जनता की आवाज बनने की बात कही, बोलीं- जिनकी आवाज दफ्तरों तक नहीं पहुंचती, उनके सवाल उठाऊंगी; IAS से इस्तीफे के बाद पहली बार स्पष्ट किया अपना अगला कदम

यूपी, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने आखिरकार अपनी नई पारी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए राजनीति में कदम रख रही हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वह डरेंगी नहीं, सवाल करेंगी और उन्हें बाहुबल नहीं, बल्कि लोगों का साथ चाहिए।

दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया और यह 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। इस्तीफा देते समय उन्होंने व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का उल्लेख किया था। इस्तीफे के बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। 27 सितंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर संकेत दिया था कि 29 सितंबर की सुबह 8:30 बजे वह बताएंगी कि आगे क्या करना है। उन्होंने संभावित विकल्पों में घर, विदेश में नौकरी, IAS पर किताब/कोचिंग और राजनीति का जिक्र किया था।

‘मुझे आवाज बनना है’

अपने वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा कि IAS से इस्तीफा देने के बाद लोगों के मन में उनके भविष्य को लेकर कई सवाल थे। उन्होंने कुछ समय तक जवाब नहीं दिया, क्योंकि वह अपने अगले कदम को लेकर खुद तैयारी कर रही थीं। अब उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राजनीति में जाएंगी। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी आवाज किसी सरकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और पहुंचने के बाद भी कई बार सुनी नहीं जाती। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के करीब आठ दशक के बाद भी आम लोगों से जुड़े कई सवाल बाकी हैं और वह उनका हिसाब मांगना चाहती हैं।

स्कूल की मांग करने वाली महिला का किया जिक्र

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल का एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार वह लहुरियादह की पहाड़ी पर पानी पहुंचाने के काम का निरीक्षण कर रही थीं। वहां एक महिला उनके पास आई। उन्हें लगा कि वह पेंशन, आवास या किसी अन्य सरकारी सुविधा की मांग करेगी, लेकिन महिला ने अपने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल की मांग रखी। दिव्या के अनुसार, उस समय महिला के घर में पानी की सुविधा भी नहीं थी, लेकिन उसने अपने व्यक्तिगत लाभ की बजाय गांव के बच्चों के लिए आगे की पढ़ाई की व्यवस्था की मांग की। उन्होंने नियमों की जांच कर स्कूल को मंजूरी दिलाई। हालांकि, उनके अनुसार तीन साल बाद भी स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो सका।

उन्होंने इसी अनुभव के माध्यम से सरकारी व्यवस्था में निर्णय लेने और उसके क्रियान्वयन के बीच के अंतर पर सवाल उठाया। उनके शब्दों में, यदि इरादा हो तो पहाड़ भी रास्ता दे सकता है, लेकिन इरादे के अभाव में एक फाइल ही पहाड़ बन जाती है।

भूमिहीन व्यक्ति और कब्जे का मामला भी बताया

पूर्व IAS ने राजस्व विभाग में अपने कार्यकाल का एक और अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक भूमिहीन व्यक्ति सरकारी जमीन के छोटे से टुकड़े का पट्टा मिलने के बावजूद उस जमीन पर कब्जा नहीं पा सका था। दिव्या के अनुसार, उन्होंने दस्तावेज और संबंधित रिपोर्ट देखी तो रिपोर्ट गलत पाई गई। संबंधित अधिकारी से बात करने पर रिपोर्ट में गलती स्वीकार की गई और उसे वापस कर कार्रवाई की गई। इसके बाद मामला जमीन पर कब्जा दिलाने का था। उन्होंने बताया कि कई बार प्रयास के बावजूद उन्हें यह जवाब मिला कि ‘ऊपर से मना किया गया है।’

इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह ‘ऊपर’ कौन है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे ऊपर जनता है और किसी नागरिक को अपने अधिकार के लिए लगातार भटकना नहीं चाहिए।

सड़क, पुल और हादसों को लेकर भी उठाए सवाल

दिव्या मित्तल ने अपने संबोधन में ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसे गांव हैं जहां आज भी सड़क नहीं है, नदी पर पुल नहीं है और बरसात के दौरान गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और व्यवस्था से जुड़े लोगों को यह जानकारी रहती है कि सड़क पर गड्ढा कहां है, संबंधित फाइल का नंबर क्या है और हादसों में कितनी मौतें हुई हैं। उनके अनुसार समस्या जानकारी की नहीं, बल्कि उस पर ध्यान देने की है।

उन्होंने सड़क हादसों और मौतों के संदर्भ में कहा कि जब किसी समस्या की जानकारी होने के बावजूद उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, तो हादसे का सवाल केवल दुर्घटना तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने ऐसे मामलों में जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।

‘डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी’

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो के अंत में साफ कहा कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी। उन्होंने कहा कि वह डरेंगी नहीं और सवाल करती रहेंगी। उन्होंने लोगों से उनका साथ देने की अपील भी की। दिव्या मित्तल का यह ऐलान उनके करीब 13 वर्ष लंबे प्रशासनिक करियर के बाद राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश का संकेत है। हालांकि, उन्होंने अपने वीडियो में किसी राजनीतिक दल, विधानसभा सीट या चुनाव की औपचारिक घोषणा नहीं की है। फिलहाल उनका घोषित फोकस जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और लोगों की आवाज बनने पर है।

इससे पहले उनके इस्तीफे को लेकर मीडिया रिपोर्टों में राजनीति समेत कई संभावनाओं पर चर्चा हुई थी, लेकिन 29 सितंबर के वीडियो से उन्होंने अपने अगले कदम के एक हिस्से को स्पष्ट कर दिया है।