डबल बिक्री, फर्जी दस्तावेज और अवैध कॉलोनी के जोखिम से बचने के लिए अथॉरिटी रिकॉर्ड भी कराएं सत्यापित; इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी में अलॉटमेंट लेटर से लेकर अप्रूव्ड मैप तक की जांच जरूरी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। प्रॉपर्टी खरीदना किसी भी व्यक्ति की जिंदगी के बड़े निवेश में शामिल होता है। ऐसे में जमीन, फ्लैट, कमर्शियल या इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी खरीदते समय केवल विक्रेता की ओर से दिखाए गए दस्तावेजों पर भरोसा करना खरीदार के लिए जोखिम भरा हो सकता है। रियल एस्टेट मार्केट में डबल बिक्री, फर्जी दस्तावेज, अनरजिस्टर्ड प्रॉपर्टी, अवैध कॉलोनियों और बकाया देनदारी से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले दस्तावेजों के साथ संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड की भी जांच करना जरूरी है। ग्रेटर नोएडा स्थित प्रॉपर्टी पॉइंट के रियल एस्टेट एक्सपर्ट दक्ष शर्मा के मुताबिक, प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात उसकी कैटेगरी समझना है। रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और ग्रुप हाउसिंग प्रॉपर्टी की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज अलग-अलग हो सकते हैं।

इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी खरीदते समय इन दस्तावेजों की करें जांच

दक्ष शर्मा के मुताबिक, खासकर इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी खरीदते समय कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच जरूर करनी चाहिए। इनमें प्रमुख रूप से ये दस्तावेज शामिल हैं—

1. अलॉटमेंट लेटर:
सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित प्रॉपर्टी किसके नाम और किन शर्तों पर आवंटित की गई थी। अलॉटमेंट से संबंधित जानकारी को संबंधित अथॉरिटी के रिकॉर्ड से भी मिलाना चाहिए।

2. लीज डीड:
प्रॉपर्टी की लीज डीड की जांच करें। इसमें दर्ज शर्तों, अधिकारों और देनदारियों को समझना जरूरी है।

3. पजेशन से संबंधित दस्तावेज:
प्रॉपर्टी का वास्तविक पजेशन कब और किस स्थिति में दिया गया, इससे संबंधित रिकॉर्ड भी जांचना चाहिए।

4. फंक्शनल सर्टिफिकेट:
जहां लागू हो, वहां फंक्शनल सर्टिफिकेट की स्थिति जरूर जांचें। इससे प्रॉपर्टी के संचालन से संबंधित स्थिति की जानकारी मिल सकती है।

5. कंप्लीशन सर्टिफिकेट:
निर्माण पूरा होने और संबंधित स्वीकृतियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करना भी महत्वपूर्ण है।

6. अप्रूव्ड मैप:
प्रॉपर्टी का स्वीकृत नक्शा जरूर देखें और यह सत्यापित करें कि मौके पर किया गया निर्माण संबंधित स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है या नहीं। इसके अलावा प्रॉपर्टी से संबंधित अथॉरिटी को किए गए सभी भुगतान की रसीदें भी खरीदार को अपने रिकॉर्ड में रखनी चाहिए।

सिर्फ दस्तावेज नहीं, अथॉरिटी की फाइल भी चेक करें

दक्ष शर्मा के अनुसार, विक्रेता की ओर से सभी दस्तावेज दिखा दिए जाने के बाद भी खरीदार को तुरंत संतुष्ट नहीं होना चाहिए। संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड में जाकर प्रॉपर्टी की स्थिति का सत्यापन करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। अथॉरिटी की फाइल में प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई ऑब्जेक्शन, बकाया भुगतान, पुराना विवाद या अन्य देनदारी दर्ज हो सकती है। ऐसी जानकारी विक्रेता की ओर से खरीदार को न बताई गई हो तो बाद में विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रॉपर्टी खरीदने का सुरक्षित तरीका यह है कि खरीदार संबंधित अथॉरिटी में जाकर प्रॉपर्टी की फाइल और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कराए। अतिरिक्त मुआवजे जैसी देनदारियों से जुड़े मामलों में भी खरीदार को पहले से जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए।

फ्लैट खरीद रहे हैं तो बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड जरूर देखें

फ्लैट खरीदने वालों के लिए सिर्फ प्रोजेक्ट की कीमत और लोकेशन देखना पर्याप्त नहीं है। दक्ष शर्मा के अनुसार, खरीदार को बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड भी देखना चाहिए। बिल्डर ने पहले कितने प्रोजेक्ट पूरे किए हैं, पुराने प्रोजेक्ट की स्थिति कैसी है और संबंधित प्रोजेक्ट RERA के तहत पंजीकृत है या नहीं, इसकी जानकारी हासिल करनी चाहिए। सिर्फ कम कीमत या आकर्षक ऑफर देखकर खरीदारी का फैसला करने के बजाय खरीदार को बिल्डर और प्रोजेक्ट की कानूनी एवं नियामकीय स्थिति की जांच करनी चाहिए। खासकर पहली बार प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है।

अनरजिस्टर्ड जमीन और अवैध कॉलोनी से रहें सावधान

रियल एस्टेट एक्सपर्ट ने अनरजिस्टर्ड जमीन, कच्ची आबादी और अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले यह पता करना जरूरी है कि संबंधित जमीन और कॉलोनी को सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक मंजूरी प्राप्त है या नहीं। यदि जमीन या निर्माण अनधिकृत पाया जाता है तो भविष्य में प्राधिकरण की कार्रवाई का जोखिम हो सकता है। इसके अलावा ऐसी प्रॉपर्टी में खरीदार के स्वामित्व और निर्माण अधिकार को लेकर भी विवाद पैदा हो सकता है। उन्होंने डबल बिक्री के जोखिम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जमीन खरीदने से पहले मालिकाना हक और संबंधित रिकॉर्ड की पूरी जांच करना जरूरी है।

पूरी पेमेंट बैंकिंग माध्यम से करें

प्रॉपर्टी खरीदते समय भुगतान के तरीके पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एक्सपर्ट के मुताबिक, लेन-देन को पारदर्शी रखते हुए भुगतान बैंकिंग माध्यम से करना चाहिए और हर भुगतान की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए। एग्रीमेंट में कीमत, भुगतान की समयसीमा, प्रॉपर्टी की स्थिति, देनदारियां और अन्य महत्वपूर्ण शर्तों को स्पष्ट रूप से दर्ज कराना चाहिए। दक्ष शर्मा के अनुसार, रजिस्टर्ड और संबंधित अथॉरिटी से स्वीकृत प्रॉपर्टी में जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है, जबकि अनरजिस्टर्ड या अस्पष्ट रिकॉर्ड वाली प्रॉपर्टी में खरीदार का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले दस्तावेज, अथॉरिटी रिकॉर्ड, मालिकाना हक, बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड, बकाया भुगतान, कानूनी स्थिति और भुगतान प्रक्रिया की पूरी जांच करना खरीदार के लिए सबसे सुरक्षित कदम है। बड़े निवेश के मामले में स्वतंत्र प्रॉपर्टी वकील से दस्तावेजों की कानूनी जांच कराना भी व्यावहारिक सावधानी हो सकती है।