गुनपुरा गांव में किसान की जगह दूसरे व्यक्ति को मुआवजा देने का मामला आया सामने, एडीएमएलए कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में; दोषी पाए जाने पर कर्मचारियों से होगी रकम की वसूली

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) में जमीन अधिग्रहण के मुआवजा वितरण को लेकर गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। शुरुआती जांच में एक किसान की जगह दूसरे व्यक्ति को मुआवजा दिए जाने और निर्धारित रकम से अधिक भुगतान किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्राधिकरण में हलचल मच गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए यमुना प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने ऐसे 25 मामलों की जांच के आदेश दिए हैं। इन मामलों में एडीएमएलए कार्यालय के कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जाएगी। सीईओ ने निर्देश दिए हैं कि जांच में यदि कर्मचारियों की मिलीभगत और अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार संबंधित कर्मचारियों से रकम की वसूली की जाएगी। फिलहाल जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गुनपुरा गांव के किसान को नहीं मिला मुआवजा, दूसरे व्यक्ति को भुगतान का आरोप

मुआवजा वितरण में गड़बड़ी का एक मामला गुनपुरा गांव से सामने आया है। जानकारी के अनुसार, गांव के एक किसान की जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन किसान को उसका मुआवजा नहीं मिला। वह लंबे समय से मुआवजे के लिए प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। किसान ने इस संबंध में प्राधिकरण और एडीएमएलए कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत की जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित किसान की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को मुआवजे की रकम दे दी गई। इसके साथ ही भुगतान की राशि भी अधिक होने की बात सामने आई। इस मामले ने जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के वितरण में अपनाई जा रही प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन पर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, मामले में किस स्तर पर चूक हुई और भुगतान किस आधार पर दूसरे व्यक्ति को किया गया, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

25 मामलों की जांच से खुल सकती हैं अनियमितताओं की परतें

गुनपुरा गांव का मामला सामने आने के बाद प्राधिकरण को मुआवजा वितरण से जुड़ी कुछ अन्य शिकायतें भी मिली थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सीईओ आरके सिंह ने कुल 25 मामलों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मुआवजे के भुगतान में कहीं गलत लाभार्थी का चयन, निर्धारित राशि से अधिक भुगतान या अन्य प्रक्रियागत अनियमितता तो नहीं हुई। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि संबंधित मामलों में कार्यालय स्तर पर किसी कर्मचारी की भूमिका रही है या नहीं।

इन 25 मामलों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गड़बड़ी कितने मामलों में हुई और वित्तीय अनियमितता की कुल राशि कितनी है। फिलहाल करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी वास्तविक राशि जांच के निष्कर्षों के बाद ही निर्धारित हो सकेगी।

दोषी कर्मचारियों से होगी रकम की वसूली

सीईओ आरके सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कर्मचारियों की मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो संबंधित कर्मचारियों से नियमानुसार रकम की वसूली की जाएगी। इस निर्देश के बाद मुआवजा वितरण से जुड़े मामलों में कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच में जिम्मेदारी तय होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाला मुआवजा किसानों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक अधिकार है। ऐसे में यदि किसी किसान की जगह दूसरे व्यक्ति को भुगतान किया गया है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। अब सभी की निगाहें 25 मामलों की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी किन परिस्थितियों में हुई, संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की क्या भूमिका रही और प्राधिकरण को हुए संभावित वित्तीय नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी।