नया नोएडा में कैंप लगाकर होगा जमीन अधिग्रहण, 37 गांवों में पहले चरण की तैयारी; किसानों से सीधे संवाद करेगा प्राधिकरण
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (डीएनजीआईआर) के रूप में विकसित किए जा रहे ‘नया नोएडा’ में जमीन खरीद और अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति देने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। किसानों की जमीन से संबंधित जानकारी जुटाने, दस्तावेजों का सत्यापन करने और भूमि खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए प्राधिकरण की ओर से गांवों में कैंप लगाए जाएंगे। शुरुआत में दादरी, बुलंदशहर और सिकंदराबाद क्षेत्र के गांवों को इसमें शामिल किया गया है।
प्राधिकरण के अनुसार, नया नोएडा के पहले चरण में शामिल 37 गांवों में कैंप लगाकर किसानों से सीधे बातचीत की जाएगी। इन कैंपों के माध्यम से किसानों को जमीन खरीद, मुआवजा, आबादी भूखंड और भूमि से जुड़े अन्य प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। किसानों से उनकी जमीन के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों से संबंधित दस्तावेज भी लिए जाएंगे, ताकि आगे की प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी या अभिलेखीय समस्या सामने न आए।
गांवों में लगाए जाएंगे कैंप, किसानों से सीधे होगा संवाद
नया नोएडा परियोजना के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण ने चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की योजना बनाई है। इसके तहत सबसे पहले उन गांवों में कैंप लगाए जाएंगे, जो पहले चरण की योजना में शामिल हैं। कैंप के दौरान किसानों को उनकी जमीन से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी आपत्तियों और सवालों को भी दर्ज किया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ पुष्पराज सिंह के अनुसार, कैंप के माध्यम से किसानों से सीधे संवाद स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों से जमीन के कागजात और मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज लिए जाएंगे तथा जमीन खरीद और मुआवजे से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्राधिकरण स्तर पर किसानों के सवालों और उनकी जमीन से संबंधित जानकारी को दर्ज किया जाएगा। वहीं, गांवों में लगाए जाने वाले कैंप में लेखपाल राजस्व अभिलेखों का सत्यापन करेंगे। सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद आगे की प्रक्रिया को बढ़ाया जाएगा।
पांच लेखपाल करेंगे राजस्व अभिलेखों का सत्यापन
प्राधिकरण की योजना के तहत कैंप में पांच लेखपालों की नियुक्ति की जाएगी। इनकी जिम्मेदारी संबंधित गांवों के राजस्व अभिलेखों की जांच और किसानों की भूमि से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन करने की होगी। इससे जमीन के वास्तविक स्वामित्व, रकबे और अभिलेखों में दर्ज विवरण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक, जमीन खरीद से पहले और बाद में किसी तरह का नया निर्माण अथवा अवैध अतिक्रमण न हो, इसके लिए भी निगरानी की जा रही है। अधिसूचना जारी होने से पहले और उसके बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का मिलान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिसूचना के बाद संबंधित जमीन पर किसी तरह का नया निर्माण या अतिक्रमण तो नहीं किया गया।
मुआवजे और आबादी भूखंड को लेकर भी तय है व्यवस्था
नया नोएडा के विकास में किसानों को सहभागी बनाने के लिए मुआवजे और आबादी भूखंड से जुड़े प्रावधान भी निर्धारित किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फेज-1 और फेज-2 में जमीन खरीद के लिए मुआवजा दर के साथ छह प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अनुरूप दिया जाएगा। वहीं, फेज-3 और फेज-4 में मुआवजा दर के साथ सात प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ यमुना प्राधिकरण के अनुरूप दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य जमीन देने वाले किसानों को केवल मुआवजा देने तक सीमित न रखते हुए उन्हें विकसित क्षेत्र में भागीदारी का अवसर देना भी है। आबादी भूखंड से संबंधित पात्रता और प्रक्रिया के बारे में किसानों को कैंप के दौरान जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

209.11 वर्ग किलोमीटर में विकसित होगा नया नोएडा
दादरी और आसपास के क्षेत्रों में प्रस्तावित नया नोएडा करीब 209.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल, यानी लगभग 20,911.29 हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा। इसके लिए मास्टर प्लान के अनुसार चार चरणों में जमीन की व्यवस्था और विकास कार्य किए जाने हैं।
प्रस्तावित चरणों के अनुसार—
- पहला चरण: वर्ष 2023 से 2027 तक, लगभग 3,165 हेक्टेयर
- दूसरा चरण: वर्ष 2027 से 2032 तक, लगभग 3,798 हेक्टेयर
- तीसरा चरण: वर्ष 2032 से 2037 तक, लगभग 5,908 हेक्टेयर
- चौथा चरण: वर्ष 2037 से 2041 तक, लगभग 8,230 हेक्टेयर
इस तरह पूरे क्षेत्र का विकास मास्टर प्लान के अनुसार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
किसानों की सहमति और पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर
नया नोएडा परियोजना के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया में किसानों से सीधे संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राधिकरण का प्रयास है कि किसानों को उनकी जमीन, मुआवजा और प्रस्तावित विकास योजना से जुड़ी जानकारी गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए। कैंप के जरिए किसानों की समस्याओं और दस्तावेजों की स्थिति को समझने के बाद आगे की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से बढ़ाया जाएगा।
एसीईओ पुष्पराज सिंह ने भी किसानों से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के सत्यापन को प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। उनके अनुसार, कैंप के माध्यम से किसानों से जानकारी जुटाने और उनके सवालों को दर्ज करने के बाद सर्वे का कार्य पूरा किया जाएगा। इसके आधार पर जमीन खरीद और आगे की कार्रवाई को गति दी जाएगी। प्राधिकरण स्तर पर जमीन से जुड़ी जानकारी जुटाने और राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने से अब नया नोएडा परियोजना के लिए भूमि प्रबंधन का काम जमीनी स्तर पर आगे बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले चरण में सर्वे और अभिलेखीय सत्यापन पूरा होने के बाद संबंधित जमीन के संबंध में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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