गौतमबुद्ध नगर, रफ़्तार टूडे। भाजपा युवा मोर्चा में संगठनात्मक दायित्व को लेकर गौतमबुद्ध नगर में राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावित दावेदारों की उम्र को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि यदि युवा मोर्चा के संगठनात्मक दायित्व के लिए 35 वर्ष से कम उम्र का मानदंड लागू है, तो उससे अधिक उम्र वाले नामों पर विचार किस आधार पर किया जा रहा है। इसी बीच एक संभावित दावेदार उमेश भाटी की उम्र को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 10 अक्टूबर 1987 दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह जन्मतिथि आधिकारिक और वर्तमान दस्तावेजों से सत्यापित होती है, तो अक्टूबर 2026 में उनकी उम्र 39 वर्ष से अधिक बैठती है। ऐसे में युवा मोर्चा के दायित्व से जुड़ी कथित आयु सीमा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, संबंधित व्यक्ति की वास्तविक उम्र और युवा मोर्चा के दायित्व के लिए लागू आधिकारिक आयु सीमा को लेकर पार्टी की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना अभी बाकी है। इसलिए इन दोनों पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक दस्तावेज और संगठन के नियमों की पुष्टि के बाद ही निकाला जा सकता है।
35 वर्ष की उम्र सीमा को लेकर सवाल
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि युवा मोर्चा के संगठनात्मक दायित्व के लिए सामान्य तौर पर 35 वर्ष से कम उम्र के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाती है। इसी कथित मानदंड को लेकर अब संभावित नामों की उम्र की चर्चा शुरू हो गई है। कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की उम्र निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उसे युवा मोर्चा की जिम्मेदारी दिए जाने पर संगठनात्मक मानदंड को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, अंतिम पात्रता पार्टी के आधिकारिक नियमों और संगठन द्वारा स्वीकार किए गए दस्तावेजों के आधार पर ही तय होगी।
1987 की जन्मतिथि वाले दस्तावेजों का दावा
सूत्रों के अनुसार, उमेश पार्टी की जन्मतिथि 10-10-1987 कुछ दस्तावेजों में दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। दावा है कि ऐसी जानकारी पैन कार्ड और आधार कार्ड से संबंधित दस्तावेजों में सामने आई है। इन दस्तावेजों की जानकारी के आधार पर उनकी उम्र 35 वर्ष से अधिक होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि संबंधित दस्तावेज वर्तमान में वैध हैं, किस प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए हैं और उनमें दर्ज जन्मतिथि आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खाती है।
रफ़्तार टूडे के पास कुछ दस्तावेज उपलब्ध होने का दावा किया गया है, जिनमें जन्मतिथि से संबंधित जानकारी होने की बात कही जा रही है। ऐसे दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि संबंधित सरकारी विभाग या अधिकृत रिकॉर्ड से कराना आवश्यक होगा।
आधार और पैन में छेड़छाड़ के दावे से नया विवाद
इस पूरे मामले में एक और गंभीर दावा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, चर्चा है कि आधार कार्ड और पैन कार्ड से संबंधित जानकारी में कथित तौर पर बदलाव या छेड़छाड़ की गई है और बदली हुई जन्मतिथि के आधार पर उम्र करीब 33 वर्ष दिखाई जा रही है। हालांकि, यह बेहद गंभीर आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। किसी सरकारी पहचान दस्तावेज में छेड़छाड़ का आरोप केवल दस्तावेजों की तुलना के आधार पर अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड, दस्तावेजों की सत्यता और आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी या कानूनी जांच जरूरी होगी।
इसलिए फिलहाल यह कहना अधिक उचित होगा कि एक ओर 1987 की जन्मतिथि वाले दस्तावेजों का दावा है, जबकि दूसरी ओर कम उम्र दर्शाने वाले कथित दस्तावेजों की चर्चा हो रही है। कम उम्र वाले दस्तावेज की प्रमाणिक प्रति या आधिकारिक पुष्टि सामने आने तक इसे केवल दावा माना जाना चाहिए।
आरटीओ रिकॉर्ड का भी किया जा रहा उल्लेख
सूत्रों की ओर से यह भी दावा किया गया है कि उम्र से संबंधित जानकारी के लिए आरटीओ कार्यालय से प्राप्त दस्तावेजों का भी उल्लेख किया जा रहा है। यदि आरटीओ के आधिकारिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि दर्ज है, तो वह भी संबंधित व्यक्ति की आयु की जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी भी सरकारी रिकॉर्ड को प्रकाशित करने से पहले उसकी प्रमाणिकता, जारी करने वाले विभाग और रिकॉर्ड की वैधता की पुष्टि करना जरूरी है। उपलब्ध दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अलग-अलग रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथियों में वास्तव में कोई अंतर है या नहीं।

गाजियाबाद के पैनल को लेकर भी चर्चा
इसी मामले के बीच भाजपा के गाजियाबाद पैनल को लेकर भी संगठन के अंदर चर्चा होने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कथित पैनल में 38 से 40 वर्ष के आसपास की उम्र वाले नाम शामिल होने की वजह से उस पर सवाल उठे थे। दावा यह भी किया जा रहा है कि कम उम्र वाले नामों के बजाय अधिक उम्र वाले नामों को शामिल किए जाने के कारण प्रदेश संगठन स्तर पर पैनल को वापस किए जाने की चर्चा है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर भी पोस्ट और दावे प्रसारित होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, प्रदेश संगठन द्वारा पैनल वापस किए जाने के कारण और पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे फिलहाल सूत्रों और सोशल मीडिया में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
40 वर्ष की उम्र को लेकर संगठन के भीतर सवाल
पूरे विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि यदि युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष या किसी संगठनात्मक दायित्व के लिए वास्तव में 35 वर्ष से कम उम्र का स्पष्ट नियम लागू है, तो 38 से 40 वर्ष की उम्र वाले संभावित नामों की पात्रता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दूसरी ओर, यदि पार्टी के वर्तमान नियमों में कोई अलग प्रावधान या आयु सीमा लागू है, तो उसी के आधार पर अंतिम निर्णय होगा। इसलिए संगठन की आधिकारिक गाइडलाइन इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकती है।
अब आधिकारिक दस्तावेजों और संगठन के फैसले पर नजर
गौतमबुद्ध नगर भाजपा युवा मोर्चा को लेकर चल रही इस चर्चा में फिलहाल दो बातें सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं—पहली, संबंधित व्यक्ति की आधिकारिक जन्मतिथि क्या है, और दूसरी, युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष पद के लिए पार्टी का वर्तमान आधिकारिक आयु मानदंड क्या है। उमेश पार्टी की जन्मतिथि 10 अक्टूबर 1987 होने के दावे के साथ कुछ दस्तावेजों का उल्लेख किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर करीब 33 वर्ष की उम्र दर्शाने वाले कथित दस्तावेजों की भी चर्चा है। लेकिन 33 वर्ष वाली जानकारी का प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में अंतिम स्थिति सरकारी रिकॉर्ड और भाजपा संगठन की आधिकारिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट हो सकेगी। जब तक संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि और पार्टी के आयु मानदंड की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक उम्र में हेरफेर या दस्तावेजों में छेड़छाड़ के आरोपों को आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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