17 हॉल और 900 स्थायी शोरूम बनेंगे वैश्विक कारोबार का केंद्र; होम डेकोर, फर्नीचर, फैशन, टेक्सटाइल और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मिलेगी व्यापक रेंज
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। भारतीय हस्तशिल्प, डिजाइन और लाइफस्टाइल उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए 62वां आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 मंगलवार, 13 अक्टूबर से इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में शुरू होगा। 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में लगभग 100 देशों के खरीदारों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन में 3,000 से अधिक प्रदर्शक 17 हॉल और 900 स्थायी शोरूमों के माध्यम से अपने उत्पादों और नई डिजाइन श्रृंखलाओं को प्रदर्शित करेंगे।
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) द्वारा आयोजित यह मेला भारतीय निर्माताओं, निर्यातकों, डिजाइनरों और कारीगरों के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। मेले का उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प और डिजाइन आधारित उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना, नए कारोबारी संबंध विकसित करना और निर्यात की संभावनाओं को मजबूत करना है।
16 प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में दिखेगी भारतीय शिल्प और डिजाइन की विविधता
आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 में होम, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर और इंटीरियर से जुड़े उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जाएगी। 16 प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में होम डेकोर, होम फर्निशिंग, कालीन एवं रग, टेक्सटाइल एवं लिनन, गिफ्ट्स एवं प्रीमियम उत्पाद, फर्नीचर, फैशन ज्वेलरी, बैग एवं एक्सेसरीज, लैंप एवं लाइटिंग, आउटडोर एवं गार्डन, अरोमा एवं स्पा उत्पाद, क्रिसमस एवं फेस्टिव डेकोर, किचन एवं डिनरवेयर, बाथरूम एक्सेसरीज, बांस एवं केन उत्पाद, कागज से बने सामान, पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तथा खिलौने शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शकों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की बदलती मांग, नए लाइफस्टाइल ट्रेंड और आगामी खरीद सीजन को ध्यान में रखते हुए अपने संग्रह तैयार किए हैं। इससे विदेशी खरीदारों को तैयार उत्पादों के साथ-साथ अपने बाजार की जरूरतों के अनुसार अनुकूलित उत्पादों की सोर्सिंग का अवसर भी मिलेगा।
वैश्विक खरीदारों और भारतीय निर्यातकों के बीच बढ़ेगा कारोबारी संपर्क
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि पिछले तीन दशकों में आईएचजीएफ दिल्ली फेयर वैश्विक खरीदारों और भारतीय निर्यातकों के बीच एक विश्वसनीय सोर्सिंग मंच के रूप में स्थापित हुआ है। इस संस्करण में भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों के बीच सार्थक व्यापारिक नेटवर्किंग तथा कारोबारी साझेदारी विकसित होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच महत्वपूर्ण है। भारत के विभिन्न देशों और व्यापार समूहों के साथ हुए व्यापार समझौतों से निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं हैं। परिषद को यूरोपीय बाजारों सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों से खरीदारों की अच्छी भागीदारी की उम्मीद है।
ईपीसीएच के मुख्य संरक्षक और इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि वर्ष 1994 में शुरुआत के बाद से यह मेला भारतीय शिल्प कौशल, डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को वैश्विक बाजार के सामने प्रस्तुत करता रहा है। इसके माध्यम से निर्माताओं, निर्यातकों और कारीगरों को व्यापार के नए अवसर मिले हैं। ऑटम 2026 संस्करण भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं को सहयोग तथा कारोबार विस्तार के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा।

ट्रेंड बूथ और यंग डिजाइनर्स कलेक्टिव होंगे खास आकर्षण
मेले में केवल उत्पादों की प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि डिजाइन, नवाचार और क्षेत्रीय शिल्प को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता के मुताबिक, आयोजन में प्रमुख हस्तशिल्प क्लस्टरों के डेकोर, उपयोगी वस्तुओं और फर्निशिंग उत्पादों के संग्रह प्रदर्शित होंगे। पूर्वोत्तर भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों के कारीगरों की भागीदारी से क्षेत्रीय शिल्प परंपराओं को भी अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा। मेले में ट्रेंड बूथ, चयनित हैंडलूम बुनकरों और हस्तशिल्प उद्यमियों के विशेष संग्रह तथा यंग डिजाइनर्स कलेक्टिव भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यंग डिजाइनर्स कलेक्टिव के माध्यम से प्रमुख डिजाइन संस्थानों से जुड़े और अपने क्षेत्रों में पहचान बना चुके डिजाइनरों को अपने विचारों तथा नए उत्पादों को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
एआई, वैश्विक ट्रेंड और यूरोपीय नियमों पर होंगे ज्ञान सत्र
वैश्विक कारोबार में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच निर्यातकों को नई तकनीक, बाजार के रुझानों और अंतरराष्ट्रीय नियमों की जानकारी देने के लिए विभिन्न ज्ञान सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें वर्ष 2027 के होम, लाइफस्टाइल, फैशन और इंटीरियर ट्रेंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में उत्पादन एवं सोर्सिंग, ऑनलाइन दृश्यता से सत्यापित वैश्विक ऑर्डर हासिल करने, यूरोपीय संघ के वनों की कटाई संबंधी विनियमन (ईयूडीआर) और पैकेजिंग एवं पैकेजिंग वेस्ट रेगुलेशन (पीपीडब्ल्यूआर) जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों, नए बाजारों तक पहुंच, सप्लाई चेन और हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए वित्तीय एवं बाजार सहायता पर भी चर्चा होगी। शिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मेले के अनुभव को और समृद्ध बनाएंगी।

अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और एशिया से आएंगे खरीदार
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत के अनुसार, मेले में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इजराइल, इटली, जापान, मेक्सिको, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, पोलैंड, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका सहित लगभग 100 देशों के खरीदारों के आने की उम्मीद है। आयोजकों के मुताबिक, विदेशी खरीदारों में थोक विक्रेता, वितरक, डिपार्टमेंटल स्टोर, रिटेल चेन, ब्रांड प्रतिनिधि, डिजाइनर, बाइंग हाउस और ट्रेंड विशेषज्ञ शामिल होंगे। अमेरिकी बाजार से टारगेट, टीजेएक्स कंपनियों, होमगुड्स और वॉलमार्ट ग्लोबल सोर्सिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों के आने की पुष्टि का उल्लेख भी आयोजन की जानकारी में किया गया है।
घरेलू बाजार से आदित्य बिड़ला फैशन, आर्चीज़, फैबइंडिया, लाइफस्टाइल इंटरनेशनल, लुलु ग्रुप, मिनिसो, रिलायंस रिटेल, शॉपर्स स्टॉप और ट्रेंट लिमिटेड सहित कई प्रमुख रिटेल एवं ऑनलाइन ब्रांडों के प्रतिनिधियों के भी शामिल होने की उम्मीद है।
निर्यात को नई गति देने की उम्मीद
ईपीसीएच के अनुसार, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर का लक्ष्य भारत को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए प्रमुख सोर्सिंग गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। मेले में प्रदर्शकों को अपनी उत्पादन क्षमता, उत्पाद गुणवत्ता, डिलीवरी समय और बाजार-विशिष्ट पेशकश प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि शुरुआती बातचीत को ठोस कारोबारी संभावनाओं और दीर्घकालिक साझेदारी में बदला जा सके। परिषद के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारतीय हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी लगभग 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। ऐसे में 62वें आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 से भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र को नए खरीदारों, बाजारों और निर्यात अवसरों से जोड़ने की उम्मीद है।

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