ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शैक्षणिक, क्लिनिकल प्रशिक्षण, शोध और पेशेवर जिम्मेदारियों की दी गई जानकारी
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। आईटीएस डेंटल कॉलेज, ग्रेटर नोएडा में BDS एवं MDS 2026 बैच के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागत एवं उन्हें संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों से परिचित कराने के लिए मंगलवार को ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को दंत चिकित्सा शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिकता, क्लिनिकल दक्षता और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आईटीएस एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आरपी चड्ढा ने सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर आईटीएस एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्ष सोहिल चड्ढा, सचिव बीके अरोड़ा, निदेशक जनसंपर्क सुरेंद्र सूद, प्रधानाचार्य डॉ. ओमकार के. शेट्टी, नवप्रवेशी विद्यार्थी, उनके अभिभावक तथा विभिन्न विभागों के अध्यक्ष मौजूद रहे।
दंत चिकित्सा केवल डिग्री नहीं, मानव सेवा का क्षेत्र: प्रो. डॉ. सुनीता गुप्ता
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, नई दिल्ली की निदेशक-प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनीता गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दंत चिकित्सा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और मानव सेवा से जुड़ा एक जिम्मेदारीपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने विद्यार्थियों से मजबूत शैक्षणिक आधार विकसित करने के साथ-साथ क्लिनिकल कौशल को निरंतर बेहतर बनाने और दंत चिकित्सा के क्षेत्र में हो रही नई तकनीकी प्रगति तथा शोध से लगातार जुड़े रहने का आह्वान किया।
प्रो. डॉ. सुनीता गुप्ता ने कहा कि एक सफल चिकित्सक बनने के लिए केवल ज्ञान और तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है। चिकित्सक में संवेदनशीलता, अनुशासन, नैतिकता और मरीजों के प्रति सहानुभूति जैसे मानवीय गुण भी होने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने पेशे की गरिमा और सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अनुशासन और नैतिक चिकित्सा आचरण पर जोर
आईटीएस डेंटल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. ओमकार के. शेट्टी ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें अनुशासन, समर्पण और निरंतर परिश्रम को अपने जीवन का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को कॉलेज की एंटी-रैगिंग नीति, नैतिक चिकित्सा आचरण और पेशेवर जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही कॉलेज में उपलब्ध सुरक्षित एवं सहयोगी वातावरण, पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण और शोध के अवसरों से भी विद्यार्थियों को परिचित कराया गया।
डॉ. शेट्टी ने विद्यार्थियों से कहा कि चिकित्सा शिक्षा के दौरान प्राप्त ज्ञान और प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि भविष्य में एक जिम्मेदार और कुशल चिकित्सक के रूप में समाज की सेवा करने के लिए स्वयं को तैयार करना होना चाहिए।
अगले पांच वर्ष विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण: सोहिल चड्ढा
आईटीएस एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्ष सोहिल चड्ढा ने कहा कि ओरिएंटेशन कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए केवल औपचारिक शुरुआत नहीं है, बल्कि उनके जीवन की एक नई और महत्वपूर्ण यात्रा का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्ष विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इस दौरान विद्यार्थी जो ज्ञान, क्लिनिकल कौशल और मूल्य अर्जित करेंगे, वही उनके भविष्य की पेशेवर पहचान को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एक सफल चिकित्सक बनने के साथ-साथ समाज की सेवा करने की भावना भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का हिस्सा होनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक वातावरण से परिचित कराने के साथ उन्हें दंत चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करना रहा।

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