मेरठ/नोएडा, रफ़्तार टूडे। मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चुनावी तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इस महत्वपूर्ण शिक्षक सीट से भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा MLC श्रीचंद शर्मा को एक बार फिर अपना प्रत्याशी बनाया है। सोमवार को श्रीचंद शर्मा ने मेरठ कमिश्नरी पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। नामांकन के साथ ही छह साल पहले शुरू हुई उनकी विधान परिषद की राजनीतिक यात्रा अब एक बार फिर शिक्षक मतदाताओं के बीच पहुंच गई है।

श्रीचंद शर्मा का यह चुनाव केवल मेरठ की राजनीति तक सीमित नहीं है। उनका संबंध गौतम बुद्ध नगर से भी है और नामांकन संबंधी विवरण में उनका पता धूम मानिकपुर, गौतम बुद्ध नगर दर्ज है। यही कारण है कि मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव गौतम बुद्ध नगर के राजनीतिक और शिक्षक वर्ग के लिए भी खास महत्व रखता है। नामांकन के दौरान श्रीचंद शर्मा के साथ बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। उपलब्ध रिपोर्टों में नामांकन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. भोला प्रसाद, पूर्व राष्ट्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर, राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, नोएडा विधायक पंकज सिंह, मेरठ के महापौर हरिकांत अहलूवालिया, MLC धर्मेंद्र भारद्वाज, मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल और भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी के नाम दर्ज हैं।

हालांकि, नामांकन के एक दिन पहले हुई भाजपा की तैयारी बैठक और नामांकन वाले दिन की मौजूदगी को अलग-अलग रखना जरूरी है। रविवार को हुई तैयारी बैठक में भी भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, महानगर पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, पार्षद, कार्यक्रम संयोजक और अन्य पदाधिकारी मौजूद बताए गए थे। लेकिन उस बैठक को सोमवार के नामांकन कार्यक्रम की उपस्थिति के साथ जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

छह साल बाद बदली हुई भूमिका में मैदान में श्रीचंद शर्मा

राजनीतिक रूप से इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्रीचंद शर्मा इस बार किसी नए प्रत्याशी के रूप में शिक्षक मतदाताओं के सामने नहीं हैं। वर्ष 2020 में उन्होंने पहली बार इस सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल कर विधान परिषद पहुंचे थे। उस चुनाव में उन्होंने लंबे समय से शिक्षक राजनीति में प्रभाव रखने वाले ओम प्रकाश शर्मा को पराजित किया था। 2020 की उस जीत को इस सीट की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा गया था। ओम प्रकाश शर्मा का इस शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 48 वर्षों तक प्रभाव रहा था। श्रीचंद शर्मा की जीत के बाद इस लंबे राजनीतिक वर्चस्व का अंत हुआ और भाजपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

लेकिन छह साल बाद राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। 2020 में श्रीचंद शर्मा के सामने स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने की स्थिति थी, जबकि 2026 में वह मौजूदा MLC के रूप में दोबारा मतदाताओं के सामने हैं। इसका मतलब यह है कि इस बार चुनाव में उनके पिछले कार्यकाल से जुड़े सवाल और उपलब्धियों के दावे भी चर्चा का हिस्सा होंगे।

भाजपा ने मौजूदा MLC पर ही जताया भरोसा

भाजपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपने वर्तमान प्रतिनिधि श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बनाकर निरंतरता का विकल्प चुना है। पार्टी ने उनकी उम्मीदवारी की घोषणा पहले ही कर दी थी। इसी तरह मेरठ-सहारनपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा MLC दिनेश गोयल को भी भाजपा ने दोबारा प्रत्याशी बनाया है। इससे स्पष्ट है कि विधान परिषद की इन दोनों सीटों पर भाजपा ने अपने मौजूदा प्रतिनिधियों के साथ चुनाव में उतरने का फैसला किया है। अब इन प्रत्याशियों के सामने पार्टी संगठन के समर्थन के साथ-साथ अपने पिछले कार्यकाल का लेखा-जोखा भी शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के सामने रखने की चुनौती होगी।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होता है। यहां पात्र और पंजीकृत शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। ऐसे में चुनावी अभियान में व्यक्तिगत संपर्क, शिक्षक संगठनों की भूमिका, शिक्षकों की समस्याएं, सेवा संबंधी मुद्दे और प्रत्याशी की व्यक्तिगत स्वीकार्यता जैसे विषय महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

कार्यकाल की उपलब्धियां भी होंगी चुनावी चर्चा का हिस्सा

श्रीचंद शर्मा की आधिकारिक वेबसाइट पर उनके कार्यकाल से जुड़े कई कार्यों और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। इनमें शिक्षकों के लिए कैशलेस हेल्थ कार्ड, शिक्षक भर्ती, अलंकार योजना, नए हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, ऑनलाइन मान्यता और GPF सेवाओं जैसे विषय शामिल हैं। हालांकि इन बिंदुओं को श्रीचंद शर्मा की ओर से प्रस्तुत उपलब्धियों के रूप में देखा जाना चाहिए। इनका अंतिम राजनीतिक मूल्यांकन शिक्षक मतदाता अपने अनुभव और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर करेंगे। चुनाव के दौरान इन योजनाओं और कार्यों को लेकर प्रत्याशी अपना पक्ष रखेंगे, जबकि अन्य प्रत्याशी और शिक्षक संगठन इनके प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर अपने सवाल सामने रख सकते हैं।

यही वजह है कि इस बार चुनावी बहस केवल राजनीतिक दलों के समर्थन तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। छह वर्ष का कार्यकाल श्रीचंद शर्मा के लिए एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे वह मतदाताओं के सामने रखेंगे और जिसके आधार पर शिक्षक उनसे सवाल भी कर सकते हैं।

नामांकन के बाद अब चुनावी अभियान का अगला चरण

नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हुई थी और 6 अक्टूबर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख निर्धारित है। इसके बाद 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद चुनाव मैदान में बचे प्रत्याशियों की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। वर्तमान विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त होना है। इस लिहाज से सोमवार को श्रीचंद शर्मा का नामांकन चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब 9 अक्टूबर के बाद अंतिम प्रत्याशी सूची सामने आने के साथ चुनावी मुकाबले का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट होगा।

भीड़ से ज्यादा अहम होगा शिक्षक मतदाता तक पहुंचना

नामांकन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी किसी राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा हो सकती है, लेकिन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वास्तविक चुनावी प्रक्रिया मतदान केंद्रों पर पंजीकृत शिक्षक मतदाताओं के फैसले से तय होगी। यहां प्रत्याशियों के लिए केवल बड़ी सभाएं या राजनीतिक समर्थन ही पर्याप्त नहीं होंगे। शिक्षक समुदाय के बीच लगातार संपर्क और उनके मुद्दों पर स्पष्ट पक्ष भी चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। श्रीचंद शर्मा के सामने अब यही चुनौती है कि वह अपने छह वर्षों के कार्यकाल को किस तरह शिक्षक मतदाताओं के सामने रखते हैं। दूसरी ओर चुनाव मैदान में आने वाले अन्य प्रत्याशी भी अपने मुद्दों और प्राथमिकताओं के साथ मतदाताओं तक पहुंचेंगे।

2020 में श्रीचंद शर्मा ने एक स्थापित राजनीतिक प्रभाव को चुनौती देते हुए इस सीट पर जीत हासिल की थी। 2026 में उनकी भूमिका बदल चुकी है। अब वह मौजूदा MLC हैं और अपने पिछले कार्यकाल के आधार पर दोबारा जनादेश मांग रहे हैं। राजनीति में नामांकन एक औपचारिक प्रक्रिया जरूर है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए दोबारा चुनाव मैदान में उतरना अपने पिछले कार्यकाल को जनता के सामने रखने का अवसर भी होता है। श्रीचंद शर्मा के मामले में यह अवसर खास इसलिए है क्योंकि छह वर्ष पहले उन्होंने इस सीट की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज कराया था।

अब आगे की कहानी शिक्षक मतदाताओं के बीच लिखी जानी है। प्रत्याशी अपना पक्ष रखेंगे, भाजपा संगठन अपने अभियान को आगे बढ़ाएगा, शिक्षक संगठन और विपक्षी प्रत्याशी अपने सवाल उठाएंगे और मतदाता अपने अनुभव के आधार पर फैसला करेंगे। 2020 की जीत श्रीचंद शर्मा के राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण अध्याय थी। 2026 का चुनाव उनके छह वर्षों के प्रतिनिधित्व को शिक्षक मतदाताओं के सामने रखेगा। मेरठ कमिश्नरी में नामांकन के साथ चुनावी प्रक्रिया का यह अध्याय शुरू हो चुका है, लेकिन अंतिम फैसला 23 अक्टूबर को मतदान के बाद ही सामने आएगा।प्रमाणित मिली?

नामांकन के दौरान* उपलब्ध रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के सांसद और राष्ट्रीय मंत्री डॉ भोला प्रसाद, पूर्व राष्ट्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, सरकार के राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर, राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, नोएडा विधायक पंकज सिंह , मेरठ के महापौर हरिकांत अहलूवालिया, MLC धर्मेंद्र भारद्वाज, मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल , सिकंदराबाद विधायक लक्ष्मीराज सिंह, खुर्जा विधायक मीनाक्षी सिंह, दादरी विधायक तेजपाल नागर, जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा, भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इसके अलावा पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे।
एक दिन पहले भाजपा की

नामांकन संबंधी तैयारी बैठक में भी, डॉ भोला सिंह, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, हरिकांत अहलूवालिया, धर्मेंद्र भारद्वाज, अमित अग्रवाल और विवेक रस्तोगी के साथ महानगर पदाधिकारी, कार्यक्रम संयोजक-सह संयोजक, मंडल अध्यक्ष, पार्षद और पार्षद प्रत्याशी मौजूद बताए गए थे। लेकिन वह रविवार की तैयारी बैठक थी, इसलिए उसे सोमवार के Shrichand Sharma Nomination की उपस्थिति में मिलाना उचित नहीं होगा।


अब फैसला पार्टी कार्यालय में नहीं, शिक्षक के मतपत्र पर होगा


श्रीचंद शर्मा के लिए टिकट का फैसला भाजपा कर चुकी है। नामांकन की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। अब सबसे कठिन और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बाकी है—मतदाता का निर्णय। पिछले चुनाव की जीत राजनीतिक पूंजी हो सकती है, लेकिन लोकतंत्र में पुरानी जीत अगले कार्यकाल की गारंटी नहीं होती।
यही Shrichand Sharma Nomination की सबसे बड़ी राजनीतिक परत है। 2020 में उन्होंने जिस सीट पर लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को तोड़कर अपनी जगह बनाई थी, 2026 में उसी सीट पर उन्हें अपने छह साल के प्रतिनिधित्व के साथ वापस शिक्षक मतदाता के सामने खड़ा होना है।


नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर उम्मीदवार करता है, टिकट पर मुहर पार्टी लगाती है—लेकिन जनादेश पर अंतिम मुहर मतदाता की होती है।
मेरठ कमिश्नरी से सोमवार को चुनाव की औपचारिक यात्रा शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में समर्थनों के दावे होंगे, विरोधी अपने सवाल लेकर आएंगे, शिक्षक संगठन अपनी रणनीति बनाएंगे और प्रत्याशी अपने काम का लेखा-जोखा रखेंगे। लेकिन 23 अक्टूबर की सुबह जब शिक्षक मतदाता मतदान केंद्र पहुंचेगा, तब उसके सामने नामांकन के दिन की भीड़ नहीं बल्कि अपना निर्णय होगा।