श्रीराम मित्र मंडल की रामलीला के सातवें दिन खर-दूषण वध, सीता हरण, शबरी के बेर, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध का मंचन; भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर सहित कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सेक्टर-62 स्थित रामलीला मैदान में श्रीराम मित्र मंडल नोएडा रामलीला समिति की ओर से आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के सातवें दिन रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। शूर्पणखा के नाक-कान काटने, खर-दूषण वध, रावण द्वारा माता सीता के हरण, पक्षीराज जटायु के बलिदान और शबरी की अनन्य भक्ति के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके साथ ही भगवान श्रीराम और वानरराज सुग्रीव की मित्रता तथा बाली वध के प्रसंगों ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे और कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण की कथा का आनंद लिया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर उपस्थित रहे। उनके साथ समिति के उपमुख्य संरक्षक मनोज अग्रवाल, फोनरवा अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा, अग्रवाल मित्र मंडल के अध्यक्ष मूलचंद गुप्ता, मंगलमय परिवार नोएडा के संयोजक महेश गुप्ता तथा यूपी उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी पीयूष द्विवेदी, संजय जैन, अमित अग्रवाल और विपिन गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समिति के चेयरमैन उमाशंकर गर्ग, अध्यक्ष धर्मपाल गोयल और महासचिव डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा ने मुख्य अतिथियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए और अंगवस्त्र ओढ़ाकर उनका स्वागत किया।

शूर्पणखा के अपमान से भड़का रावण, खर-दूषण का हुआ वध

रामलीला मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में पर्णकुटी बनाकर निवास कर रहे हैं। इसी दौरान रावण की बहन शूर्पणखा वहां पहुंचती है और भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने पर वह क्रोधित होकर आक्रामक रूप धारण कर लेती है। इसके बाद लक्ष्मण उसके नाक-कान काट देते हैं। अपमानित शूर्पणखा अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंचती है और उन्हें पूरी घटना बताती है। खर-दूषण अपनी सेना लेकर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण से युद्ध करने पहुंचते हैं, लेकिन युद्ध में भगवान श्रीराम उनका वध कर देते हैं। शूर्पणखा इसके बाद विलाप करती हुई लंका पहुंचती है और रावण को पूरी घटना सुनाती है। खर-दूषण के वध की जानकारी मिलने पर रावण राम से बदला लेने की योजना बनाता है। वह मारीच की सहायता से माता सीता का हरण करने की साजिश रचता है।

स्वर्ण मृग के बहाने रावण ने किया माता सीता का हरण

रावण की योजना के अनुसार मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है। मृग को देखकर माता सीता भगवान श्रीराम से उसे लाने का आग्रह करती हैं। श्रीराम स्वर्ण मृग के पीछे जाते हैं और अंततः बाण चलाकर उसका वध कर देते हैं। मरते समय मारीच भगवान श्रीराम की आवाज में लक्ष्मण को पुकारता है। आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण को श्रीराम की सहायता के लिए भेजती हैं। इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण साधु का वेश धारण कर पंचवटी पहुंचता है और माता सीता का हरण कर लेता है। वह उन्हें पुष्पक विमान से लंका की ओर ले जाने लगता है। माता सीता की पुकार सुनकर पक्षीराज जटायु रावण का रास्ता रोकते हैं और उनसे युद्ध करते हैं। जटायु पूरी वीरता से मुकाबला करते हैं, लेकिन रावण उनके पंख काट देता है। यह दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे।

जटायु का बलिदान और शबरी की भक्ति ने जीता दर्शकों का दिल

माता सीता की खोज में पंचवटी लौटे भगवान श्रीराम और लक्ष्मण उन्हें वहां न पाकर व्याकुल हो उठते हैं। दोनों भाई वन में सीता की तलाश करते हुए आगे बढ़ते हैं। इसी दौरान उन्हें घायल अवस्था में पक्षीराज जटायु मिलते हैं। जटायु उन्हें रावण द्वारा माता सीता के हरण की जानकारी देते हैं और भगवान श्रीराम की गोद में प्राण त्याग देते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम शबरी के आश्रम पहुंचते हैं। शबरी अपने आराध्य प्रभु श्रीराम को प्रेमपूर्वक बेर अर्पित करती हैं। भगवान श्रीराम उनकी भक्ति और प्रेम को स्वीकार करते हैं। यह प्रसंग दर्शकों को भक्ति, समर्पण और प्रेम की महत्ता का संदेश देता है।

आगे की कथा में भगवान श्रीराम कबन्ध का उद्धार करते हैं। कबन्ध उन्हें वानरराज सुग्रीव से मित्रता करने का सुझाव देता है, जिससे माता सीता की खोज में सहायता मिल सके।

श्रीराम-सुग्रीव की मित्रता और बाली वध का मंचन

रामलीला के अगले प्रसंग में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत के निकट पहुंचते हैं, जहां सुग्रीव अपने वानर दल के साथ रहते हैं। दोनों भाइयों को देखकर सुग्रीव के मन में संदेह उत्पन्न होता है। उनके कहने पर हनुमान साधु का रूप धारण कर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण से मिलते हैं।

इसके बाद भगवान श्रीराम और सुग्रीव के बीच मित्रता स्थापित होती है। सुग्रीव अपने भाई बाली के अत्याचारों के बारे में बताते हैं और सहायता मांगते हैं। आगे सुग्रीव और बाली के बीच युद्ध होता है, जिसमें भगवान श्रीराम बाली का वध करते हैं। इन प्रसंगों के माध्यम से मित्रता, वचनबद्धता और धर्म के पक्ष में खड़े होने का संदेश प्रस्तुत किया गया।

18 अक्टूबर को सीता खोज और लंका दहन का होगा मंचन

समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतनारायण गोयल और बजरंगलाल गुप्ता ने बताया कि 18 अक्टूबर को होने वाले रामलीला मंचन में सीता खोज, सीता दर्शन, लंका दहन, विभीषण शरणागति और सेतु स्थापना सहित रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। उन्होंने दर्शकों से आगामी मंचन में भी पहुंचकर रामलीला का आनंद लेने की अपील की।

समिति के पदाधिकारी और शहर के गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार गर्ग, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र गर्ग, सलाहकार मनोज शर्मा, सह-कोषाध्यक्ष अनिल गोयल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतनारायण गोयल, चौधरी रविन्द्र सिंह, तरुणराज, पवन गोयल, मुकेश गोयल, बजरंग लाल गुप्ता, एसएम गुप्ता, अजीत चाहर, गौरव मेहरोत्रा, मुकेश अग्रवाल, अनंत वर्मा, मीडिया प्रभारी मुकेश गुप्ता, गिरिराज बहेड़िया, चक्रपाणि गोयल, राजेश माथुर, भानुप्रताप सिंह, मनीष गोयल, साहिल चौधरी, नवीन पोरवाल, दयाशंकर तिवारी, दिनेश मित्तल, अर्जुन अरोड़ा, बाबूराम शर्मा, आरके उप्रेती, रामकुमार शर्मा, बीके राय, मनीष चौहान, नरेंद्र आर्य और अर्जुन प्रजापति सहित समिति के सदस्य तथा शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्रीराम मित्र मंडल की रामलीला में प्रस्तुत इन प्रसंगों ने दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़ने के साथ सत्य, भक्ति, त्याग और धर्म के संदेश को भी सामने रखा।