ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक मूर्ति चौक के पास इकोटेक-12 स्थित रामलीला मैदान में प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित भव्य रामलीला के पांचवें दिन भक्ति, भावुकता, भाईचारे और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में कलाकारों ने दशरथ मरण, भरत मिलाप, केवट संवाद, स्वरूपनखा प्रसंग और खर-दूषण वध सहित विभिन्न लीलाओं का जीवंत मंचन किया। मार्मिक दृश्यों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं, वहीं भगवान श्रीराम के पराक्रम से जुड़े प्रसंगों ने पूरे रामलीला मैदान को जय श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान कर दिया।
पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने का मार्मिक दृश्य
पांचवें दिन की लीला का शुभारंभ महाराज दशरथ के मरण के अत्यंत भावुक प्रसंग से हुआ। वनवास गए प्रभु श्रीराम की याद में व्याकुल महाराज दशरथ के मुख से बार-बार राम-राम का उच्चारण और पुत्र वियोग में उनके प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मंचन इतना प्रभावशाली रहा कि पंडाल में मौजूद अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इस प्रसंग ने माता-पिता और संतान के बीच प्रेम तथा पारिवारिक रिश्तों की गहराई को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
भरत मिलाप ने पेश की त्याग और भाई-प्रेम की मिसाल
इसके बाद भरत मिलाप की लीला का मंचन किया गया। अपने बड़े भाई प्रभु श्रीराम को वन से वापस अयोध्या लाने के लिए भरत का व्याकुल होकर वन पहुंचना, उन्हें मनाने का प्रयास करना और राजगद्दी स्वीकार करने से इनकार करना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। भरत ने भगवान श्रीराम की खड़ाऊं लेकर उनके प्रतिनिधि के रूप में अयोध्या का राजपाट चलाने का संकल्प लिया। इस प्रसंग ने भाई-प्रेम, त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया। भरत मिलाप के भावुक दृश्य के दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

केवट संवाद ने भक्ति रस से सराबोर किया रामलीला मैदान
पांचवें दिन की रामलीला का सबसे मनमोहक और भक्तिमय आकर्षण प्रभु श्रीराम और केवट के बीच हुआ संवाद रहा। केवट द्वारा भगवान श्रीराम के चरण धोने की विनती और उन्हें गंगा पार कराने से पहले अपनी अनूठी शर्त रखने के प्रसंग ने दर्शकों का मन मोह लिया। केवट के संवाद और उसकी निश्छल भक्ति ने यह संदेश दिया कि सच्चे प्रेम और समर्पण के सामने सांसारिक भेदभाव का कोई महत्व नहीं है। प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को नाव से गंगा पार कराने के दृश्य का सुंदर मंचन किया गया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालु रामभक्ति में लीन नजर आए।
स्वरूपनखा प्रसंग और खर-दूषण वध ने बढ़ाया रोमांच
इसके बाद स्वरूपनखा के प्रणय प्रस्ताव और लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक काटने के प्रसंग का मंचन किया गया। इस घटना के बाद प्रतिशोध की भावना से खर-दूषण का अपनी विशाल राक्षसी सेना के साथ भगवान श्रीराम पर आक्रमण करने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। युद्ध के दौरान प्रभु श्रीराम द्वारा अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए खर-दूषण और उनकी सेना का संहार करने की लीला ने दर्शकों में खासा उत्साह भर दिया। प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रभाव और युद्ध दृश्यों के सजीव संयोजन ने मंचन को और प्रभावशाली बना दिया। विशेष रूप से बच्चों और युवा दर्शकों ने इन रोमांचकारी दृश्यों का भरपूर आनंद लिया।
अनुभवी कलाकारों ने किया सजीव मंचन, उमड़ी हजारों की भीड़
इस भव्य रामलीला का मंचन हरि भक्ति कला ट्रस्ट के अनुभवी कलाकारों द्वारा किया जा रहा है, जबकि निर्देशन की जिम्मेदारी श्री पंकज शर्मा संभाल रहे हैं। कलाकारों के संवाद, अभिनय और मंचीय प्रस्तुति ने रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में दर्शकों के सामने रखा। प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री दीपक यादव ने बताया कि रामलीला के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और दर्शकों की संख्या ने पिछले दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। शाम आठ बजे शुरू हुई रामलीला देर रात तक चली। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की विभिन्न सोसाइटियों से बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों के साथ रामलीला देखने पहुंचे। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आदर्शों, मर्यादा, त्याग और पारिवारिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में भी रामलीला मैदान पहुंचकर भगवान श्रीराम की दिव्य लीलाओं का आनंद लेने और इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की।
आयोजक: प्रभु श्री रामलीला सेवा ट्रस्ट
स्थान: रामलीला मैदान, इकोटेक-12, एक मूर्ति चौक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट।

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