नोएडा, रफ़्तार टूडे। श्री सनातन धर्म रामलीला समिति, नोएडा के तत्वावधान में हरि भक्ति कला ट्रस्ट द्वारा आयोजित रामलीला के पांचवें दिन नोएडा स्टेडियम में भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर हनुमान प्रकटोत्सव तक के प्रसंगों का भव्य और भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवादों और आकर्षक मंच सज्जा के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत कर दिया। कहीं भगवान श्रीराम के वनवास और राजा दशरथ के निधन ने दर्शकों को भावुक किया, तो कहीं भरत मिलाप, सीता हरण और हनुमान प्रकटोत्सव के दृश्यों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। प्रसिद्ध निर्देशक पंकज शर्मा के निर्देशन में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जसवंत सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पूर्व विधान परिषद सदस्य सुरेश भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों ने रामलीला का आनंद लिया।

श्रीराम वनवास और केवट प्रसंग ने भावुक किए दर्शक

रामलीला के पांचवें दिन की शुरुआत भगवान श्रीराम के वनवास के प्रसंग से हुई। पिता महाराज दशरथ के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए भगवान श्रीराम के वन गमन और उनके वियोग में व्याकुल अयोध्यावासियों के दृश्यों का मार्मिक मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के प्रति अयोध्यावासियों का प्रेम और समर्पण देखकर दर्शक भावुक हो उठे। इसके बाद भगवान श्रीराम और निषादराज की भेंट का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। दोनों की मैत्री के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और सच्चे मित्रत्व का संदेश दिया गया। केवट द्वारा भगवान श्रीराम के चरण पखारने और उन्हें गंगा पार कराने की लीला ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

इस प्रसंग में भक्ति, सेवा और समर्पण की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को रामायण के घटनाक्रम से जोड़ दिया।

राजा दशरथ के निधन और भरत मिलाप ने नम कीं आंखें

रामलीला में इसके बाद कैकेयी के पश्चाताप, राजा दशरथ के निधन, भरत-कैकेयी संवाद और भरत मिलाप जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। राजा दशरथ के निधन के बाद अयोध्या में छाए शोक और परिवार के सदस्यों की व्यथा को कलाकारों ने संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। भरत के अयोध्या लौटने और भगवान श्रीराम से मिलने के प्रसंग ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। भरत का अपने बड़े भाई के प्रति प्रेम, त्याग और सम्मान रामायण के उन आदर्शों को सामने लाता है, जो परिवार में कर्तव्य, मर्यादा और निस्वार्थ प्रेम की प्रेरणा देते हैं।

भरत मिलाप के दौरान रामलीला परिसर में भावुक वातावरण देखने को मिला। दर्शकों ने भगवान श्रीराम और भरत के चरित्रों के माध्यम से भाईचारे और पारिवारिक मूल्यों का संदेश ग्रहण किया।

शूर्पणखा प्रसंग से खर-दूषण वध तक दिखा रोमांच

रामलीला के अगले चरण में रावण, शूर्पणखा और खर-दूषण से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया गया। प्रस्तुत कथा के अनुसार, रावण द्वारा शूर्पणखा के पति विद्युत्जीव की हत्या, शूर्पणखा की निकुंभला देवी से प्रार्थना और उसके बाद भगवान श्रीराम के पास पहुंचने के प्रसंग दिखाए गए। इसके बाद लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा का अंग-भंग तथा खर-दूषण का भगवान श्रीराम से युद्ध और वध मंचित किया गया। इन दृश्यों में कलाकारों के संवाद, युद्ध शैली और मंचीय प्रस्तुति ने रामलीला को रोमांचक बना दिया। रावण के महल की भव्य झांकी और आगे की घटनाओं ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाई। मंचन के माध्यम से रामायण की कथा को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया गया।

साधु वेश में रावण, सीता हरण और जटायु वध का मंचन

रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में साधु के वेश में रावण का आगमन, माता सीता का हरण और पक्षीराज जटायु की वीरगति के प्रसंग भी शामिल रहे। इन दृश्यों को कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय के साथ प्रस्तुत किया। सीता हरण के प्रसंग में माता सीता की व्याकुलता और जटायु के संघर्ष को देखकर दर्शक भावुक हो गए। जटायु के साहस और माता सीता की रक्षा के लिए उनके प्रयासों के माध्यम से कर्तव्य, साहस और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। इसके बाद शबरी प्रसंग का मंचन हुआ, जिसमें भगवान श्रीराम के प्रति शबरी की अनन्य भक्ति और समर्पण को दर्शाया गया। इसके साथ ही हनुमान प्रकटोत्सव का भव्य मंचन किया गया। पवनपुत्र हनुमान के प्रकट होने के दृश्य ने रामलीला परिसर को भक्तिमय बना दिया और दर्शकों ने जय श्रीराम तथा जय बजरंगबली के जयकारे लगाए।

भव्य झांकियों और संगीत ने बढ़ाई रामलीला की शोभा

कार्यक्रम में ‘क्लाउड द फायर टीम’ द्वारा प्रस्तुत विभिन्न आकर्षक झांकियों ने आयोजन में विशेष रंग भरे। भव्य मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, दृश्य संयोजन और कलाकारों के सशक्त अभिनय ने रामलीला को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में गायक मनुज उप्रेती तथा गायिकाएं सांत्चना और साधना सिंह भी उपस्थित रहीं। संगीत और मंचीय प्रस्तुतियों ने धार्मिक वातावरण को और प्रभावशाली बनाया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, महाराज दशरथ, कैकेयी, भरत, शत्रुघ्न, खर-दूषण, शूर्पणखा और रावण की भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

इन कलाकारों ने निभाईं प्रमुख भूमिकाएं

  • भगवान श्रीराम: अभिषेक शर्मा
  • लक्ष्मण: मोहित यादव
  • माता सीता: युगांशा शर्मा
  • महाराज दशरथ: पंकज शर्मा
  • कैकेयी: सोनम
  • केवट: हरीश शर्मा
  • भरत: हिमांशु शर्मा
  • शत्रुघ्न: हरिओम
  • खर-दूषण: दीपक एवं अवनीश
  • शूर्पणखा: सोनम
  • रावण: अमित शर्मा

सभी कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं को निष्ठा, समर्पण और ऊर्जा के साथ निभाया। उनके अभिनय से रामायण के विभिन्न प्रसंग मंच पर जीवंत हो उठे।

सनातन परंपरा और भारतीय संस्कारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास

श्री सनातन धर्म रामलीला समिति, नोएडा द्वारा आयोजित यह रामलीला धार्मिक आस्था के साथ भारतीय सनातन परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनी हुई है। समिति का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य, त्याग और धर्म के संदेश को समाज तक पहुंचाना तथा नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

कार्यक्रम के पांचवें दिन श्री सनातन धर्म रामलीला समिति के चेयरमैन डॉ. टी.एन. गोविल, अध्यक्ष टी.एन. चौरसिया, महासचिव संजय बाली, कार्यकारी अध्यक्ष सुशील भारद्वाज, कोषाध्यक्ष अल्पेश गर्ग, रमेश कुमार, एस.के.एस. राणा, अनुज गुप्ता, सत्यनारायण गोयल, पंकज जिंदल, मित्रा शर्मा, विपिन मलन, जनक भाटिया, तरुण राज, नवीन सोनी, जे.सी. माहेश्वरी, समीर अग्रवाल, वीरेंद्र मेहता, नरेंद्र चोपड़ा, मनीष अग्रवाल, पवनदीप सिंह, विपिन बंसल, अनिल गुप्ता, विनय शर्मा, सौरभ गोविल, महेंद्र कटारिया, राजीव अजमानी, संजय गोयल, विकास जैन, अखिलेश बधोरिया, जितेंद्र सिंह, महेश चौहान, प्रमोद शर्मा, अशोक मिश्रा, राकेश गुप्ता, अशोक चौहान, राजेश भारद्वाज, राधाकिशन गर्ग, रविंदर गुप्ता, अर्चना राय, केशव गंगल, अतुल वर्मा, जतिन, रोहित श्रीवास्तव, पवन सिंह, सुंदर सिंह राणा, एन.के. अग्रवाल, पुनीत शुक्ला, प्रमोद रंगा, चंद्रपाल सिंह, श्रेया चतुर्वेदी, विनोद शर्मा, सुनील कुमार, देवेंद्र गंगल, कुलदीप गुप्ता, मुकेश गुप्ता, योगेंद्र शर्मा, अतुल मित्तल, डॉ. एस.पी. जैन, संजय जैन, अमित पोरवाल, मनोज पोरवाल, नरेश बंसल, छाया राय, विशाल कश्यप, लोकेश कश्यप, कुलदीप गोयल, पुष्कर शर्मा, उदय जैन, सन्नी अग्रवाल, मनोज उपाध्याय, माधव तुली, आदित्य अग्रवाल, तुषार गोयल, पी.के. गुप्ता, गिरिजा सिंह, राम कुमार शर्मा, रवि यादव, बबलू यादव, शिवांश श्रीवास्तव, अविनाश, रोहित ठाकुर, भारत भूषण भारद्वाज और एहसान खान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं दर्शक उपस्थित रहे। रामलीला के पांचवें दिन वनवास से लेकर हनुमान प्रकटोत्सव तक के प्रसंगों ने दर्शकों को भक्ति, त्याग, मित्रता और धर्म की विजय का संदेश दिया। नोएडा स्टेडियम में आयोजित इस धार्मिक आयोजन के माध्यम से रामायण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास जारी है।