श्याम सिंह भाटी का आरोप—सम्मेलन के आयोजक समाज के हितों की अनदेखी कर रहे; मुख्य अतिथि के नाम और संगठन के पंजीकरण को लेकर भी उठाए सवाल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। दिल्ली में 27 अक्टूबर को आयोजित होने जा रहे गुर्जर सम्मेलन को लेकर समाज के संगठनों के बीच विवाद सामने आया है। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने सम्मेलन के आयोजकों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के जरिए समाज के वास्तविक मुद्दों को उठाने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि सम्मेलन में गुर्जर समाज की भावनाओं और अपेक्षाओं की अनदेखी की गई, तो उसके कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज करा सकते हैं।

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सिंह भाटी ने ये आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 27 अक्टूबर को होने वाले सम्मेलन के आयोजकों ने अब तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौन होंगे। उनके अनुसार, सम्मेलन को लेकर समाज के लोगों के बीच कई सवाल हैं, जिनका आयोजकों को जवाब देना चाहिए।

आयोजकों पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप

श्याम सिंह भाटी ने आरोप लगाया कि सम्मेलन आयोजित करने वाली टीम भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के रूप में काम कर रही है और आयोजन में शामिल कई लोग भाजपा से जुड़े पदाधिकारी हैं। उन्होंने दावा किया कि सम्मेलन के पीछे समाज के उत्थान से अधिक व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ हासिल करने की मंशा है। भाटी ने कहा कि किसी भी सामाजिक सम्मेलन का उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर लाना, उनकी समस्याओं पर चर्चा करना और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाना होना चाहिए। उनके मुताबिक, आयोजकों की ओर से अब तक ऐसे कार्यों का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है, जिनसे समाज के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता प्रदर्शित हो। उन्होंने पूर्व में आयोजित गुर्जर सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ आयोजनों में गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों के बजाय दूसरे समाजों के लोगों को मुख्य अतिथि बनाया गया। भाटी ने कहा कि यदि किसी सम्मेलन का नाम गुर्जर समाज के नाम पर रखा जाता है, तो उसमें समाज के लोगों की भागीदारी और उनकी अपेक्षाओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

एमएलसी चुनाव में समर्थन को लेकर भी उठाए सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान श्याम सिंह भाटी ने हाल ही में हुए ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में गुर्जर समाज से एक व्यक्ति मैदान में था, लेकिन उनके आरोप के अनुसार, संबंधित महासभा की ओर से उसके समर्थन में समाज को कोई स्पष्ट संदेश नहीं दिया गया। भाटी ने सवाल उठाया कि यदि कोई संगठन समाज के प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी की बात करता है, तो उसे ऐसे अवसरों पर अपनी भूमिका भी स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों से समाज के लोगों को उम्मीद रहती है कि वे शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाएंगे।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित महासभा का पक्ष और चुनाव में समर्थन को लेकर उसके निर्णय का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस आरोप पर आयोजक संगठन की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति का दूसरा पक्ष स्पष्ट हो सकेगा।

भाजपा पर गुर्जर समाज की अनदेखी का आरोप

श्याम सिंह भाटी ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने विभिन्न घटनाओं में गुर्जर समाज के हितों और सम्मान की अनदेखी की है। उन्होंने दादरी, मध्य प्रदेश और राजस्थान की घटनाओं का उल्लेख करते हुए पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाए। भाटी ने राजस्थान की एक घटना का हवाला देते हुए 72 गुर्जर समाज के लोगों की मौत का दावा किया और कहा कि ऐसे मामलों के बावजूद भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा समाज के नाम पर सम्मेलन आयोजित करना समझ से परे है। उन्होंने आयोजकों पर समाज को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

इन आरोपों और घटनाओं के संदर्भ में विस्तृत विवरण, संबंधित मामलों के प्रमाणित रिकॉर्ड तथा भाजपा या सम्मेलन आयोजकों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

संगठन के गठन और पंजीकरण को लेकर भी सवाल

प्रेस वार्ता में श्याम सिंह भाटी ने सम्मेलन आयोजित करने वाले संगठन के इतिहास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोजकों की ओर से संगठन के वर्ष 1908 से काम करने की बात कही जाती है, जबकि उनके दावे के अनुसार संगठन का पंजीकरण वर्ष 2013 में हुआ था। भाटी ने इस अंतर को स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि संगठन को अपने गठन, पंजीकरण और अब तक किए गए कार्यों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि समाज के लोग उसकी पृष्ठभूमि और गतिविधियों के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें।

हालांकि, संगठन के गठन और पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है। इस मुद्दे पर संबंधित संगठन का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

27 अक्टूबर के सम्मेलन पर टिकी नजरें

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने स्पष्ट किया है कि यदि सम्मेलन में गुर्जर समाज की अपेक्षाओं की अनदेखी होती है या दूसरे समाज के किसी व्यक्ति को मुख्य अतिथि बनाया जाता है, तो संगठन के कार्यकर्ता काले झंडे दिखाकर विरोध कर सकते हैं। इस चेतावनी के बाद दिल्ली में होने वाले सम्मेलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज होने की संभावना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सम्मेलन के आयोजक मुख्य अतिथि और कार्यक्रम के उद्देश्य को लेकर क्या जानकारी सार्वजनिक करते हैं तथा श्याम सिंह भाटी की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल, यह विवाद दो संगठनों के बीच सामाजिक प्रतिनिधित्व, राजनीतिक भूमिका और गुर्जर समाज के हितों को लेकर मतभेद के रूप में सामने आया है।