60 लीटर दूध से खड़ा किया पारस डेयरी का साम्राज्य, ऐसे साधारण दूधिया से ‘मिल्क किंग’ बने चौधरी वेदराम नागर

25 अक्टूबर 2026 को चौधरी वेदराम नागर की 21वीं पुण्यतिथि, गुलावठी से शुरू हुआ संघर्ष और सफलता का सफर बना डेयरी उद्योग में मिसाल; पारस ब्रांड की स्थापना और विस्तार में निभाई अहम भूमिका

गुलावठी/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। कभी प्रतिदिन 50 से 60 लीटर दूध बेचकर अपने कारोबार की शुरुआत करने वाले चौधरी वेदराम नागर ने मेहनत, लगन और दूरदर्शिता के दम पर डेयरी उद्योग में अपनी अलग पहचान बनाई। एक साधारण दूध कारोबारी से ‘मिल्क किंग’ के नाम से प्रसिद्ध हुए चौधरी वेदराम नागर की कहानी छोटे स्तर पर शुरू हुए व्यवसाय के बड़े उद्योग में बदलने की प्रेरक मिसाल है। 25 अक्टूबर 2026 को उनकी 21वीं पुण्यतिथि पर उनके संघर्ष, कारोबारी उपलब्धियों और विरासत को याद किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के गुलावठी से जुड़ी उनकी कारोबारी यात्रा ने दूध और दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई। उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे इसे उत्पादन इकाइयों तथा व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम किया। उनके प्रयासों से जुड़ा पारस ब्रांड आगे चलकर डेयरी उत्पादों के कारोबार में जाना-पहचाना नाम बना।

60 लीटर दूध से शुरू हुआ सफलता का सफर

चौधरी वेदराम नागर का जन्म 20 अप्रैल 1933 को बागपत जिले के खेकड़ा में हुआ था। वर्ष 1960 में उन्होंने दूध बेचने का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआती दौर में वह प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध बेचते थे। उस समय कारोबार सीमित था, लेकिन आगे बढ़ने की उनकी इच्छाशक्ति और ग्राहकों का भरोसा उनकी व्यावसायिक यात्रा की आधारशिला बने। दूध की गुणवत्ता, नियमित आपूर्ति और कारोबार को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर उनका जोर रहा। समय के साथ उन्होंने केवल दूध बेचने तक सीमित रहने के बजाय दूध के प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए। इसी सोच ने उनके व्यवसाय को एक नए स्तर पर पहुंचाने में भूमिका निभाई।

गुलावठी से शुरू हुआ डेयरी उद्योग का विस्तार

चौधरी वेदराम नागर ने अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न चरणों में व्यावसायिक फर्मों और उत्पादन इकाइयों की स्थापना की। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, वर्ष 1980 में वेदराम वीर सिंह के नाम से फर्म स्थापित की गई। वर्ष 1984 में बुलंदशहर जिले के गुलावठी में दूध और दुग्ध उत्पादों से जुड़ी इकाई शुरू हुई। इसके बाद वर्ष 1986 में वी.आर.एस. फूड्स के नाम से कंपनी की स्थापना हुई। वर्ष 1987 में गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में दूध उद्योग स्थापित किया गया और वर्ष 1992 में गुलावठी में बड़े दूध प्लांट की शुरुआत हुई। कारोबार के विस्तार के क्रम में वर्ष 2004 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी दूध उत्पादन से जुड़ी इकाई स्थापित की गई।

इन प्रयासों से कारोबार को एक स्थान तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिली। उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए बाजारों से जुड़ने और ग्राहकों तक दुग्ध उत्पाद पहुंचाने की रणनीति ने इस व्यवसाय के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘मिल्क किंग’ के नाम से मिली पहचान

चौधरी वेदराम नागर का नाम पारस ब्रांड और वी.आर.एस. फूड्स के विकास से जुड़ा रहा। सीमित मात्रा में दूध बेचने से शुरू हुई कारोबारी यात्रा आगे चलकर बड़े डेयरी व्यवसाय में विकसित हुई। इसी उपलब्धि के कारण उन्हें ‘मिल्क किंग’ के नाम से पहचाना जाने लगा। उनकी सफलता की कहानी का महत्वपूर्ण पहलू कारोबार का क्रमिक विस्तार और दूध के व्यवसाय को संगठित औद्योगिक स्वरूप देना था। गुलावठी इस यात्रा का प्रमुख केंद्र बना, जबकि बाद के वर्षों में समूह की गतिविधियों का विस्तार अन्य क्षेत्रों तक हुआ।

बेटों ने आगे बढ़ाई कारोबारी विरासत

चौधरी वेदराम नागर के पुत्र सुरेंद्र सिंह नागर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और राज्यसभा सांसद के रूप में पहचान रखते हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने भी पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। परिवार से जुड़ा कारोबारी समूह डेयरी क्षेत्र के अतिरिक्त अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी सक्रिय रहा है। गुलावठी में चौधरी वेदराम नागर की प्रतिमा स्थापित की गई है। उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर उन्हें याद करने के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनके नाम से जुड़े चौधरी वेदराम चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से समाजसेवा के कार्य किए जाने की जानकारी भी दी जाती है।

परिवार की ओर से उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के प्रयासों में कारोबार के साथ सामाजिक गतिविधियों को भी महत्व दिया जाता रहा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उद्योग जगत में पहचान बनाने की उनकी यात्रा स्थानीय लोगों और नए उद्यमियों के लिए प्रेरणा का विषय बनी हुई है।

21वीं पुण्यतिथि पर याद किया जा रहा संघर्ष और योगदान

25 अक्टूबर 2005 को चौधरी वेदराम नागर का निधन हुआ था। इस आधार पर 25 अक्टूबर 2026 को उनकी 21वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर उनके जीवन के उस सफर को याद किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत प्रतिदिन कुछ दर्जन लीटर दूध बेचने से हुई थी और जो आगे चलकर बड़े कारोबारी विस्तार तक पहुंचा। चौधरी वेदराम नागर की कहानी केवल एक सफल उद्योगपति की कहानी नहीं है, बल्कि मेहनत, निरंतरता और उद्यमशीलता के महत्व को भी सामने रखती है। उन्होंने जिस छोटे व्यवसाय से शुरुआत की, उसे समय के साथ विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए। यही संघर्ष और कारोबारी दृष्टि उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बने। उनकी 21वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनकी उपलब्धियों, पारस ब्रांड से जुड़ी विरासत और डेयरी उद्योग में उनके योगदान को याद किया जा रहा है।