25 किलोमीटर लंबे हिंडन क्षेत्र के कायाकल्प की तैयारी, नदी के मार्ग, बाढ़ चक्र, भूजल रिचार्ज और पर्यावरणीय क्षमता का अध्ययन करेगी पांच सदस्यीय समिति

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा में हिंडन नदी के कायाकल्प और उसके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित करने की दिशा में प्राधिकरण ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रस्तावित हिंडन रिवरफ्रंट परियोजना के तहत नदी के करीब 25 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को नए सिरे से विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 29.315 करोड़ रुपये बताई गई है। प्रस्तावित परियोजना को लखनऊ के गोमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर विकसित करने की बात सामने आई है। हालांकि, अभी यह परियोजना प्रस्ताव और अध्ययन के चरण में है। अंतिम स्वरूप, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और आवश्यक स्वीकृतियों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना किस रूप में जमीन पर उतरेगी।

इसी दिशा में नोएडा प्राधिकरण ने हिंडन नदी के ‘कोर्स करेक्शन’ यानी नदी के मार्ग में सुधार, बाढ़ की स्थिति और पर्यावरणीय क्षमता का अध्ययन करने के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति गठित की है। समिति को नदी और उसके आसपास के क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करनी है।

नदी के प्राकृतिक मार्ग और बाढ़ चक्र का होगा अध्ययन

प्रस्तावित योजना में हिंडन नदी के प्राकृतिक प्रवाह को व्यवस्थित करने और नदी के आसपास हुए अतिक्रमण तथा विकास के प्रभावों का अध्ययन प्रमुख बिंदु है। समिति यह देखेगी कि नदी का वर्तमान मार्ग किस स्थिति में है और भविष्य में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए किस तरह की व्यवस्था आवश्यक होगी। अध्ययन में पिछले 10, 25 और 50 वर्षों के बाढ़ चक्र, भूजल पुनर्भरण क्षमता तथा क्षेत्र की पर्यावरणीय परिस्थितियों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। हिंडन का क्षेत्र बाढ़ और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, इसलिए प्रस्तावित विकास में इन पहलुओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।

योजना में नदी की धारा के लिए उपलब्ध चौड़ाई को बढ़ाने का प्रस्ताव भी बताया गया है। इसके तहत करीब 50 मीटर की वर्तमान चौड़ाई को बढ़ाकर 150 मीटर तक करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसका अंतिम स्वरूप समिति की रिपोर्ट और संबंधित स्वीकृतियों के बाद ही तय होगा।

29.315 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट

प्रस्तावित हिंडन रिवरफ्रंट परियोजना के लिए करीब 29.315 करोड़ रुपये के बजट का उल्लेख किया गया है। इसमें अलग-अलग मदों में खर्च का प्रस्ताव रखा गया है।

  • 15 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित हैं।
  • 7.240 करोड़ रुपये भूमि विकास और सिविल कार्यों पर खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
  • 4 करोड़ रुपये नदी किनारे प्रभावित करीब 10 हजार परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए प्रस्तावित बताए गए हैं।
  • 2.425 करोड़ रुपये नदी के दोनों ओर छह लेन की सड़कों के निर्माण के लिए प्रस्तावित हैं।

इन आंकड़ों का अंतिम स्वरूप परियोजना की स्वीकृति और विस्तृत वित्तीय योजना के बाद स्पष्ट होगा।

तीन चरणों में विकसित करने की योजना

प्रस्तावित रिवरफ्रंट का करीब 25 किलोमीटर लंबा हिस्सा छिजारसी क्षेत्र से शुरू होकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक विकसित करने की योजना बताई गई है। इसे तीन चरणों में बांटने का प्रस्ताव है।

पहला चरण: एनएच-9/छिजारसी क्षेत्र से बिसरख रोड ब्रिज तक करीब 8 किलोमीटर।

दूसरा चरण: बिसरख रोड ब्रिज से डीएससी रोड ब्रिज तक करीब 5 किलोमीटर।

तीसरा चरण: डीएससी रोड ब्रिज से नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर। परियोजना में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि नदी के आसपास ग्रीन कॉरिडोर, वॉकिंग ट्रैक, पार्क, मनोरंजक क्षेत्र, पत्थर की पिचिंग और घाट विकसित करने का भी प्रस्ताव बताया गया है। उद्देश्य नदी क्षेत्र को व्यवस्थित करने के साथ इसे सार्वजनिक उपयोग और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना है।

अतिक्रमण और पर्यावरण सबसे बड़ी चुनौती

हिंडन नदी के आसपास लंबे समय से अतिक्रमण, प्रदूषण और अनियोजित विकास से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में रिवरफ्रंट परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना होगी। नदी क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण होगा। प्रस्ताव में इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।

अभी मंजूरी का इंतजार

प्रस्तावित परियोजना को लेकर नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर एमओयू और अंतिम मंजूरी से संबंधित प्रक्रिया पर बातचीत जारी होने की बात सामने आई है। ऐसे में फिलहाल इसे स्वीकृत और पूरी तरह क्रियान्वित परियोजना के बजाय प्रस्तावित योजना के रूप में देखना अधिक उचित होगा। यदि प्रस्तावित योजना को आवश्यक स्वीकृतियां मिलती हैं और समिति की रिपोर्ट के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जाता है, तो हिंडन नदी के आसपास के बड़े हिस्से का स्वरूप बदल सकता है। इसके साथ ही नदी संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिहाज से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है। अब नजर पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और परियोजना को लेकर होने वाले अगले फैसलों पर है।