Noida Ramlila 2026: नोएडा स्टेडियम में गूंजा जय श्रीराम, प्रभु श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने जीता दर्शकों का दिल

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा स्टेडियम में श्री सनातन धर्म रामलीला समिति के तत्वावधान में हरि भक्ति कला ट्रस्ट द्वारा आयोजित रामलीला के चौथे दिन भक्ति, आस्था, रोमांच और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध निर्देशक पंकज शर्मा के निर्देशन में कलाकारों ने माता सीता के बाल स्वरूप द्वारा शिव धनुष उठाने से लेकर सीता स्वयंवर, भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंजन और लक्ष्मण-परशुराम संवाद तक की लीलाओं का सजीव मंचन किया। जनक की व्यथा, लक्ष्मण का आक्रोश और परशुराम के क्रोधित स्वरूप जैसे दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं, भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने और माता सीता द्वारा उन्हें जयमाला पहनाने के प्रसंग पर दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

बालिका सीता द्वारा शिव धनुष उठाने के प्रसंग से हुआ भावपूर्ण मंचन

रामलीला की प्रस्तुति में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को क्रमबद्ध और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मंचन की शुरुआत बालिका सीता द्वारा शिव धनुष उठाने के मनमोहक दृश्य से हुई। इस प्रसंग में राजा जनक ने सीता के विवाह के लिए स्वयंवर आयोजित करने का प्रण लिया। बालिका सीता के बड़े स्वरूप तक की यात्रा को गीतों और भावनात्मक दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को कथा से जोड़ दिया। इसके बाद पुष्प वाटिका में माता सीता और भगवान श्रीराम की प्रथम भेंट का सुंदर मंचन हुआ। गौरी पूजन के दौरान माता सीता द्वारा मां गौरी से मनचाहा वर प्राप्त करने की प्रार्थना का प्रसंग भी आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों की भाव-भंगिमाओं और प्रभावशाली संवादों ने इन दृश्यों को जीवंत बना दिया।

सीता स्वयंवर में रावण-बाणासुर संवाद और राजा जनक की व्यथा ने बांधा समां

सीता स्वयंवर के प्रसंग में रावण और बाणासुर के बीच संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। स्वयंवर में उपस्थित राजाओं द्वारा शिव धनुष न उठा पाने के बाद राजा जनक की व्यथा और निराशा को कलाकारों ने मार्मिक अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। जनक की पीड़ा देखकर दर्शक भावुक हो गए। इसी दौरान लक्ष्मण जी का क्रोध और उनके ओजस्वी संवादों ने मंच पर रोमांच पैदा कर दिया। इसके बाद भगवान श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से शिव धनुष उठाकर उसका भंजन किया। इस दृश्य के साथ ही रामलीला मैदान तालियों और जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। माता सीता द्वारा भगवान श्रीराम को जयमाला पहनाने का दृश्य भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने बढ़ाया रोमांच

शिव धनुष भंग होने के बाद भगवान परशुराम का क्रोधित मुद्रा में मंच पर प्रवेश हुआ। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए तीखे संवादों का प्रभावशाली मंचन किया गया। दोनों पात्रों के बीच संवादों की तीव्रता, अभिनय और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। प्रसंग के अंतिम चरण में भगवान परशुराम ने श्रीराम के दिव्य स्वरूप को पहचान लिया। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीराम से क्षमा मांगकर प्रस्थान किया। इस पूरे दृश्य में कलाकारों ने अपनी संवाद अदायगी और अभिनय कौशल से रामायण के इस प्रसिद्ध प्रसंग को जीवंत कर दिया।

कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

रामलीला में विभिन्न पात्रों की भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों ने पूरी निष्ठा, ऊर्जा और समर्पण के साथ अपने किरदारों को प्रस्तुत किया।

  • भगवान श्रीराम: अभिषेक शर्मा
  • लक्ष्मण: मोहित यादव
  • माता सीता: युगांशा शर्मा
  • परशुराम: मनीष चौहान
  • राजा जनक: महेश
  • रावण: अमित शर्मा
  • बाणासुर: कपिल

सभी कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। मंच पर प्रस्तुत दृश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके माध्यम से सनातन संस्कृति, भक्ति, मर्यादा और जीवन मूल्यों का संदेश भी दिया गया।

सनातन संस्कृति और श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास

श्री सनातन धर्म रामलीला समिति के सदस्यों ने दर्शकों से आगामी रामलीला प्रसंगों में भी सपरिवार शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंग समाज को मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

रामलीला के चौथे दिन श्री सनातन धर्म रामलीला समिति, नोएडा के चेयरमैन डॉ. टी.एन. गोविल, अध्यक्ष टी.एन. चौरसिया, महासचिव संजय बाली, कार्यकारी अध्यक्ष सुशील भारद्वाज, कोषाध्यक्ष अल्पेश गर्ग सहित समिति के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में रविंदर गुप्ता, अर्चना राय, केशव गंगल, अतुल वर्मा, तरुण राज, जतिन, रोहित श्रीवास्तव, पवन सिंह, सुंदर सिंह राणा, एन.के. अग्रवाल, पुनीत शुक्ला, प्रमोद रंगा, चंद्रपाल सिंह, श्रेया चतुर्वेदी, विनोद शर्मा, सुनील कुमार, देवेंद्र गंगल, कुलदीप गुप्ता, मुकेश गुप्ता, योगेंद्र शर्मा, अतुल मित्तल, डॉ. एस.पी. जैन, संजय जैन, अमित पोरवाल, मनोज पोरवाल, नरेश बंसल, छाया राय, विशाल कश्यप, लोकेश कश्यप, कुलदीप गोयल, पुष्कर शर्मा, उदय जैन, सन्नी अग्रवाल, मनोज उपाध्याय, माधव तुली, आदित्य अग्रवाल, तुषार गोयल, पी.के. गुप्ता, गिरिजा सिंह, महेंद्र कटारिया, राम कुमार शर्मा, रवि यादव, बबलू यादव, शिवाश श्रीवास्तव, अविनाश, रोहित ठाकुर, रमेश कुमार, एस.के.एस. राणा, अनुज गुप्ता, सत्यनारायण गोयल, पंकज जिंदल, मित्रा शर्मा, विपिन मलन, जनक भाटिया, नवीन सोनी, जे.सी. माहेश्वरी, समीर अग्रवाल, वीरेंद्र मेहता, नरेंद्र चोपड़ा, मनीष अग्रवाल, पवनदीप सिंह, विपिन बंसल, अनिल गुप्ता, विनय शर्मा, सौरभ गोविल, राजीव अजमानी, संजय गोयल, विकास जैन, अखिलेश बधोरिया, जितेंद्र सिंह, महेश चौहान, प्रमोद शर्मा, अशोक मिश्रा, राकेश गुप्ता, अशोक चौहान, राजेश भारद्वाज और राधा किशन गर्ग सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

नोएडा स्टेडियम में आयोजित इस रामलीला के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम की लीलाओं के दर्शन के साथ भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला।