ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में 17 अक्टूबर तक चलेगा अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला; निर्यात बढ़ाने, नए बाजार तलाशने और युवा उद्यमियों को आगे लाने पर जोर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। भारत के हस्तशिल्प, होम डेकोर, लाइफस्टाइल और फैशन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित 62 वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 का ग्रेटर नोएडा में भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने 13 अक्टूबर को इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी मौजूद रहे। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की ओर से आयोजित यह मेला 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।

मेले में होम, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर और इंटीरियर उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। आयोजन में 17 समर्पित हॉलों में 3,000 से अधिक प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया है। इसके अतिरिक्त, इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में स्थित करीब 900 स्थायी शोरूम के माध्यम से भी खरीदारों को भारतीय उत्पादों की विविधता देखने और व्यावसायिक सौदे करने का अवसर मिल रहा है। पहले दिन अमेरिका और यूरोप जैसे भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों से बड़ी संख्या में खरीदार पहुंचे।

गिरिराज सिंह ने निर्यातकों से नए बाजार तलाशने का किया आह्वान

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने आईएचजीएफ दिल्ली मेले के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय महत्व की सराहना की। उन्होंने ईपीसीएच को भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक प्रमुख वैश्विक सोर्सिंग मंच विकसित करने और दुनियाभर के खरीदारों, डिजाइनरों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को जोड़ने के प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि यह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोजनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। मंत्री ने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को निर्यात बढ़ाने के लिए अपने काम का दायरा विस्तृत करना होगा। पारंपरिक बाजारों के साथ उभरते बाजारों में भी पहुंच बनानी होगी और विशेष उत्पाद श्रेणियों में भारत की पहचान मजबूत करनी होगी। उन्होंने ईपीसीएच और निर्यातकों से सामूहिक रूप से एक अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। मंत्री के अनुसार, युवा उद्यमियों को अनुभवी निर्यातकों से सीखने, उत्पाद डिजाइन में नवाचार करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की संभावनाओं का लाभ उठाने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने पहली बार निर्यात करने वालों की संख्या कम से कम 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।

क्राफ्ट क्लस्टर और जिला स्तर पर मैपिंग पर जोर

गिरिराज सिंह ने हस्तशिल्प क्षेत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मौजूदा क्राफ्ट क्लस्टरों के विकास और नए क्लस्टर तैयार करने की बात कही। उन्होंने हथकरघा, हस्तशिल्प और टेक्सटाइल क्षेत्र की क्षमताओं की जिलावार मैपिंग करने तथा उद्यमियों की मदद के लिए फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित करने की जरूरत बताई। उन्होंने वैश्विक गिफ्ट और डेकोर बाजार में भारतीय उत्पादों की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की पारंपरिक कलाएं, कुशल कारीगर और रचनात्मक डिजाइन क्षमता अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत को मजबूत स्थान दिला सकती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय हस्तशिल्प को घरेलू और विदेशी खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी उन्होंने जोर दिया।

लकड़ी के उत्पादों की ट्रेसबिलिटी के लिए ईयूडीआर एप्लिकेशन लॉन्च

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ईपीसीएच की ओर से विकसित ईयूडीआर अनुपालन एप्लिकेशन भी लॉन्च किया। इसका उद्देश्य लकड़ी और लकड़ी से बने उत्पादों की कानूनी सोर्सिंग तथा आपूर्ति श्रृंखला की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने में मदद करना है। इस एप्लिकेशन के माध्यम से लकड़ी की उत्पत्ति, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित जानकारी को ट्रैक करने में सहायता मिलेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ाने और जिम्मेदार व्यापार प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय और आपूर्ति-श्रृंखला संबंधी नियमों के अनुपालन की दृष्टि से भी यह पहल निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पबित्रा मार्गेरिटा ने पारंपरिक शिल्प के संरक्षण को बताया महत्वपूर्ण

समारोह में उपस्थित केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने आईएचजीएफ दिल्ली मेले की विकास यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक हॉल से शुरू होकर लगभग 3,000 प्रदर्शकों को एक मंच पर लाने वाला यह आयोजन भारतीय हस्तशिल्प उद्योग की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल व्यापार और आर्थिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही भारतीय शिल्प परंपराओं, कौशल और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने वैश्विक बाजारों तक भारतीय हस्तशिल्प पहुंचाने में प्रदर्शकों और निर्यातकों के योगदान की सराहना की।

प्रदर्शकों की लागत में कटौती से पंजीकरण में 22 प्रतिशत वृद्धि

ईपीसीएच के मुख्य संरक्षक और इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि मेले में भागीदारी बढ़ाने के लिए स्टॉल लगाने की न्यूनतम लागत 8,500 रुपये से घटाकर 2,500 रुपये की गई। उनके अनुसार, इस बदलाव के बाद पंजीकरण में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि लागत में बचत से प्रदर्शकों को अपने उत्पादों, डिस्प्ले डिजाइन और खरीदारों की मेजबानी पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिला है। उन्होंने एमएसएमई, ग्रामीण हस्तशिल्प और कारीगरों को भारतीय निर्यात व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। साथ ही, हस्तशिल्प क्षेत्र को प्रोत्साहन देने वाली पहलों की सराहना की।

ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक समृद्ध सोर्सिंग मंच है। प्रत्येक संस्करण नए व्यावसायिक अवसर पैदा करता है, खरीदारों के साथ संबंध मजबूत करता है और अधिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि परिषद ने हाल के महीनों में प्रमुख यूरोपीय मेलों में भाग लेकर विदेशी खरीदारों से संपर्क बढ़ाया है। ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि प्रदर्शकों ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की बदलती पसंद और बाजार के रुझानों के अनुरूप उत्पाद डिजाइन तथा विकास पर काम किया है। स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने भी डिजाइन आधारित और मूल्यवर्धित उत्पादों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

एआई, वैश्विक बाजार और निर्यात नियमों पर होंगे विशेष सत्र

मेले के दौरान निर्यातकों और उद्योग प्रतिनिधियों के लिए कई ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें 2027 के वैश्विक खरीदार रुझान, उत्पादन और सोर्सिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग, ऑनलाइन विजिबिलिटी, ईयूडीआर अनुपालन, यूरोपीय संघ के पैकेजिंग नियम, भारत के मुक्त व्यापार समझौते और निर्यात प्रोत्साहन मिशन जैसे विषय शामिल हैं। इन सत्रों का उद्देश्य निर्यातकों को बदलते वैश्विक व्यापार नियमों, नई तकनीकों और बाजार में प्रवेश के अवसरों की जानकारी देना है। आयोजन में विदेशी खरीदारों, बाइंग हाउस, खरीद एजेंटों, प्रमुख भारतीय खुदरा ब्रांडों और घरेलू थोक खरीदारों की भागीदारी से व्यापारिक संपर्कों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

33,168 करोड़ रुपये का रहा हस्तशिल्प निर्यात

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी लगभग 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। परिषद का उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करना और निर्यात के नए अवसर तैयार करना है। आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 इसी दिशा में भारतीय निर्माताओं, कारीगरों, डिजाइनरों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया है। पांच दिन तक चलने वाले इस आयोजन से नए व्यावसायिक समझौते, उत्पाद विकास और वैश्विक बाजारों में भारतीय हस्तशिल्प की पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।