ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का अहम जंक्शन बना गौतमबुद्ध नगर का न्यू दादरी स्टेशन; मुंबई, गुजरात और कोलकाता के बंदरगाहों से कार्गो कनेक्टिविटी को मिली रफ्तार, रोजाना 350 से 400 टन ई-कॉमर्स पार्सल का हो रहा ट्रांजिट
न्यू नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतमबुद्ध नगर का न्यू दादरी स्टेशन देश के माल परिवहन नेटवर्क में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) को जोड़ने वाले इस अहम जंक्शन से औद्योगिक सामान, आयात-निर्यात कंटेनर, कोयला, स्टील, सीमेंट और ई-कॉमर्स पार्सल की आवाजाही को गति मिल रही है। समर्पित माल गलियारों के जरिए माल ढुलाई का समय कम करने और देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ने में न्यू दादरी की भूमिका अहम मानी जा रही है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) के नेटवर्क में न्यू दादरी स्टेशन एक महत्वपूर्ण इंटर-कॉरिडोर गेटवे है। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लुधियाना से दानकुनी तक फैला है, जबकि वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उत्तर भारत को गुजरात और महाराष्ट्र के प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ता है। दोनों कॉरिडोर के बीच माल का आदान-प्रदान होने से उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत के बीच कार्गो परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।
मुंबई, गुजरात और कोलकाता के बंदरगाहों से जुड़ाव
न्यू दादरी स्टेशन की अहमियत का बड़ा कारण देश के प्रमुख बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों से इसका जुड़ाव है। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA), मुंद्रा और पीपावाव जैसे बंदरगाहों से आने वाले आयात-निर्यात कंटेनर तथा औद्योगिक सामान इस माल परिवहन नेटवर्क के जरिए विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाए जाते हैं। दूसरी ओर, ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर से आने वाला कोयला, स्टील, सीमेंट और कृषि उत्पाद जैसे माल भी इंटरचेंज के जरिए पश्चिमी भारत के औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों की ओर भेजे जा सकते हैं।
इस नेटवर्क का लाभ एनसीआर के उद्योगों को भी मिलता है। कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई में बेहतर कनेक्टिविटी से परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकती है। बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल की आवाजाही सुगम होने से आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रोजाना 350 से 400 टन ई-कॉमर्स पार्सल का ट्रांजिट
न्यू दादरी स्टेशन की भूमिका अब केवल भारी औद्योगिक माल की ढुलाई तक सीमित नहीं है। यहां ज्वाइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस (JPP-RCS) के माध्यम से ई-कॉमर्स पार्सल के परिवहन की व्यवस्था भी संचालित होने की जानकारी दी गई है। इसके तहत बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए पार्सल को विभिन्न वितरण केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, स्टेशन से रोजाना लगभग 350 से 400 टन पार्सल का ट्रांजिट होता है। यह नेटवर्क उत्तर भारत के वितरण केंद्रों को अहमदाबाद, सूरत, पुणे, मुंबई और गोवा जैसे शहरों से जोड़ने में मदद करता है। ई-कॉमर्स कारोबार के विस्तार के बीच रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में पार्सल का परिवहन सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने का एक विकल्प बन सकता है।
इसके अलावा, न्यू दादरी स्टेशन से एनटीपीसी दादरी पावर प्लांट के लिए कोयले की आपूर्ति में भी रेल नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। औद्योगिक कच्चे माल, तापमान-संवेदनशील उत्पादों और घरेलू उपभोक्ता वस्तुओं की आवाजाही भी व्यापक माल परिवहन व्यवस्था का हिस्सा है।
72 घंटे से घटकर 24 घंटे से कम हुआ सफर
माल ढुलाई के समय में कमी न्यू दादरी से जुड़े फ्रेट कॉरिडोर की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जा रही है। खबर में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, न्यू दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, नवी मुंबई तक कार्गो पहुंचने में पहले करीब 72 घंटे लगते थे, जबकि अब यह समय 24 घंटे से कम बताया गया है। कुछ विशेष परिस्थितियों में यात्रा अवधि 10 से 12 घंटे तक रहने का भी दावा किया गया है। इसी तरह, गुजरात के मुंद्रा पोर्ट तक डबल-स्टैक कंटेनर सेवा से परिवहन समय में लगभग नौ घंटे की बचत होने की जानकारी दी गई है। गुजरात के न्यू अंचेली तक करीब 1,200 किलोमीटर की दूरी लगभग 23 घंटे में तय किए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, इन समय-सीमाओं पर रूट, परिचालन परिस्थितियों और सेवा के प्रकार का असर पड़ सकता है।

माल परिवहन में लगने वाला समय कम होने से उद्योगों को आपूर्ति की योजना बनाने, बंदरगाहों तक कंटेनर पहुंचाने और तैयार उत्पादों को बाजार तक भेजने में सुविधा मिल सकती है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत और डिलीवरी समय को बेहतर बनाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
छह साल में मालगाड़ियों की संख्या में तेज वृद्धि का दावा
फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों की बढ़ती आवाजाही को इस नेटवर्क के विस्तार का संकेत माना जा रहा है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में प्रतिदिन औसतन 22 ट्रेनें संचालित होती थीं। इसके बाद संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2021-22 में औसत संख्या 64, वर्ष 2022-23 में 170, वर्ष 2023-24 में 241, वर्ष 2024-25 में 358 और वर्ष 2025-26 में 406 ट्रेन प्रतिदिन बताई गई हैं। वर्ष 2026-27 के लिए अब तक प्रतिदिन औसतन 440 ट्रेनों का आंकड़ा दिया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर छह वर्षों में मालगाड़ियों की औसत दैनिक संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का दावा किया गया है। साथ ही, ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर अब तक कुल 5,35,085 ट्रेन यात्राएं पूरी होने की जानकारी भी दी गई है।
हालांकि, इन आंकड़ों की सटीक तुलना के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रतिदिन चलने वाली ट्रेनों की संख्या पूरे फ्रेट कॉरिडोर की है या किसी खास खंड की। वर्ष 2026-27 अभी जारी है, इसलिए इसके आंकड़े अंतिम वार्षिक आंकड़ों के बजाय अब तक के औसत के रूप में ही प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
न्यू दादरी की बढ़ती भूमिका से एनसीआर को क्या मिलेगा?
न्यू दादरी स्टेशन की रणनीतिक स्थिति गौतमबुद्ध नगर और व्यापक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यहां फ्रेट कॉरिडोर का बेहतर इस्तेमाल होने से औद्योगिक माल की आवाजाही, ई-कॉमर्स वितरण और बंदरगाहों से जुड़ी आपूर्ति शृंखला को लाभ मिल सकता है। सड़क मार्ग से होने वाली माल ढुलाई के कुछ हिस्से को रेल नेटवर्क पर स्थानांतरित करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव माल के प्रकार और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, न्यू दादरी स्टेशन केवल मालगाड़ियों के ठहराव या इंटरचेंज का केंद्र नहीं, बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और बंदरगाहों को जोड़ने वाले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभर रहा है। माल ढुलाई के समय, पार्सल परिवहन और औद्योगिक कनेक्टिविटी से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि के साथ यह स्टेशन आने वाले समय में एनसीआर की लॉजिस्टिक्स क्षमता के लिए और महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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