श्री धार्मिक रामलीला में शबरी-राम मिलन, सुग्रीव मित्रता और बाली वध की लीला ने मोहा मन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा परिसर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। श्री धार्मिक रामलीला मंचन में 18 अक्टूबर को आठवें दिन भगवान श्रीराम की वन यात्रा, माता शबरी से मिलन, हनुमान जी से भेंट, सुग्रीव से मित्रता और बाली वध सहित रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत इन लीलाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला परिसर में प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे।

श्री धार्मिक रामलीला का आयोजन 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे किया जा रहा है। परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आदर्शों और संस्कारों से जोड़ना है।

शबरी की भक्ति से सुग्रीव की मित्रता तक का भावपूर्ण मंचन

संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि आठवें दिन की लीला में माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण उनकी खोज में वन-वन भटकते हैं। इसी क्रम में दोनों भाई माता शबरी के आश्रम पहुंचते हैं। माता शबरी की निष्कपट भक्ति और प्रभु के प्रति अटूट प्रेम का प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। शबरी भगवान श्रीराम को किष्किंधा पर्वत पर जाकर सुग्रीव से सहायता लेने का मार्ग सुझाती हैं।

इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण किष्किंधा की ओर प्रस्थान करते हैं। वहां हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर दोनों भाइयों के बारे में जानकारी प्राप्त करने पहुंचते हैं। भगवान श्रीराम और हनुमान जी का मिलन रामायण के सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण प्रसंगों में से एक है। यह प्रसंग प्रभु के प्रति भक्त के समर्पण और भक्ति की शक्ति को दर्शाता है। हनुमान जी भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को सुग्रीव के पास ले जाते हैं। सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली के अत्याचारों से पीड़ित होते हैं। भगवान श्रीराम सुग्रीव की सहायता करते हुए बाली का वध करते हैं और उन्हें उसके भय से मुक्त कराते हैं। इसके बाद सुग्रीव और वानर सेना की मदद से माता सीता की खोज का अभियान शुरू होता है।

जामवंत ने कराया हनुमान जी को उनकी शक्ति का एहसास

माता सीता की खोज के लिए वानर सेना अलग-अलग दिशाओं में रवाना होती है। हनुमान जी के नेतृत्व वाला दल दक्षिण दिशा में आगे बढ़ते हुए समुद्र तट तक पहुंचता है। विशाल समुद्र को देखकर सभी चिंतित होते हैं कि इसे पार कर लंका तक कैसे पहुंचा जाए। ऐसे समय में जामवंत जी हनुमान जी को उनकी असीम शक्तियों का स्मरण कराते हैं। रामायण की प्रसिद्ध चौपाई “कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहीं होइ तात तुम्ह पाहीं” के माध्यम से हनुमान जी को उनकी सामर्थ्य का एहसास कराया जाता है। इसके बाद बजरंगबली माता सीता की खोज में समुद्र पार कर लंका की ओर प्रस्थान करते हैं।

लंका पहुंचने से पहले हनुमान जी को सुरसा की परीक्षा का सामना करना पड़ता है। लंका में प्रवेश के दौरान उनकी लंकिनी से भी भिड़ंत होती है। इसके बाद वे माता सीता की खोज में लंका के विभिन्न स्थानों पर पहुंचते हैं। इसी क्रम में उन्हें विभीषण की कुटिया दिखाई देती है, जहां भगवान श्रीराम का नाम अंकित होता है। विभीषण से जानकारी मिलने पर हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचते हैं।

अशोक वाटिका में माता सीता से मिले बजरंगबली

अशोक वाटिका में हनुमान जी की माता सीता से भेंट का दृश्य अत्यंत भावुक रहा। हनुमान जी भगवान श्रीराम की मुद्रिका माता सीता को देते हैं। मुद्रिका देखकर माता सीता उन्हें पहचान लेती हैं। इसके बाद हनुमान जी अपना परिचय देते हुए प्रभु श्रीराम का संदेश सुनाते हैं। यह प्रसंग विश्वास, आशा और प्रभु के प्रति अटूट आस्था का संदेश देता है।

रामलीला में इन प्रसंगों के सजीव मंचन ने दर्शकों का मन मोह लिया। पूरे परिसर में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने कलाकारों के अभिनय और मंचन की सराहना की।

19 अक्टूबर को लंका दहन और सेतु निर्माण का होगा मंचन

श्री धार्मिक रामलीला में आगामी दिनों के लिए भी विशेष कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। 19 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। इसके बाद लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा भगवान श्रीराम और रावण के बीच निर्णायक युद्ध सहित अन्य प्रमुख लीलाएं दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष का दशहरा महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए मनोरंजन, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है। रामलीला के माध्यम से समाज को मर्यादा, सत्य, धर्म, साहस, सेवा और कर्तव्यपालन जैसे मूल्यों का संदेश दिया जा रहा है।

गणमान्य अतिथियों और पदाधिकारियों की रहेगी सहभागिता

आयोजन के लिए घोषित प्रमुख अतिथियों में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री जयप्रकाश (जे.पी.), राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र सिंह नागर, भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह तथा न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी शामिल हैं।

कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैन पाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष फिरे प्रधान, पी.पी. शर्मा, श्याम सुंदर फौजी, यशपाल नागर, सचिव ज्योति सिंह, गीता सागर, राकेश भाटी, भगवत भाटी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, पवन भाटी, वीरपाल मावी और जय शर्मा सहित अन्य सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

श्री धार्मिक रामलीला समिति का कहना है कि रामलीला और दशहरा महोत्सव के माध्यम से धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।