA प्राधिकरण को हालिया पत्र में UPSBCL ने साफ लिखा है कि जब तक प्राधिकरण 150 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करता, तब तक—मुख्य सड़क

सर्विस लेन

ड्रेनेज
का काम शुरू नहीं किया जाएगा।

UPSBCL के अनुसार, ये 150 करोड़ रुपये निम्न मदों में बकाया हैं—

मूल्य वृद्धि (Price Escalation)

GST का अंतर

जून–सितंबर 2025 के बिल

देरी का ब्याज

एजेंसी ने प्राधिकरण को दो विकल्प भी दे दिए— या तो नीचे के सभी कामों से UPSBCL को मुक्त कर दिया जाए, या तत्काल 25 करोड़ रुपये जारी किए जाएं ताकि एजेंसी काम आगे बढ़ा सके।

नोएडा प्राधिकरण का प्रत्यारोप—“सड़क जनता की लाइफलाइन है, रुकी नहीं रह सकती”

नोएडा प्राधिकरण के अनुसार भंगेल एलिवेटेड कॉरिडोर के नीचे की सड़क भंगेल, सलारपुर, बरोला, सदरपुर, हल्द्वानी मोड़, सेक्टर 45/50/101/102/107 जैसे दर्जनों इलाकों की मुख्य लाइफलाइन है।

यह सड़क पूरी तरह टूट चुकी है—जगह-जगह गड्ढे

नालियां टूटी

कीचड़ जमा

बारिश में नदी जैसी हालत

दुकानों तक पहुंच मुश्किल

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया “अगर UPSBCL भुगतान विवाद के चलते काम नहीं करेगा, तो बोर्ड अनुमोदन के बाद नोएडा प्राधिकरण स्वयं नया टेंडर जारी करके यह काम पूरा करवाएगा।” प्राधिकरण का दावा है कि यह कदम अनुबंध की शर्तों के पूरी तरह अनुरूप है।

RTI में निकलकर आई असलियत – UPSBCL ने खुद माना 150 करोड़ बकाया

नोएडा विलेज रेसिडेंट्स एसोसिएशन (नॉवरा) के अध्यक्ष डॉ. रंजन तोमर द्वारा दायर RTI के जवाब में UPSBCL ने स्पष्ट माना है कि—

जून–सितंबर 2025 के बिल

पिछले चरणों के भुगतान

तक कुल लगभग 150 करोड़ रुपये बकाया हैं।

परियोजना की कुल लागत भी बढ़ गई है: पहले खर्च: ₹608 करोड़

अब संशोधित लागत: ₹650 करोड़ के आसपास

हालांकि UPSBCL ने लिखित में कहा कि “बकाया के कारण नीचे का काम रुका नहीं है”,
लेकिन हकीकत यह है कि— पिछले कई महीनों से नीचे का एक ईंट तक नहीं लगी है।

स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों का गुस्सा—“ऊपर फ़्लाईओवर चमक रहा, नीचे हम कीचड़ में डूब रहे”

भंगेल, सलारपुर और बरोला के दुकानदारों और स्थानीय निवासियों की हालत बदतर हो चुकी है।

उनकी समस्याएँ—

सड़क पूरी तरह टूटी

कीचड़ इतना कि बाइक तक फँस जाती है

दुकानों के सामने गंदा पानी जमा

ग्राहक आना बंद

व्यापार 50% तक घटा

एक दुकानदार ने कहा “ऊपर गाड़ियां 80 की स्पीड से दौड़ रही हैं, नीचे हम लोग 8 किमी/घंटा भी नहीं चला पा रहे, यह कैसा विकास है?”

महिलाओं और स्कूली बच्चों को रोज दुर्घटना के डर से कीचड़ और पानी से होकर निकलना पड़ता है।

विवाद का असर — सड़क विकास अटका, इलाके में बढ़ रहा ट्रैफिक और दुर्घटना का खतरा

नीचे की सड़क अधूरी होने के कारण—

ट्रैफिक डायवर्जन लगातार बदल रहा

जाम रोजाना लगता

बिजली के खंभे और नालियां खुले हैं

हर दिन छोटे-मोटे हादसे हो रहे

इस सड़क से रोज़ाना करीब 1.2 लाख लोग गुजरते हैं।
लेकिन नीचे का पूरा इलाका “विकास के नाम पर खतरे का जोन” बन चुका है।

नॉवरा की अपील — “CM योगी और विधायक पंकज सिंह तुरंत हस्तक्षेप करें”

नोएडा विलेज रेसिडेंट्स एसोसिएशन ने बड़ा बयान जारी कर कहा “यह विवाद दो सरकारी एजेंसियों का है लेकिन परेशान जनता हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधायक पंकज सिंह तुरंत हस्तक्षेप करें ताकि सड़क का काम शुरू हो सके।”

नॉवरा का कहना है कि—यह ग्रामीण क्षेत्र की लाइफलाइन

स्कूल–हॉस्पिटल–मार्केट तक पहुंच बाधित

व्यवसाय चौपट

प्रतिदिन हजारों लोगों की परेशानी

संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो ग्रामीण आंदोलन की ओर बढ़ेंगे।

आगे क्या? — प्राधिकरण बना सकता है नया प्लान

संभावना है कि—प्राधिकरण UPSBCL को नोटिस भेजेगा

बोर्ड बैठक में नया टेंडर जारी करने का प्रस्ताव रखा जाएगा

नए ठेकेदार को नीचे का काम सौंपा जा सकता है

UPSBCL से हिसाब-किताब बाद में निपटाया जाएगा

अनुबंध की शर्तों के अनुसार प्राधिकरण के पास यह अधिकार है कि यदि एजेंसी समय पर काम न करे तो परियोजना को पुनः अलग ठेकेदार को दिया जा सकता है।

“विकास रुका नहीं चाहिए”

भंगेल एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन भले ही हो चुका है, लेकिन इसका असली फायदा जनता को तभी मिलेगा जब नीचे की सड़क, नालियां और सर्विस लेन पूरी तरह तैयार होंगी।

UPSBCL–प्राधिकरण के बीच 150 करोड़ का यह विवाद न सिर्फ विकास कार्य रोक रहा है बल्कि जनता की परेशानी बढ़ा रहा है।

अब सबकी नजरें हैं—

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

सांसद महेश शर्मा

विधायक पंकज सिंह

नोएडा प्राधिकरण

कि क्या वे इस मुद्दे को प्राथमिकता देकर हल करवाते हैं या विवाद और लंबा चलता है।