करीब 250 बीघा जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का दावा; प्राधिकरण की कथित कार्रवाई वापस लिए जाने के आरोप से बढ़ी चर्चा, आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्ष के जवाब का इंतजार

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में कथित अवैध कॉलोनियों और कृषि भूमि पर प्लॉटिंग का मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तिलपता गांव और गुलिस्तानपुर के आसपास बड़े पैमाने पर जमीन पर प्लॉट काटे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस मामले में डिफेंस एलिट एंक्लेव के मालिक से जुड़े दावे भी सामने आए हैं। आरोप है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पहले संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की थी और एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन बाद में कार्रवाई वापस लिए जाने की बात कही जा रही है।

हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्राधिकरण के आदेश, एफआईआर की प्रति, जमीन के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में सवाल यह है कि यदि संबंधित क्षेत्रों में बिना जरूरी अनुमति के प्लॉटिंग की जा रही है, तो इसकी निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किस स्तर पर निभाई जा रही है?

तिलपता और गुलिस्तानपुर में करीब 250 बीघा जमीन पर प्लॉटिंग का दावा

मिली जानकारी के अनुसार, तिलपता गांव और गुलिस्तानपुर के आसपास करीब 250 बीघा जमीन पर कथित रूप से अवैध कॉलोनियां विकसित किए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोपों के मुताबिक, इन क्षेत्रों में जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर बेचे जाने की गतिविधियां हो रही हैं। यदि इन आरोपों में तथ्य हैं, तो यह जांच का विषय है कि संबंधित जमीन का निर्धारित भू-उपयोग क्या है, कॉलोनी विकसित करने के लिए आवश्यक स्वीकृतियां ली गई हैं या नहीं और भूखंडों की बिक्री किस आधार पर की जा रही है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित जमीन पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अथवा अन्य सक्षम विभागों के नियम लागू होते हैं या नहीं और इस संबंध में पहले कोई नोटिस अथवा कार्रवाई की गई है या नहीं।

अवैध प्लॉटिंग के मामलों में सबसे अधिक जोखिम उन लोगों को उठाना पड़ सकता है, जो अपनी जीवनभर की बचत लगाकर जमीन खरीदते हैं। यदि भूखंडों का लेआउट स्वीकृत नहीं है या जमीन का उपयोग नियमानुसार नहीं किया जा सकता, तो खरीदारों को भविष्य में निर्माण, रजिस्ट्री और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है।

डिफेंस एलिट एंक्लेव के मालिक पर कार्रवाई और FIR का दावा

इस पूरे मामले में डिफेंस एलिट एंक्लेव के मालिक को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पहले उनके खिलाफ भू-माफिया से संबंधित कार्रवाई की थी और बाद में उस कार्रवाई को वापस ले लिया गया। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात भी कही जा रही है। लेकिन इस दावे की पुष्टि के लिए यह जानना आवश्यक है कि प्राधिकरण ने किस आधार पर कार्रवाई की थी, कार्रवाई किस आदेश के तहत वापस ली गई और एफआईआर में किन आरोपों का उल्लेख है। केवल आरोपों या मौखिक दावों के आधार पर किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

यदि कार्रवाई वापस लिए जाने का दावा सही है, तो संबंधित आदेश का आधार और परिस्थितियां सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना जरूरी है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कार्रवाई प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत वापस ली गई थी या मामले में कोई अन्य निर्णय हुआ था।

इंद्रापुरम की कथित कॉलोनी में हिस्सेदारी का आरोप

आरोपों में यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति की इंद्रापुरम क्षेत्र की एक कथित अवैध कॉलोनी में हिस्सेदारी है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में जमीन के स्वामित्व, साझेदारी अथवा अन्य संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि अभी आवश्यक है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित जमीन किसके नाम दर्ज है, कॉलोनी विकसित करने में किन लोगों की भूमिका है और क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकरण से जरूरी अनुमति प्राप्त की गई है। दस्तावेजों के आधार पर ही किसी व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर निगाहें

ग्रेटर नोएडा और आसपास के तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री के बीच नियोजन नियमों का पालन और आम खरीदारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे मामलों में प्राधिकरण की निगरानी, समय पर जांच और कार्रवाई की स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है। इस प्रकरण में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से यह स्पष्ट किए जाने की अपेक्षा है कि तिलपता और गुलिस्तानपुर के आसपास कथित प्लॉटिंग के संबंध में पहले कोई जांच या कार्रवाई हुई है या नहीं। यदि कार्रवाई की गई थी, तो उसका वर्तमान स्टेटस क्या है? इसी तरह, डिफेंस एलिट एंक्लेव के मालिक के खिलाफ कार्रवाई वापस लिए जाने और एफआईआर दर्ज होने संबंधी दावों पर भी आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

फिलहाल, करीब 250 बीघा जमीन पर कथित अवैध कॉलोनियों, डिफेंस एलिट एंक्लेव के मालिक के खिलाफ कार्रवाई और इंद्रापुरम की कॉलोनी में कथित हिस्सेदारी से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित प्राधिकरण और व्यक्ति का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

रफ़्तार टूडे के जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ACEO सुमित यादव और सीनियर मैनेजर राजेश नीम को फोन लगाया तो उनका जानकारी नहीं है कल सुबह हमारा स्टाफ गुलिस्तांपुर पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कारवाही होगी। रफ़्तार टूडे का पक्ष: इस खबर में उल्लिहैखित आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। संबंधित व्यक्ति और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का पक्ष प्राप्त का लिया गया है तथा खबर में उचित स्थान दिया गया है।