साइट-4 स्थित श्री रामलीला कमेटी में दूसरे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 15 अक्टूबर को 50 फीट के धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर का होगा विशेष मंचन
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के साइट-4 स्थित श्री रामलीला कमेटी की रामलीला में दूसरे दिन भगवान श्रीराम के जन्म, चारों राजकुमारों के नामकरण संस्कार, शिक्षा-दीक्षा और ऋषि विश्वामित्र के साथ वनगमन से जुड़ी लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। रामलीला के दृश्यों ने दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ते हुए धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन का संदेश दिया। अयोध्या में श्रीराम जन्म के प्रसंग के दौरान खुशी और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा नेता विजेंद्र भाटी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र ढाढ़ा और अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर अतिथियों ने भगवान श्रीराम के चरित्र और उनके आदर्शों का उल्लेख करते हुए लोगों से अपने जीवन में मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और सेवा की भावना अपनाने का आह्वान किया।
राजा जनक के हल चलाने से हुआ माता सीता का प्राकट्य
रामलीला के दूसरे दिन की शुरुआत रावण और वेदमती संवाद से हुई। इसके बाद मंचन में राजा जनक द्वारा हल चलाने के दौरान माता सीता के प्राकट्य का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस दृश्य के माध्यम से दर्शकों को माता सीता के जन्म की पौराणिक कथा से परिचित कराया गया। इसके बाद अयोध्या में गुरु वशिष्ठ द्वारा भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नामकरण संस्कार का मंचन हुआ। चारों राजकुमारों के बड़े होने और उनके शिक्षा-दीक्षा के लिए गुरु वशिष्ठ के आश्रम भेजे जाने के प्रसंग ने रामलीला को आगे बढ़ाया।
कमेटी के कोषाध्यक्ष मनोज गर्ग ने बताया कि रामलीला के इन प्रसंगों में भगवान श्रीराम के बाल्यकाल, पारिवारिक संस्कारों और गुरु-शिष्य परंपरा को दर्शाया गया। इन दृश्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति में शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों के महत्व को प्रस्तुत किया गया।

विश्वामित्र के साथ वन गए राम-लक्ष्मण, ताड़का वध का मंचन
रामलीला में आगे ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों द्वारा बाधा डालने का प्रसंग दिखाया गया। सुबाहु और मारीच के अत्याचारों से परेशान होकर ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार पहुंचे और यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने का आग्रह किया। इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के विश्वामित्र के साथ जाने तथा ताड़का, सुबाहु और मारीच से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा राक्षसी ताड़का और सुबाहु का वध करने तथा मारीच को परास्त करने के दृश्यों ने दर्शकों को आकर्षित किया। इन लीलाओं में धर्म की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संदेश दिया गया।
15 अक्टूबर को होगा धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर
श्री रामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने बताया कि आगामी मंचन में अहिल्या उद्धार, जनकपुरी भ्रमण और गौरी पूजन की लीलाएं प्रस्तुत की जाएंगी। इन प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम की करुणा, विनम्रता और आदर्श आचरण को दर्शाया जाएगा। कमेटी के मीडिया प्रभारी विनोद कसाना ने बताया कि 15 अक्टूबर को रामलीला में धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और सीता स्वयंवर का भव्य मंचन किया जाएगा। इस अवसर पर लगभग 50 फीट लंबे धनुष को करीब 55 फीट की ऊंचाई पर खंडित करने का विशेष दृश्य आकर्षण का केंद्र रहेगा।
उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि वे परिवार सहित रामलीला में पहुंचकर भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का आनंद लें और भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़ें।
कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह, विजेंद्र सिंह आर्य, धर्मपाल भाटी, कोषाध्यक्ष मनोज गर्ग, संयुक्त महासचिव सौरभ बंसल, मीडिया प्रभारी विनोद कसाना, उपाध्यक्ष कुलदीप शर्मा, कमल सिंह आर्य, हरेंद्र भाटी, केके शर्मा, अमित गोगल, मुकेश शर्मा, मुकुल गोयल, अरुण गुप्ता, चाचा हिंदुस्तानी, सुनील प्रधान, अनुज उपाध्याय, अतुल जैन, गिरीश जिंदल, अतुल जिंदल, विशाल जैन, मनोज यादव, श्यामवीर भाटी, विकास भाटी, रिंकू, दीप अग्रवाल, दीपक, राहुल, मोनू, प्रभाकर देशमुख और प्रमोद मास्टर सहित कमेटी के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
रामलीला के माध्यम से ग्रेटर नोएडा में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का माहौल बना हुआ है। आगामी दिनों में होने वाले सीता स्वयंवर और धनुष यज्ञ के मंचन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

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