बच्चू सिंह गुर्जर (बैंसला) रहे मुख्य अतिथि, आनंद भाटी के मार्गदर्शन में हो रहा आयोजन; 13 अक्टूबर को श्रीराम जन्म, 14 अक्टूबर को ताड़का वध और सीता स्वयंवर, 20 अक्टूबर को दशहरा महोत्सव

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में आयोजित भव्य श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव-2026 में दूसरे दिन भगवान नारद की मोह लीला, रावण दरबार और देवासुर संग्राम के प्रसंगों का मनमोहक मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत किया। मंचन देखने पहुंचे दर्शकों ने धार्मिक कथाओं का आनंद लिया।

11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहे इस महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बच्चू सिंह गुर्जर (बैंसला) शामिल हुए। परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन और संस्था के युवा अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन शाम 7 बजे से रामलीला मंचन निर्धारित है।

नारद मोह लीला में अहंकार और भगवान विष्णु की दिव्य लीला का मंचन

संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि दूसरे दिन की लीला में भगवान नारद की तपस्या, कामदेव के प्रयास और नारद मोह की कथा का मंचन किया गया। कथा के अनुसार, भगवान नारद तपस्या में लीन होते हैं। उनकी तपस्या भंग करने के लिए इंद्र स्वर्ग की अप्सराओं को भेजते हैं और कामदेव भी प्रयास करते हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाते। तपस्या भंग न होने पर नारद जी के मन में अहंकार उत्पन्न हो जाता है। उन्हें लगने लगता है कि उन्होंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर ली है। इसी अहंकार में वह ब्रह्मा जी और भगवान शिव के समक्ष भी अपनी उपलब्धि का वर्णन करते हैं। बाद में भगवान विष्णु के पास पहुंचकर अपनी विजय की चर्चा करते हैं।

भगवान विष्णु नारद जी को अहंकार से मुक्त करने के लिए एक दिव्य लीला रचते हैं। वह एक मायावी नगरी का निर्माण करते हैं, जहां एक सुंदर राजकुमारी के विवाह की तैयारियां चल रही होती हैं। राजकुमारी को देखकर नारद जी उस पर मोहित हो जाते हैं और भगवान विष्णु से उनके समान सुंदर स्वरूप प्रदान करने का अनुरोध करते हैं, ताकि राजकुमारी उन्हें अपना वर चुन सके। भगवान विष्णु उन्हें वानर का मुख प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर में नारद जी का उपहास होता है और उनका विवाह राजकुमारी से नहीं हो पाता। बाद में उन्हें अपनी वास्तविक स्थिति का पता चलता है और वह भगवान विष्णु से नाराज होकर उन्हें श्राप दे देते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि अहंकार व्यक्ति को भ्रमित कर सकता है और विनम्रता ही सच्चे ज्ञान का आधार है।

रावण दरबार और देवासुर संग्राम ने बांधा समां

रामलीला के दूसरे प्रमुख प्रसंग में रावण दरबार का मंचन किया गया। रावण तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने की योजना बनाता है और देवताओं को पराजित करने के लिए अपनी सेना को युद्ध की तैयारी करने का आदेश देता है। इसके बाद देवताओं और राक्षसों के बीच भीषण देवासुर संग्राम का दृश्य प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने युद्ध के दृश्यों, संवादों और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों के सामने पौराणिक कथा को प्रभावशाली ढंग से रखा। दोनों प्रसंगों को देखने के लिए मौजूद दर्शकों ने मंचन का आनंद लिया।

रामलीला में आगे इन प्रसंगों का होगा मंचन

आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को क्रमवार प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम के अनुसार:

  • 13 अक्टूबर: श्रीराम जन्म, सीता जन्म, बाल लीला और विद्या अभ्यास।
  • 14 अक्टूबर: ताड़का वध, सीता स्वयंवर और राम बारात।
  • 15 अक्टूबर: कैकेयी-मंथरा संवाद, राम वनवास और चित्रकूट।
  • 16 अक्टूबर: ऋषि मिलन, पंचवटी, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और जटायु वध।
  • 17 अक्टूबर: राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा, बाली वध और अशोक वाटिका।
  • 18 अक्टूबर: लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद।
  • 19 अक्टूबर: लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा राम-कुंभकर्ण और रावण युद्ध। 20 अक्टूबर को दशहरा महोत्सव के अंतर्गत रावण दहन के साथ आयोजन का समापन होगा।

संस्कार और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

आयोजकों का कहना है कि श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और रामायण के आदर्शों से जोड़ना भी है। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और धर्म की रक्षा का संदेश दिया जा रहा है। कमेटी के अनुसार, इस वर्ष का रामलीला मंचन और दशहरा महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए यादगार आयोजन बनाने की दिशा में तैयारियां की गई हैं। आयोजकों को उम्मीद है कि आगामी दिनों में होने वाले प्रमुख प्रसंगों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचेंगे।

संस्था के पदाधिकारी और सदस्य रहे उपस्थित

इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैन पाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष फिरे प्रधान, पी.पी. शर्मा, श्याम सुंदर फौजी, यशपाल नागर, सचिव ज्योति सिंह, गीता सागर, राकेश भाटी, भगवत भाटी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, पवन भाटी, वीरपाल मावी और जय शर्मा सहित संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।