कुरकुरे बेस और खोये की परत ने जीता स्वाद प्रेमियों का दिल, ट्रेड शो में सामने तैयार हो रहा ताजा घेवर; ₹600 किलो तक बिक्री
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS 2026) में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पारंपरिक उत्पाद और व्यंजन लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसी क्रम में वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ODOC) पवेलियन में बागपत के स्टॉल पर मौजूद घेवर लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। स्टॉल पर पहुंच रहे लोग पहले अपनी आंखों के सामने घेवर तैयार होते देख रहे हैं और इसके बाद उसका स्वाद भी चख रहे हैं।
दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद समेत आसपास के क्षेत्रों से ट्रेड शो में पहुंचे लोगों ने बागपत के घेवर की कुरकुराहट और खोये की परत को खास तौर पर पसंद किया। खास बात यह है कि आमतौर पर सावन के मौसम से जोड़कर देखी जाने वाली इस पारंपरिक मिठाई को सितंबर के महीने में भी मौके पर ताजा तैयार कर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार
बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में पिछले तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार किया जा रहा है। इसी परिवार से जुड़े दीपक गोयल UPITS में बागपत के स्टॉल का संचालन कर रहे हैं। दीपक गोयल के मुताबिक ट्रेड शो में आने वाले कई लोग घेवर देखकर यह सवाल करते हैं कि आमतौर पर सावन में मिलने वाली यह मिठाई सितंबर में कैसे तैयार की जा रही है। उनका कहना है कि बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है। समय के साथ इसकी मांग दूसरे मौसम में भी बनी हुई है और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अलग-अलग समय पर इसकी उपलब्धता की जानकारी मिल रही है।
लोगों के सामने तैयार हो रहा ताजा घेवर
UPITS में बागपत के स्टॉल की एक खासियत यह भी है कि यहां बागपत से आए पांच कारीगर लोगों के सामने ही ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। घेवर बनने की प्रक्रिया को करीब से देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग स्टॉल पर रुक रहे हैं। लोगों के सामने घेवर तैयार होने से जहां उनकी उत्सुकता बढ़ रही है, वहीं उन्हें पारंपरिक तरीके से इस मिठाई को तैयार करने की प्रक्रिया देखने का अवसर भी मिल रहा है। दीपक गोयल के अनुसार ट्रेड शो के दौरान रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है और घेवर ₹600 प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है।

कुरकुरे बेस और खोये की परत है खास पहचान
बागपत के घेवर की खासियत बताते हुए दीपक गोयल ने बताया कि इसमें शुद्ध दूध से तैयार खोये का इस्तेमाल किया जाता है। नीचे का कुरकुरा हिस्सा और उसके ऊपर जमी खोये की परत इसे अलग स्वाद और पहचान देती है। उन्होंने बताया कि बागपत के अलावा दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी घेवर की मांग रहती है। ट्रेड शो में अलग-अलग शहरों से आए लोगों को सीधे इस पारंपरिक मिठाई का स्वाद चखने का मौका मिल रहा है।
दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद के लोगों ने चखा स्वाद
ट्रेड शो में पहुंचीं दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज समेत कई लोगों ने बागपत के घेवर का स्वाद लिया। लोगों ने स्टॉल पर रुककर न केवल घेवर खाया बल्कि उसे तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी। लोगों के लिए विशेष रूप से आकर्षण का विषय यह रहा कि घेवर को पारंपरिक तरीके से सामने तैयार किया जा रहा है। इससे उन्हें मिठाई के स्वाद के साथ उसके निर्माण की प्रक्रिया को समझने का भी अवसर मिला।
75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को मिला एक मंच
इस बार UPITS में पहली बार वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को प्रदर्शित करने के लिए जगह दी गई है। बागपत की पहचान रखने वाले घेवर को भी इस पहल के तहत शामिल किया गया है।
इससे बागपत की पारंपरिक मिठाई को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले खरीदारों और आगंतुकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। ट्रेड शो के जरिए जहां पारंपरिक व्यंजनों को नए बाजार और उपभोक्ताओं से जोड़ने की कोशिश हो रही है, वहीं स्थानीय कारीगरों और खाद्य उद्यमियों को भी अपनी विरासत और उत्पाद प्रदर्शित करने का मंच मिल रहा है। बागपत का घेवर इस पूरे आयोजन में इसी स्थानीय स्वाद, पारंपरिक कारीगरी और बदलते बाजार के मेल का एक उदाहरण बनकर सामने आया है।

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