पहले चरण में छह लाख की आबादी के लिए विकास की योजना; भूमि अधिग्रहण, अवैध निर्माण पर रोक और नियोजित विकास की निगरानी करेंगे अधिकारी

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नया नोएडा बसाने की दिशा में प्राधिकरण ने प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रस्तावित शहर के विकास कार्यों, भूमि अधिग्रहण और अवैध निर्माण पर नियंत्रण के लिए तीन वर्क सर्किल बनाए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण के दो महाप्रबंधकों (जीएम) को सौंपी गई है। वर्क सर्किल-11 का दायित्व जीएम एसपी सिंह को दिया गया है, जबकि वर्क सर्किल-12 और 14 की जिम्मेदारी जीएम एके अरोड़ा संभालेंगे। अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय करने के लिए कार्यालय आदेश भी जारी किया गया है।

प्राधिकरण की योजना के अनुसार, संबंधित अधिकारी नए शहर के निर्धारित क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने, अवैध निर्माण और अतिक्रमण रोकने तथा विकास कार्यों को नियोजित तरीके से आगे बढ़ाने की निगरानी करेंगे। जल्द ही इन वर्क सर्किलों में वरिष्ठ प्रबंधकों और प्रबंधकों की नियुक्ति भी की जानी है।

तीन वर्क सर्किलों में बांटी गई जिम्मेदारी

नया नोएडा क्षेत्र में विकास गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए वर्क सर्किल-11, 12 और 14 गठित किए गए हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के इस बंटवारे से भूमि संबंधी कार्यों और निर्माण गतिविधियों की निगरानी को अलग-अलग स्तर पर संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। वर्क सर्किल-11 की जिम्मेदारी जीएम एसपी सिंह को दी गई है। वहीं, जीएम एके अरोड़ा वर्क सर्किल-12 और 14 का काम देखेंगे। इन अधिकारियों के सामने भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अनधिकृत निर्माण पर नियंत्रण और नियोजित विकास सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी।

पहले चरण में छह लाख की आबादी का लक्ष्य

नए नोएडा का मास्टर प्लान लगभग 209.11 वर्ग किलोमीटर यानी 20,911.29 हेक्टेयर क्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। शहर को चार चरणों में विकसित करने की योजना है। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार, पहले चरण में छह लाख की आबादी के लिए विकास की परिकल्पना की गई है।

मास्टर प्लान में विकास के लिए चरणबद्ध समयसीमा निर्धारित की गई है:

  • पहला चरण (2023–2027): 3,165 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास।
  • दूसरा चरण (2027–2032): 3,798 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास।
  • तीसरा चरण (2032–2037): 5,908 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास।
  • चौथा चरण (2037–2041): 8,230 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास।

इन चारों चरणों में प्रस्तावित क्षेत्रफल का कुल योग लगभग 21,101 हेक्टेयर होता है, जो मास्टर प्लान में बताए गए कुल क्षेत्रफल 20,911.29 हेक्टेयर से अधिक है। इसलिए चरणवार आंकड़ों का प्राधिकरण के आधिकारिक दस्तावेज से मिलान किया जाना जरूरी है।

आपसी सहमति से भूमि अधिग्रहण की नीति

नए नोएडा के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण विषय है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्राधिकरण ने यमुना विकास प्राधिकरण की तर्ज पर मुआवजा नीति निर्धारित की है। इसके तहत किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन लेने की व्यवस्था की गई है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों की सहमति, मुआवजे की शर्तें और संबंधित भूमि का नियोजन महत्वपूर्ण होंगे। वर्क सर्किलों को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद इन प्रक्रियाओं को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

GIS मैप से तय होगा आवासीय और औद्योगिक विकास का स्वरूप

नए नोएडा को आधुनिक और नियोजित शहर के रूप में विकसित करने में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भू-स्थानिक डेटा के विश्लेषण के आधार पर तैयार होने वाला GIS मैप आवासीय, औद्योगिक और संस्थागत क्षेत्रों के नियोजन में सहायक होगा। इसके जरिए जल निकायों के संरक्षण, सड़क नेटवर्क की योजना और विभिन्न उपयोगों के लिए भूमि के उचित निर्धारण पर काम किया जा सकेगा। वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर विकास की योजना तैयार करने से भविष्य में बुनियादी सुविधाओं और शहरी ढांचे को बेहतर तरीके से विकसित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

नया नोएडा परियोजना के लिए तीन वर्क सर्किलों का गठन प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम है। अब भूमि संबंधी प्रक्रियाओं, अवैध निर्माण पर नियंत्रण और प्रस्तावित विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में इन अधिकारियों की भूमिका अहम रहेगी