श्री धार्मिक रामलीला में बाल लीला, विद्या अभ्यास और ताड़का वध का भव्य मंचन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा परिसर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में आयोजित भव्य श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 में भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं, विद्या अभ्यास और ताड़का वध का मनोहारी मंचन किया गया। रामलीला के चौथे दिन प्रस्तुत की गई लीलाओं ने दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से पूरा रामलीला परिसर गूंज उठा। मंचन देखने पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की लीलाओं का आनंद लिया और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।

श्री धार्मिक रामलीला का आयोजन 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे किया जा रहा है। परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के युवा अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में आयोजित यह रामलीला धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और संस्कारों का संदेश दे रही है।

गुरु वशिष्ठ के आश्रम में चारों भाइयों का विद्या अभ्यास

संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि रामलीला के चौथे दिन अयोध्या के राजमहल में भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम अपने चारों भाइयों के साथ बाल लीलाओं के माध्यम से माता कौशल्या सहित सभी माताओं, महाराज दशरथ और अयोध्या की प्रजा को आनंद प्रदान करते हैं। इसके बाद चारों राजकुमारों के गुरु वशिष्ठ के आश्रम में विद्या अभ्यास के लिए जाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम समस्त विद्याओं के अधिपति होने के बावजूद मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मानव जीवन के आदर्शों को स्थापित करने के लिए गुरु के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण करते हैं। गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन और ज्ञान की महत्ता को दर्शाने वाले इस प्रसंग ने दर्शकों को महत्वपूर्ण संदेश दिया। विद्या अभ्यास पूरा करने के बाद चारों भाइयों के अयोध्या लौटने पर राजमहल और पूरी नगरी में खुशी का माहौल छा जाता है।

महर्षि विश्वामित्र का आगमन, श्रीराम-लक्ष्मण के साथ आश्रम पहुंचे

रामलीला में इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन का प्रसंग दिखाया गया। महर्षि विश्वामित्र महाराज दशरथ से अपने यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का आग्रह करते हैं। महाराज दशरथ अपने प्रिय पुत्रों को अपने से दूर भेजने को लेकर व्यथित हो जाते हैं और स्वयं उनके साथ जाने की बात कहते हैं। हालांकि, महर्षि विश्वामित्र उन्हें समझाते हैं कि यज्ञ की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए श्रीराम और लक्ष्मण का उनके साथ जाना आवश्यक है। अंततः दोनों राजकुमार महर्षि विश्वामित्र के साथ आश्रम के लिए प्रस्थान करते हैं।

आश्रम पहुंचने पर राक्षसों द्वारा यज्ञ में बाधा डालने का प्रसंग दिखाया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम और ताड़का के बीच हुए भीषण युद्ध तथा ताड़का वध का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा ताड़का का अंत किए जाने के साथ ही ऋषि-मुनियों के लिए निर्भय होकर यज्ञ, हवन और पूजा-पाठ करने का मार्ग प्रशस्त होता है।

इस प्रसंग के माध्यम से धर्म की रक्षा, साहस और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संदेश दिया गया।

अहिल्या उद्धार से लेकर माता सीता के प्रथम दर्शन तक का मनोहारी मंचन

रामलीला के अगले प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र को मिथिला के राजा जनक की ओर से सीता स्वयंवर का आमंत्रण प्राप्त होता है। इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ जनकपुर के लिए प्रस्थान करते हैं। मार्ग में भगवान श्रीराम द्वारा महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या के उद्धार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र दोनों राजकुमारों के साथ जनकपुर पहुंचते हैं और वहां अपना आश्रम स्थापित करते हैं।

महर्षि विश्वामित्र की पूजा के लिए पुष्प लेने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण वाटिका की ओर जाते हैं। इसी दौरान भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम दर्शन का मनोहारी प्रसंग मंचित किया गया। धार्मिक मान्यताओं में माता सीता को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। भगवान श्रीराम और माता सीता के इस प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम और जय सियाराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ रामलीला का आनंद लिया।

15 से 19 अक्टूबर तक होंगे रामलीला के प्रमुख आकर्षण

श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में आगामी दिनों में रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, 15 अक्टूबर को सीता स्वयंवर, राम बारात, कैकेयी-मंथरा संवाद, राम वनवास और चित्रकूट के प्रसंग प्रमुख आकर्षण होंगे। 16 अक्टूबर को ऋषि मिलन, पंचवटी, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और जटायु वध का मंचन किया जाएगा। 17 अक्टूबर को राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा, बाली वध और अशोक वाटिका से जुड़े प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।

18 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण तथा रावण-अंगद संवाद का मंचन होगा। वहीं, 19 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और भगवान श्रीराम तथा कुंभकर्ण-रावण युद्ध के प्रसंग दर्शकों के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि इस वर्ष का दशहरा महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और पारिवारिक सहभागिता का विशेष अवसर बनेगा। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा, कर्तव्य और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

गणमान्य लोगों और संस्था के पदाधिकारियों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रदेश मंत्री महामेधा नागर, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय सचिव पंकज रौसा और मनोज गुप्ता का उल्लेख किया गया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी और हरवीर मावी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता और सतीश भाटी भी आयोजन से जुड़े रहे। संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैन पाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी और मनीष डाबर की उपस्थिति रही।

मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष फिरे प्रधान, पी.पी. शर्मा, श्याम सुंदर फौजी, यशपाल नागर, सचिव ज्योति सिंह, गीता शागर, राकेश भाटी, भगवत भाटी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, पवन भाटी, वीरपाल मावी और जय शर्मा सहित संस्था के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव के माध्यम से ग्रेटर नोएडा में धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक परंपराओं का माहौल बना हुआ है। आने वाले दिनों में सीता स्वयंवर से लेकर रावण वध तक के प्रसंगों को देखने के लिए क्षेत्रवासियों में उत्साह बना रहने की उम्मीद है।