दिल्ली-एनसीआर के चार प्रमुख शहरों को जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना पर बढ़ी हलचल, फरीदाबाद में अधिकारियों ने किया रूट का निरीक्षण; बिजली की हाईटेंशन लाइनें और पेयजल पाइपलाइन हटाने पर होगा करीब 6 करोड़ रुपये खर्च

नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, रफ़्तार टूडे। दिल्ली-एनसीआर में क्षेत्रीय सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा-ग्रेटर नोएडा नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य एनसीआर के चार प्रमुख शहरी और व्यावसायिक केंद्रों को तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है। इससे नौकरी, कारोबार और शिक्षा के सिलसिले में रोजाना एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले यात्रियों को भविष्य में बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

परियोजना की तैयारियों के तहत फरीदाबाद में प्रस्तावित रूट का तकनीकी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बिजली की हाईटेंशन लाइनें, बिजली टावर, सब स्टेशन और पेयजल पाइपलाइन जैसी संभावित बाधाओं का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने इन ढांचों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की जरूरत पर चर्चा की, ताकि कॉरिडोर के निर्माण के दौरान तकनीकी अड़चनें कम की जा सकें। हालांकि, परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने, निर्माण शुरू होने और ट्रेन संचालन की समयसीमा को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित कॉरिडोर के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

फरीदाबाद में प्रस्तावित रूट का निरीक्षण

प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर को लेकर अधिकारियों की संयुक्त टीम ने गुरुग्राम मोड़ से सैनिक कॉलोनी, बाटा चौक और ग्रेटर फरीदाबाद की दिशा में रूट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन स्थानों की पहचान की गई, जहां मौजूदा बिजली और जलापूर्ति से जुड़े ढांचे प्रस्तावित निर्माण में बाधा बन सकते हैं। निरीक्षण में RRTS के डिप्टी चीफ इंजीनियर प्रदीप यादव, परियोजना से जुड़े कंसल्टेंट, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के एसडीओ और जूनियर इंजीनियर तथा फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (FMDA) के कार्यकारी अभियंता केएस पठानिया शामिल रहे।

निरीक्षण के दौरान सामने आई तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय की जरूरत पर जोर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिजली लाइनों, टावरों और पेयजल पाइपलाइन को स्थानांतरित करने पर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

तीन स्थानों पर 66 केवी बिजली लाइनें बन रहीं बाधा

प्रस्तावित रूट पर तीन स्थानों पर 66 केवी की बिजली लाइनें निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती हैं। कॉरिडोर के लिए इन लाइनों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के साथ संबंधित बिजली टावरों को भी शिफ्ट करना होगा। इसके अलावा सेक्टर-28 और सेक्टर-29 के आसपास प्रस्तावित रूट में आ रही पेयजल पाइपलाइन को स्थानांतरित करने की आवश्यकता बताई गई है। इन बदलावों का उद्देश्य निर्माण के लिए आवश्यक जगह उपलब्ध कराना और मौजूदा बिजली तथा जलापूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाना है। संबंधित विभागों के बीच समन्वय और तकनीकी मंजूरी इस प्रक्रिया के अहम हिस्से होंगे।

टीम ने गुरुग्राम मोड़ पर प्रस्तावित एलिवेटेड फ्लाईओवर का भी निरीक्षण किया। यहां नमो भारत कॉरिडोर और ईस्ट-वेस्ट परियोजना के बीच संभावित जुड़ाव तथा निर्माण से संबंधित तकनीकी पहलुओं की जांच की गई।

64 किलोमीटर लंबा होगा प्रस्तावित कॉरिडोर

उपलब्ध परियोजना विवरण के मुताबिक, गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा-ग्रेटर नोएडा नमो भारत कॉरिडोर की प्रस्तावित लंबाई लगभग 64 किलोमीटर है। इसका मकसद एनसीआर के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा को अधिक तेज, सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है। प्रस्तावित योजना में सात नमो भारत स्टेशन और 15 मेट्रो स्टेशन शामिल होने की बात कही गई है। फरीदाबाद में लगभग 16 किलोमीटर लंबे हिस्से की योजना है। इस हिस्से में सैनिक कॉलोनी, एनआईटी, बाटा चौक और सेक्टर-87/88 चौक प्रमुख स्टेशन के रूप में बताए गए हैं।

परियोजना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव के अनुसार, नमो भारत और स्थानीय मेट्रो सेवाओं को एक साझा बुनियादी ढांचे पर संचालित करने की योजना है। यदि इसे स्वीकृति और क्रियान्वयन के दौरान इसी स्वरूप में विकसित किया जाता है, तो यात्रियों को क्षेत्रीय यात्रा के साथ शहर के भीतर आवागमन के लिए भी बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, स्टेशन की अंतिम सूची, कॉरिडोर का सटीक अलाइनमेंट, इंटरचेंज की व्यवस्था और ट्रेन संचालन का स्वरूप आधिकारिक रूप से स्वीकृत योजना से ही स्पष्ट होगा।

अगले सप्ताह की बैठक पर टिकी नजरें

परियोजना को लेकर हरियाणा और केंद्र सरकार के स्तर पर मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले सप्ताह मंत्रालय में होने वाली बैठक में प्रस्ताव से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। फिलहाल परियोजना की अंतिम मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति और निर्माण की समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। रूट का निरीक्षण और तकनीकी बाधाओं की पहचान परियोजना की तैयारी के महत्वपूर्ण चरण हैं, लेकिन इनके आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि निर्माण कार्य तत्काल शुरू हो जाएगा।

अंतिम निर्णय के बाद ही कॉरिडोर की लागत, निर्माण कार्यक्रम, स्टेशन की स्थिति और संचालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।

नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम के यात्रियों को क्या होगा फायदा?

प्रस्तावित कॉरिडोर का सबसे बड़ा संभावित लाभ एनसीआर के अलग-अलग शहरों के बीच सीधा और बेहतर सार्वजनिक परिवहन संपर्क होगा। अभी नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम के बीच यात्रा करने वाले लोगों को अपने गंतव्य के अनुसार सड़क मार्ग या विभिन्न परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क विकसित होने से भविष्य में इन शहरों के बीच सफर अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इस कॉरिडोर से उन कर्मचारियों, विद्यार्थियों और कारोबारियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें नियमित रूप से एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता है। नमो भारत और मेट्रो सेवाओं के बीच प्रभावी तालमेल होने पर यात्रियों को लंबी दूरी और स्थानीय आवागमन के लिए बेहतर विकल्प मिल सकते हैं।

सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ने से निजी वाहनों पर निर्भरता और सड़क यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय, किराया, संचालन की आवृत्ति और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं परियोजना के अंतिम डिजाइन और परिचालन योजना पर निर्भर करेंगी। फिलहाल सबसे अहम कदम परियोजना की अंतिम मंजूरी और तकनीकी बाधाओं को दूर करना है। मंजूरी मिलने और निर्माण की औपचारिक समयसीमा घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नोएडा से फरीदाबाद होते हुए गुरुग्राम तक नमो भारत सेवा को जमीन पर उतारने का काम कब शुरू होगा।