सेक्टर गामा-1 के कमर्शियल प्रोजेक्ट के खरीदारों ने प्रेसवार्ता कर GNIDA, यूपी रेरा और प्रदेश सरकार से लगाई गुहार; करीब 592 दुकानों वाले प्रोजेक्ट में 400 के आसपास दुकानों की बिक्री का दावा, रजिस्ट्री और जरूरी सुविधाएं पूरी कराने की मांग

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर गामा-1 स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट रॉयल वॉकवे के खरीदार दुकानों का कब्जा और रजिस्ट्री मिलने में हो रही देरी से परेशान हैं। खरीदारों का आरोप है कि दिसंबर 2023 तक पूरा होकर सौंपा जाने वाला प्रोजेक्ट अक्टूबर 2026 तक भी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। जीवनभर की कमाई निवेश करने के बावजूद उन्हें अपनी दुकानों का कब्जा नहीं मिल पाया है। सोमवार को खरीदारों ने ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA), यूपी रेरा और उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

खरीदारों के मुताबिक, प्रोजेक्ट में लगभग 592 दुकानें हैं, जिनमें से करीब 400 दुकानों की बिक्री हो चुकी है। उनके अनुसार, परियोजना का प्रमोटर विधि इंफ्राबिल्ड है, जबकि जमीन का आवंटी वर्धमान इंफ्राबिल्ड है। खरीदारों ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से कब्जे और निर्माण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस राहत नहीं मिली। उनका यह भी दावा है कि कंपनी में निदेशकों के बदलने के बावजूद खरीदारों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

प्राधिकरण के बकाये और भुगतान योजना पर उठाए सवाल

खरीदारों ने प्रेसवार्ता में बताया कि 23 मार्च 2026 तक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बिल्डर पर 48 करोड़ रुपये से अधिक बकाया था। उनके अनुसार, शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने भुगतान योजना बनाई थी, जिसके तहत बिल्डर को पेनल्टी की 25 प्रतिशत राशि यानी लगभग 12 करोड़ रुपये जमा करने थे। इसके बाद निर्धारित बैंक खाते के माध्यम से बकाये के भुगतान की व्यवस्था की जानी थी। खरीदारों का आरोप है कि बिल्डर ने अपनी ओर से आवश्यक राशि जमा करने के बजाय उनसे भुगतान मांगना शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि करीब 144 खरीदारों से रकम जुटाई गई। इसके बाद 30 सितंबर 2026 को लोअर ग्राउंड, अपर ग्राउंड और पहली मंजिल की लगभग 50 प्रतिशत दुकानों के लिए आंशिक अधिभोग प्रमाणपत्र (पार्ट ओसी) जारी हुआ।

हालांकि, खरीदारों का कहना है कि पार्ट ओसी जारी होने के करीब 20 दिन बाद भी उन्हें दुकानों की स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई और न ही कब्जा सौंपा गया। इसी को लेकर खरीदारों ने परियोजना में निर्माण की वास्तविक स्थिति, भुगतान व्यवस्था और कब्जा देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

बेसमेंट पार्किंग, लिफ्ट और कूलिंग सिस्टम अधूरे होने का दावा

खरीदारों के अनुसार, रॉयल वॉकवे में कई जरूरी सुविधाओं का काम अब भी अधूरा है। इनमें बेसमेंट पार्किंग, सुरक्षित और चालू लिफ्ट, सेंट्रलाइज्ड कूलिंग एवं एचवीएसी सिस्टम, बिजली सब-स्टेशन तथा सुरक्षा से संबंधित वायरिंग जैसे कार्य शामिल हैं। खरीदारों ने सवाल उठाया कि यदि ये सुविधाएं पूरी नहीं हुई हैं, तो संबंधित हिस्सों के लिए पार्ट ओसी किन परिस्थितियों में जारी की गई। उन्होंने मांग की कि प्राधिकरण और संबंधित विभाग परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण, सुरक्षा और उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति की जांच करें।

खरीदारों का यह भी कहना है कि उन्होंने अगस्त 2026 में ही प्राधिकरण और यूपी रेरा को लिखित शिकायत देकर निरीक्षण कराने तथा परियोजना के लिए जमा होने वाली रकम की निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की थी। अब वे संबंधित अधिकारियों से शिकायतों पर कार्रवाई और स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा कर रहे हैं।

खरीदारों ने रखीं चार प्रमुख मांगें

प्रेसवार्ता में खरीदारों ने परियोजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अपने निवेश की सुरक्षा के लिए कई मांगें उठाईं। उनकी प्रमुख मांगें हैं:

  • भुगतान की निगरानी: परियोजना से संबंधित रकम निर्धारित बैंक खाते में जमा कराई जाए और निजी खातों में भुगतान लेने के आरोपों की जांच हो।
  • नियमित ऑडिट: खाते की निगरानी प्राधिकरण की ओर से की जाए तथा जमा और खर्च की गई रकम का नियमित ऑडिट कराया जाए।
  • निर्माण और सुरक्षा का निरीक्षण: कब्जा देने से पहले निर्माण कार्यों, लिफ्ट, पार्किंग, बिजली और अन्य जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की जांच की जाए।
  • कब्जे और रजिस्ट्री की समयसीमा: खरीदारों को दुकानों का कब्जा और रजिस्ट्री दिलाने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए।

खरीदारों का कहना है कि भुगतान से संबंधित व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परियोजना के लिए जुटाई गई राशि का इस्तेमाल निर्माण पूरा करने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में हो रहा है।

निवेश की सुरक्षा को लेकर खरीदार चिंतित

खरीदारों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो परियोजना से जुड़ा संकट और गहरा सकता है। उनका कहना है कि दुकानें खरीदने में उन्होंने अपनी जीवनभर की बचत लगाई है और अब उन्हें अपने निवेश की सुरक्षा को लेकर चिंता है। खरीदारों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपनी दुकानों का वैध कब्जा, रजिस्ट्री और निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित कराना है। उन्होंने GNIDA, यूपी रेरा और राज्य सरकार से मामले की गंभीरता को देखते हुए हस्तक्षेप करने तथा निर्माण और भुगतान की स्थिति स्पष्ट कराने की मांग की है।

 बिल्डर, परियोजना और भुगतान से संबंधित तथ्य खरीदारों द्वारा प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों एवं दावों पर आधारित हैं। प्राधिकरण, यूपी रेरा और संबंधित कंपनियों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।